राजभवन के आदेशों को लेकर एमयू अपना रहा दोहरी नीति, सवालों के घेरे में विश्वविद्यालय का कार्य

Published by : RANA GAURI SHAN Updated At : 10 Nov 2025 6:32 PM

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विश्वविद्यालय ने तीनों अधिकारियों को यूआर पद से मुक्त कर दिया और उनकी जगह दूसरे शिक्षकों को संबद्ध कॉलेज का यूआर बना दिया गया.

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– राजभवन के आदेश के बावजूद अबतक कई अधिकारियों के पास एक से अधिक पद

– दो कॉलेजों में वरीय शिक्षक होने के बाद जूनियर संभाल रहे प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी

मुंगेर

मुंगेर विश्वविद्यालय ने जहां बीते दिनों बिहार विधान सभा चुनाव में जारी आचार संहिता को लेकर दोहरी नीति अपना रहा. वहीं अब राजभवन के आदेशों को लेकर भी विश्वविद्यालय द्वारा दोहरी नीति अपनायी जा रही है. जिसके कारण अब खुद विश्वविद्यालय की कार्य प्रणाली सवालों के घेरे में आने लगी है. बीते दिनों जहां राजभवन से मिले शिकायत के बाद विश्वविद्यालय द्वारा अपने तीन शिक्षकों से संबद्ध कॉलेज के शासी निकाय के यूआर (यूनिवर्सिटी रिप्रजेंटेटिव) पद से हटा दिया गया. वहीं इससे अलग राजभवन द्वारा एक से अधिक पद की जिम्मेदारी अधिकारियों को नहीं दिये जाने के आदेश के बावजूद अबतक विश्वविद्यालय के कई अधिकारी संबद्ध कॉलेजों के शासी निकाय में यूआर बने हैं. इतना ही नहीं एमयू के दो कॉलेजों में वरीय शिक्षक होने के बावजूद जूनियर शिक्षक प्रभारी प्राचार्य पद की जिम्मेदारी संभाल रहे है.

राजभवन के आदेश पर केवल तीन पद मुक्त, शेष बने हैं अधिकारी

बता दें कि विश्वविद्यालय द्वारा 17 जुलाई को एक अधिसूचना जारी की गयी. जिसमें विश्वविद्यालय ने अपने 17 संबद्ध कॉलेज, 5 बीएड कॉलेज तथा एक लॉ कॉलेज के शासी निकाय के लिये यूआर नियुक्त किया गया. वहीं इस बीच विश्वविद्यालय को राजभवन से एक शिकायत पत्र प्राप्त हुआ. जिसमें शिकायतकर्ता द्वारा विश्वविद्यालय के तीन अधिकारियों के पास एक से अधिक पद होने की शिकायत की गयी थी. जिसके बाद विश्वविद्यालय ने तीनों अधिकारियों को यूआर पद से मुक्त कर दिया और उनकी जगह दूसरे शिक्षकों को संबद्ध कॉलेज का यूआर बना दिया गया. जबकि इससे अलग राजभवन ने कुछ दिन पूर्व की विश्वविद्यालय को पत्र भेजकर एक अधिकारी को एक से अधिक पद नहीं देने का आदेश दिया गया, लेकिन इससे अलग अबतक कई अधिकारी संबद्ध कॉलेज के यूआर भी हैं. बता दें कि विश्वविद्यालय के डीएसडब्लूय प्रो महेश्वर मिश्रा जहां एमएस कॉलेज, अलौली के यूआर हैं. वहीं आईसी लीलग इंचार्ज प्रो जीसी पांडेय एसबीएन कॉलेज, गढ़ीरामपुर के यूआर हैं. वहीं नोडल अधिकारी डॉ कुंदन लाल एसके कॉलेज, लोहंडा के यूआर हैं. इसके अतिरिक्त भी कई अधिकारी हैं. जो विश्वविद्यालय के संबद्ध कॉलेजों में यूआर हैं.

वरीय शिक्षक की जगह जूनियर शिक्षक बने हैं प्रभारी प्राचार्य

एमयू में पदों के जिम्मेदारी देने को लेकर पूरी तरह दोहरी नीति अपनाई जा रही है. इसका अंदाजा केवल इसी बात से लगाया जा सकता है कि दो कॉलेजों में वरीय शिक्षक होने के बावजूद जूनियर शिक्षक प्रभारी प्राचार्य बने हैं. केएमडी कॉलेज, परबत्ता में प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी 2017 बैच के सहायक प्राध्यापक डारूॅ अरविंद कुमार शर्मा संभाल रहे हैं. जबकि इस कॉलेज में विश्वविद्यालय द्वारा इसी साल प्राध्यापक सह रसायनशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो विनोद कुमार का स्थानांतरण एचएच कॉलेज हवेली खड़गपुर से केएमडी कॉलेज, परबत्ता में किया गया है. इतना ही नहीं केडीएस कॉलेज, गोगरी में 2019 बैच के सहायक प्राध्यापक डॉ रौशन रवि प्रभारी प्राचार्य हैं. जबकि इस कॉलेज में उनसे सिनियर दो शिक्षक हैं. जो रसायनशास्त्र के डॉ करूणेश केवश तथा भौतिकी के डॉ केके भार्गव हैं.

कहते हैं कुलसचिव

कुलसचिव प्रो घनश्याम राय ने बताया कि राजभवन में तीनों शिक्षकों को लेकर एक शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत किया गया था. जिसे लेकर राजभवन द्वारा पत्र भेजा गया था. जिसके तहत निर्णय लिया गया. हलांकि विशेष रूप से नीति निर्धारण कुलपति द्वारा किया जाता है. जिनके आदेशानुसार निर्णय लिया गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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