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तीन सहोदर भाई-बहनों की मौत पर रो पड़ा पूरा इलाका, क्षेत्र में मातमी सन्नाटा

Updated at : 13 May 2025 6:59 PM (IST)
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तीन सहोदर भाई-बहनों की मौत पर रो पड़ा पूरा इलाका, क्षेत्र में मातमी सन्नाटा

महिला-पुरुष सैकड़ों की संख्या में लोग गंगा घाट की और दौड़ पड़े.

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– दो बेटे व एक बेटी की मौत से दहल उठी मां, बिखलती मां ने कहा हे भगवान हम मां-बेटी को क्यों छोड़ दिया

– गंगा घाट से लेकर पोस्टमार्टम हाउस तक लगी रही लोगों की भीड़, सभी की आंखे थी नम

मुंगेर

मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मिर्जापुर बरदह गंगा घाट पर मंगलवार की सुबह दिल दहला देने वाली घटना घटित हुई. जिसमें कल्याणचक गांव निवासी तीन सहोदर भाई-बहन की मौत गंगा स्नान के दौरान गंगा में डूबने से हो गयी. घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्रवासियों की भीड़ गंगा घाट पर उमड़ पड़ी. क्या महिला-पुरुष सैकड़ों की संख्या में लोग गंगा घाट की और दौड़ पड़े. इस घटना के बाद पूरा इलाका रो पड़ा. जबकि कल्याणचक गांव में मातम पसर गया. जिसने घटना के बारे सुना, वहीं रो पड़ा.

तीन भाई-बहनों की हो गयी मौत, मल्लाह ने मां-बेटी की बचायी जान

मुफस्सिल थाना क्षेत्र के कल्याणचक गांव निवासी संजय यादव की पत्नी रेणू देवी, उसका 20 वर्षीय बेटी शालू कुमारी, 18 वर्षीय बेटी मांडवी कुमारी, 16 वर्षीय बेटा हर्ष कुमार एवं 14 वर्षीय बेटा अमन कुमार घर में पूजा से पहले गंगा स्नान करने गयी. इसी दौरान पांचों डूबने लगी. पांचों को डूबते गंगा घाट पर नाव के साथ मौजूद मल्लाह सीताकुंड डीह गांव निवासी छंगुली मल्लाह ने जान पर खेल कर मां रेणू देवी और बेटी मांडवी को बचाया. लेकिन अन्य तीन को वह नहीं बचा सका. एक साथ तीन-तीन लोगों के डूबने की सूचना मिलते ही प्रशासनिक गतिविधि तेज हो गयी. इस बीच स्थानीय एक गोताखोर सीताकुंड डीह गांव निवासी इंद्रदेव साहनी वहां पुहुंचे और गंगा में तीनों की खोज शुरू की. गोताखोर ने एक जगह से गंगा के गर्भ से पहले हर्ष व अमन को बाहर निकाला. जिसे वाहन से यह सोच कर सदर अस्पताल ले जाया गया है कि शायद सांस चल रही होगी. लेकिन इमरजेंसी ड्यूटी में तैनात डॉ अनुराग ने दोनों को जांच के बाद मृत घोषित कर दिया. जबकि कुछ ही देर में तीसरी शालू कुमारी को भी सदर अस्पताल लाया गया. जहां उसे भी चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया.

घर में रहती थी तीन भाई-बहन, बीए की छात्रा थी मृतका शालू

मृतक शालू अपनी बहन मांडवी व छोटे भाई हर्ष के साथ घर पर रहती थी. जबकि उसके पिता संजय यादव दिल्ली में रहकर प्राइवेट काम करते थे. उनके साथ उनकी पत्नी रेणू देवी व छोटा बेटा अमन कुमार रहता था. मृतका शालू जहां बीआर महिला कॉलेज में बीए प्रथम सत्र की छात्रा थी. वहीं हर्ष ने इस बार मैट्रिक की परीक्षा दिया था. जबकि अमन भी दिल्ली में ही सरकारी स्कूल में पढ़ता था.

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उत्सवी माहौल पर लगा ग्रहण, घर में पसरा मातम

मुंगेर :

ग्रामीणों ने बताया कि संजय यादव के घर में कुल देवता (गोसाई) आवासित है. उसके छोटे भाई सुमित कुमार अपने घर गोसाई ले जाना चाहता था. जबकि गोतिया में ही एक लड़की की शादी थी. जिसके कारण संजय यादव अपनी पत्नी व बेटा अमन के साथ 5 मई को दिल्ली से अपने घर कल्याणचक आया. 8 मई को शादी संपन्न होने के बाद पूरा परिवार विधि विधान के साथ गोसाई पूजन में लग गये. 14 मई को विधि विधान के साथ पूजा अर्चना कर गोसाई सुमित कुमार अपने घर ले जाता. जिसको लेकर पूरे घर में उत्सवी माहौल था. लेकिन किसी का ग्रहण लगा और गंगा स्नान करने के दौरान उसी घर के तीन-भाई बहन की मौत गंगा में डूबने से हो गयी. जिसके कारण घर में मातमी सन्नाटा पसर गया.

हमरा काहे छोड़ देलहो हो भगवान

आंखों के सामने अपने तीन-तीन जिगह के टुकड़े को डूबते देख मां का कलेजा फट गया. उसके आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रही है. रोते-रोते वह बेहोश हो जा रही थी.जब होश आता तो वह दहाड़ मारकर रोने लगती थी. बिखलती मां कह रही थी हो भगवान हमरा काहे छोड़ देलहों हो, हमरो हमरा बेटवा-बेटी के साथ काहे नहीं उठा लिये. पिता संजय और पूरे परिवार का भी रो-रो कर बुरा हाल था.

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गंगा घाट से लेकर पोस्टमार्टम हाउस तक लगी रही भीड़

मुंगेर :

एक ओर जहां घटना की सूचना मिलते ही मिर्जापुर बरदह व कल्याणचक गांव के लोग गंगा घाट की ओर दौड़ पड़े. वहीं दूसरी ओर आस-पास के क्षेत्रों के लोगों भी गंगा घाट पर पहुंच गये. गंगा घाट पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी. जबकि तीनों बच्चों को सदर अस्पताल लाया गया तो साथ में सैकड़ों लोग सदर अस्तपाल पहुंच गये. पुलिस जब तीनों शवों को कागजी प्रक्रिया पूरी कर पोस्टमार्टम हाउस ले गयी तो वहां तीनों सहोदर भाई-बहनों को देखने के लिए जानने-पहचाने वाले लोगों के साथ ही विभिन्न राजीनितिक दलों के नेता व कार्यकर्ताओं की भीड़ जमा हो गयी. इधर मृत शालू, हर्ष व अमन को अंतिम संस्कार के लिए सीताकुंड डीह घाट ले जाया गया. अंतिम यात्रा में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी. जब श्मशासन घाट पर तीनों की चिता सजी और साथ डूब रही मांडवी ने जब तीनों भाई-बहनों को बारी-बारी से मुखाग्नि दी तो वहां मौजूद लोगों को रो पड़े. यह दृश्य देख कर लोगों के आंखों से आंसू निकल आया.

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डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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BIRENDRA KUMAR SING

लेखक के बारे में

By BIRENDRA KUMAR SING

BIRENDRA KUMAR SING is a contributor at Prabhat Khabar.

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