शराबबंदी : लजीज व्यंजन परोसते हैं शराब पिलाने वाले हाथ, 40 साल पुरानी शराब की दुकान में खोला होटल
Updated at : 25 Sep 2017 6:57 AM (IST)
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धनंजय पांडेय मुजफ्फरपुर : बुजुर्ग गोविंद लाल दत्त के माथे पर उस वक्त चिंता की लकीरें आ गयीं, जब बिहार में शराबबंदी के चलते 40 साल से जमे-जमाये कारोबार पर ताला लटक गया. राज्य सरकार के आदेश पर शराब की दुकान बंद हो गयी, तो भविष्य को लेकर अचानक कुछ नहीं सूझ रहा था. फिर […]
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धनंजय पांडेय
मुजफ्फरपुर : बुजुर्ग गोविंद लाल दत्त के माथे पर उस वक्त चिंता की लकीरें आ गयीं, जब बिहार में शराबबंदी के चलते 40 साल से जमे-जमाये कारोबार पर ताला लटक गया. राज्य सरकार के आदेश पर शराब की दुकान बंद हो गयी, तो भविष्य को लेकर अचानक कुछ नहीं सूझ रहा था. फिर कारोबार का ट्रैक बदला और करीब महीने भर बाद उसी दुकान में नया कारोबार नये कलेवर के साथ शुरू कर दिया. शराब की दुकान में अब होटल चलता है, जहां अब शराब पिलाने वाले हाथ लजीज व्यंजन परोसते हैं
गोविंद लाल आमदनी प्रभावित होने के बाद भी खुश हैं. कहते हैं, बिहार में शराबबंदी सरकार का बेहतर और ऐतिहासिक निर्णय है. सरैयागंज में कभी जायसवाल इंटरप्राइजेज के नाम से चर्चित दुकान के आगे अब ‘प्रिया होटल’ बोर्ड चमक रहा है. रामबाग चौरी के रहने वाले गोविंद लाल दत्त बताते हैं कि करीब 40 साल से यहां शराब की दुकान चलती थी. पांच अप्रैल, 2016 को बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद दुकान बंद करनी पड़ी.
पहले तो कुछ सूझ नहीं रहा था कि क्या करें. फिर इसमें होटल खोलने का निर्णय लिया और करीब महीने भर बाद दुकान का इंटीरियर डेकोरेशन बदल सका. गोविंद लाल के पांच बच्चे हैं. एक बेटा सुप्रीम कंपनी में प्रोडक्शन मैनेजर है. उसकी शादी हो चुकी है, जबकि एक बेटी की भी शादी कर चुके हैं. तीन बेटे अभी पढ़ाई कर रहे हैं.
बताते हैं कि आमदनी काफी प्रभावित हो गयी है. इसके बाद भी अब बहुत सुकून है. अब जो ग्राहक यहां आते हैं, उनके चेहरे पर तनाव की जगह मुस्कुराहट होती है. देख कर काफी खुशी मिलती है. शराब से कई परिवार टूट चुके थे. लोगों की कमाई का बड़ा हिस्सा शराब में खर्च हो जाता था. अब उनकी जिंदगी संवर रही है. घरों में कलह भी नहीं होते.
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