मॉरीशस भारतीय सांस्कृतिक और साहित्यिक भाव का छोटा गुलदस्ता : हरीलाल

Updated at : 16 Mar 2026 6:53 PM (IST)
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मॉरीशस भारतीय सांस्कृतिक और साहित्यिक भाव का छोटा गुलदस्ता : हरीलाल

जमालपुर कॉलेज जमालपुर के हिंदी विभाग की ओर से सोमवार को विशिष्ट व्याख्यान माला एपिसोड-1 का शुभारंभ किया गया

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मुंगेर.

जमालपुर कॉलेज जमालपुर के हिंदी विभाग की ओर से सोमवार को विशिष्ट व्याख्यान माला एपिसोड-1 का शुभारंभ किया गया. यहां मुख्य वक्ता के रूप में मॉरीशस के हिंदी-भोजपुरी भाषा के वरिष्ठ साहित्यकार और कवि हीरालाल लीलाधर थे. जिन्होंने भारत मॉरिशस सांस्कृतिक साहित्यिक संबंध विषय पर अपना व्याख्यान दिया.

सर्वप्रथम मुंगेर के कवियों ने मुख्य अतिथि को अंगवस्त्र प्रदान किया. प्रमोद निराला ने स्वागत वक्तत्व दिया और कहा कि भारत मॉरिशस का सांस्कृतिक साहित्यिक संबंधों के बीच हीरालाल लीलाधर एक सेतु बन रहे हैं. हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ चन्दन कुमार ने कहा कि भारतीय चेतना को मॉरीशस ने जिस प्रकार जीवित रखा है. वह हमारी जिजीविषा की पहचान है. विशिष्ट व्याख्यान माला में मुख्य वक्ता ने कहा ने कहा कि आप जिस भारतीय सांस्कृतिक और साहित्यिक भावभूमि को देख रहे हैं. मॉरीशस उसका एक छोटा सा गुलदस्ता है. आज जो लोग मॉरीशस में रह रहे हैं. उनके पुर्वज भारत के ही हैं. जिन्होंने मॉरीशस की मिट्टी को भारतीयता की खुशबू से संवारा है. भारतीय अनुबंधित श्रमिकों (गिरमिटिया मजदूरों) का पहला जत्था 2 नवंबर 1834 को एटलस नामक जहाज से मॉरीशस पहुंचा था. इस ऐतिहासिक घटना की याद में मॉरीशस में 2 नवंबर को आप्रवासी दिवस मनाया जाता है. उन्होंने कहा कि 1834 और 20 वीं सदी की शुरुआत के बीच लगभग पांच लाख भारतीय मजदूर वहां ले जाये गये थे. उन मजदूरों के साथ यहां की संस्कृति गई और साहित्य के रूप में रामचरित मानस, महाभारत, गीता की मौखिक परंपरा गई. लोक भाषा के रूप में भोजपुरी की भाषा गयी और यही कारण है कि मॉरिशस के लोग भारत से सांस्कृतिक और साहित्यिक रूप से जुड़ाव महसूस करते हैं. उन्होंने अपनी कविता जय हनुमान का पाठ किया. मौके पर मधुसूदन आत्मीयता, सुनील सिन्हा, महेश अनजाना, मनोविज्ञान विभाग के शिक्षक डॉ ओमप्रकाश, डॉ अभिलाषा कुमारी, डॉ चंदा कुमारी, डॉ सैकत बनर्जी, डॉ नेहा कुमारी, प्रो अजय कुमार प्रभाकर मौजूद थे.

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