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युद्ध परिस्थिति को लेकर एनसीसी कैडेटों ने किया मॉक ड्रिल

Updated at : 07 May 2025 11:40 PM (IST)
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युद्ध परिस्थिति को लेकर एनसीसी कैडेटों ने किया मॉक ड्रिल

युद्ध में सैन्य बलों के साथ प्रत्येक युवाओं की भी भूमिका होती है. युद्ध के समय देश के अंदर आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी युवा वर्ग पर ही होता है.

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मुंगेर. युद्ध में सैन्य बलों के साथ प्रत्येक युवाओं की भी भूमिका होती है. युद्ध के समय देश के अंदर आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी युवा वर्ग पर ही होता है. ऐसे में देश के प्रत्येक युवाओं को तैयार रहना चाहिए. उक्त बातें मुंगेर विश्वविद्यालय के कुलसचिव कर्नल विजय कुमार ठाकुर ने भारत-पाकिस्तान के बीच वर्तमान युद्ध परिस्थिति को लेकर सरकार के निर्देश पर विश्वविद्यालय के समक्ष आयोजित मॉक ड्रिल के दौरान एनसीसी कैडेटों से कही.

कुलसचिव ने कहा कि कोई व्यक्ति कभी युवा नहीं बन सकता, यदि युद्ध परिस्थिति में उसके रीढ़ में खून का उबाल न उठे. युवा वर्ग अपंग व्यक्ति का सहारा होता है. आपातकालीन स्थिति में सामान्य नागरिक प्रशासन की सहायता कर अपनी सूझ-बूझ और प्रशिक्षण को साकार कर सकता है. कुलसचिव ने बताया कि वर्तमान में देश में युद्ध परिस्थिति को लेकर विश्वविद्याल के सभी कॉलेजों में मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया है. जिसमें एनसीसी, एनएसएस के साथ शिक्षक व अन्य विद्यार्थी शामिल हो रहे है. इसका उदेश्य युद्ध की स्थिति में आपात के दौरान बचाव के प्रति सजग रहना है.

डीजे कॉलेज में एनसीसी कैडेटोे ने किया अभ्यास

आरडी एंड डीजे कॉलेज में नामांकित एनसीसी कैडेट्स द्वारा बुधवार को हवाई हमले से बचाव हेतु मॉक ड्रिल किया गया. एनसीसी पदाधिकारी लेफ्टिनेंट डा. प्रभाकर पोद्दार ने बताया कि जब सैन्य बलों का परिवार सुरक्षित हो तो युद्ध करते समय उनका मनोबल अधिकतम होता है. भारत सरकार के द्वारा सामान्य नागरिक प्रशासन और आम जनता को युद्ध से बचाव हेतु मॉक ड्रिल कराने को कहा गया है. उन्होंने कहा कि युद्ध के समय अकस्मात तैयारी के लिए ही एनसीसी कैडेट्स को प्रशिक्षित किया जाता है. जिस देश में इन प्रशिक्षित युवाओं की संख्या अधिक होगी. उसे सैन्य रणनीति में बढ़त हासिल होता है. ये प्रशिक्षित युवा एनसीसी कैडेट्स युद्ध कला के सभी कलाओं में प्रशिक्षित होते हैं. इन्हें इंफेंट्री शस्त्र चलाना, ड्रिल व्यवहार, फिल्ड क्राफ्ट, बैटल क्राफ्ट, सैन्य मानचित्रों को पढ़ना, आपदा प्रबंधन, सैन्य गतिविधियों में सहायता करना, स्थानीय प्रशासन में स्वयंसेवक की भूमिका आदि का प्रशिक्षण देकर तैयार किया गया है. एनसीसी को “सेकेंड लाइन आफ डिफेंस ” की श्रेणी में रखा जाता है. महाविद्यालय प्राचार्य प्रो. प्रभात कुमार ने भी एनसीसी कैडेट्स को प्रेरित करते हुए कहा कि युद्ध एक अंतिम उपाय है. जिसका कोई विकल्प नहीं होता है, परंतु इस युद्ध-विभिषिका में सभी को शामिल होना पड़ता है, इसलिए हमेशा अपना मनोबल ऊंचा रखना चाहिए.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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MD. TAZIM

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