45 साल पुराने हाइटेंशन तार पर दौड़ रही बिजली, लड़खड़ा रही आपूर्ति

Updated at : 23 Aug 2018 4:58 AM (IST)
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45 साल पुराने हाइटेंशन तार पर दौड़ रही बिजली, लड़खड़ा रही आपूर्ति

मुजफ्फरपुर : जिले काे फूल लोड बिजली मिलने के बावजूद गर्मी में बिजली-पानी के लिए हाय-तौबा मचने लगा है. ट्रांसमिशन लाइन को दुरुस्त करने के लिए भले ही पूरे साल काम चलता है, लेकिन स्थिति यह है कि शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की सप्लाई सड़े-गले खंबों और जर्जर तारों के भरोसे है. […]

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मुजफ्फरपुर : जिले काे फूल लोड बिजली मिलने के बावजूद गर्मी में बिजली-पानी के लिए हाय-तौबा मचने लगा है. ट्रांसमिशन लाइन को दुरुस्त करने के लिए भले ही पूरे साल काम चलता है, लेकिन स्थिति यह है कि शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की सप्लाई सड़े-गले खंबों और जर्जर तारों के भरोसे है. हालत यह है कि कभी तार, तो कभी बिजली का खंभा गिर जाता है. आपूर्ति बढ़ भी जाये, तो लचर ट्रांसमिशन सिस्टम मुश्किल खड़ा कर देता है. यानी बिजली रहने के बावजूद ब्लैक आउट की स्थिति हो जाती है. हाइटेंशन तार पर क्षमता से अधिक लोड है.

15 मेगावाट क्षमता के तार पर 22 मेगावाट का लोड. इसकी बड़ा वजह लोड बढ़ने के साथ सिस्टम को अपडेट नहीं किया जाना है. चार दशक पुराने तार से अभी भी बिजली आपूर्ति हो रही है. हालांकि कुछ फीडर में उच्च क्षमता वाला तार लगाया गया है, लेकिन अधिकांश में पुराना तार से ही काम चल रहा है. इसका अंदाजा इसी लगाया जा सकता है कि पांच साल पहले हाइ टेंशन वायर में डॉग वायर का उपयोग होता था, जिसकी बिजली संचरण की क्षमता 15-17 मेगावाट है. पिछले पांच सालों में बिजली की खपत में डेढ़गुणा वृद्धि हुई है. मतलब 17 मेगावाट क्षमता के तार पर 22 मेगावाट तक बिजली आपूर्ति हो रही है. इससे तार टूटने से लेकर ट्रीपिंग तक की समस्या आ रही है. सिर्फ बेला फीडर में ही वूल्फ वायर लगा है. इसी तरह अन्य उपकरण की क्षमता नहीं बढ़ायी गयी है. पोल के बीच मानक से अधिक दूरी भी बिजली आपूर्ति को प्रभावित करता है.
डॉग वायर के सहारे अिधकतर पावर स्टेशन को बिजली आपूर्ति
हाईटेंशन व लो टेंशन तार को बदलने की जरूरत है. सभी कार्यपालक अभियंता से प्राथमिकता के आधार पर तार बदलने के लिए प्रस्ताव मांगा जायेगा. बिजली आपूर्ति में आ रही बाधा का एक कारण पुराना तार भी है.
रितेश कुमार, अधीक्षण अभियंता, एनबीपीडीसीएल
मुजफ्फरपुर : बिजली के फॉल्ट को दुरुस्त करने व पेड़ों की छंटायी लेकर बुधवार को 11 केवी विवि फीडर से जुड़े इलाकों में सुबह 10 से रात के नौ बजे के बीच छह घंटे बिजली गुल रही. इस कारण बिहार विवि, गन्नीपुर, मिश्रा टोला, दामुचक, मझौलिया आदि इलाकों में बिजली संकट की स्थिति बनी हुई थी. स्थानीय उपभोक्ताओं ने बताया कि सुबह करीब दस बजे बिजली कटी जो दो सवा दो बजे के आस-पास आयी. इसके बाद दो तीन बार ट्रिप करने के बाद साढ़े छह बजे तक रही. फिर साढ़े छह बजे शाम को बिजली बजे कटी जो साढ़े सात बजे आयी और फिर आठ बजे कट गयी. रात के पौने नौ बजे तक नहीं आयी थी.
इस कारण विवि फीडर से जुड़े मोहल्ले में बुधवार को सुबह से रात तक भीषण बिजली संकट की स्थिति बनी हुई थी. शहरी वन के कार्यपालक अभियंता ने बताया कि तार में पेड़ों की डाली सटने के कारण शॉट लग रहा था. इसके बाद उस पूरे लाइन में पड़ने वाले पेड़ों की छटायी करायी गयी ताकि आगे कोई दुर्घटना ना घटे. शाम के समय एक ट्रांसफॉर्मर में आग लगने की सूचना पर उसे दुरुस्त करने के लिए एक घंटे बिजली बंद हुई. बहुत पूरी आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त होगी. इधर कच्ची-पक्की, रामदयालु, भगवानपुर, बीबीगंज, मझौलिया आदि इलाकों में दो तीन घंटे बिजली गुल रही.
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