मुंगेर के हवेली खड़गपुर का विषहरी दुर्गा स्थान क्यों है खास? यहां सालभर होती है मां विषहरी की पूजा, सांप के विष से जुड़ी है अनोखी मान्यता

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मां विषहरी का मंदिर | Prabhat Khabar Network

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Aaj ka Darshan: हवेली खड़गपुर में स्थित विषहरी दुर्गा स्थान एक सिद्ध शक्ति पीठ के रूप में पूजित है. दुर्गा अष्टमी पर निशा रात्रि पूजा के समय देवी का आगमन होता है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं. यहाँ सांप-बिच्छू के काटे का भी इलाज होता है.

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Aaj ka Darshan: मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर में स्थित अति प्राचीन विषहरी दुर्गा स्थान सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, लोकविश्वास और सांप्रदायिक सौहार्द का अनूठा केंद्र माना जाता है. यहां सालभर मां विषहरी की पूजा होती है और दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते हैं. मान्यता है कि दुर्गा अष्टमी की निशा पूजा के दौरान मां भक्तों पर अवतरित होती हैं और सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी करती हैं. यही वजह है कि सावन, नाग पंचमी और दुर्गा पूजा के दौरान इस मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है.

सिद्ध शक्ति पीठ के रूप में प्रसिद्ध है विषहरी दुर्गा स्थान

हवेली खड़गपुर नगर का विषहरी दुर्गा स्थान वर्षों पुराना धार्मिक स्थल है. स्थानीय लोगों के बीच इसे सिद्ध शक्ति पीठ के रूप में विशेष श्रद्धा के साथ पूजा जाता है. मान्यता है कि यहां मां विषहरी अपने भक्तों की मनोकामनाएं सुनती हैं और उन पर विशेष कृपा बरसाती हैं.

यही कारण है कि मुंगेर ही नहीं, आसपास के कई जिलों से भी श्रद्धालु यहां दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं.

दुर्गा अष्टमी की निशा पूजा से जुड़ी है विशेष मान्यता

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता दुर्गा अष्टमी की निशा पूजा मानी जाती है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस रात पूजा के दौरान मां का भक्त पर आगमन होता है.

श्रद्धालु बताते हैं कि उस समय जो भी सच्चे मन से अपनी इच्छा व्यक्त करता है, मां उसकी मनोकामना पूरी करती हैं. महिलाएं आंचल फैलाकर और पुरुष हाथ जोड़कर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.

यह भी मान्यता है कि जिन महिलाओं के आंचल में पूजा के दौरान प्रसाद आता है, उन पर मां विषहरी की विशेष कृपा होती है और उनकी इच्छाएं पूरी होती हैं.

Aaj ka Darshan: तंत्र साधना के लिए भी जुटते हैं साधक

दुर्गा अष्टमी के अवसर पर इस मंदिर में तंत्र-मंत्र और साधना में विश्वास रखने वाले साधकों की भी बड़ी संख्या पहुंचती है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से यहां तांत्रिक साधना की परंपरा रही है, जिसके कारण यह स्थान धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है.

मंदिर और मस्जिद का अनूठा संगम

विषहरी दुर्गा स्थान की एक और खास पहचान यहां देखने वाला सांप्रदायिक सौहार्द है.

मंदिर से सटी छोटी मस्जिद में सुबह अजान होती है, उसी समय मंदिर में घंटियां भी बजती हैं. स्थानीय लोग इसे आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता की मिसाल मानते हैं.

सांप-बिच्छू के विष से जुड़ी लोकमान्यता

इस मंदिर से जुड़ी एक प्रचलित लोकमान्यता यह भी है कि यदि किसी व्यक्ति को सांप, बिच्छू या किसी अन्य विषैले जीव ने काट लिया हो, तो मंदिर की भभूत का सेवन कराने और परिसर में स्थित कुएं के जल से स्नान कराने पर विष का असर समाप्त हो जाता है.

हालांकि इस मान्यता का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है. सांप या किसी भी विषैले जीव के काटने की स्थिति में तुरंत नजदीकी अस्पताल जाकर चिकित्सकीय उपचार कराना ही सबसे सुरक्षित और आवश्यक उपाय है.

Aaj ka Darshan: सावन और नाग पंचमी पर उमड़ती है श्रद्धा

विषहरी दुर्गा स्थान में सालभर पूजा होती है, लेकिन सावन महीने में यहां विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं. इस दौरान बिहुला-विषहरी की कथा का आयोजन किया जाता है और मां विषहरी की कलश स्थापना कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है.

मैना पांचे और नाग पांचे के अवसर पर श्रद्धालु नाग पूजा करते हैं तथा दूध और लावा अर्पित करने की परंपरा निभाते हैं.

दुर्गा पूजा में लगता है विशाल धार्मिक मेला

दुर्गा पूजा के दौरान इस प्राचीन मंदिर में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या पहुंचती है. दूर-दूर से आने वाले भक्त मां के दर्शन कर सुख, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं.

स्थानीय लोगों के अनुसार, यह मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक और लोक परंपराओं का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है.

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राणा गौरी शंकर

लेखक के बारे में

By राणा गौरी शंकर

राणा गौरी शंकर प्रिंट माध्यम में 32 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक आज से की. अभी प्रभात खबर के मुंगेर कार्यालय में कार्यरत हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.

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