1. मुंगेर विश्वविद्यालय ने शुरू की शिक्षकों के सेवा संपुष्टि की प्रक्रिया

1. मुंगेर विश्वविद्यालय ने शुरू की शिक्षकों के सेवा संपुष्टि की प्रक्रिया
– 2017 और उसके बाद योगदान देने वाले शिक्षकों से मांगा गया है दस्तावेज
मुंगेरमुंगेर विश्वविद्यालय ने अपने 17 अंगीभूत कॉलेजों में कार्यरत नियमित वैसे शिक्षक, जिनकी अबतक सेवा संपुष्टि नहीं हो पायी है उनके सेवा संपुष्टि की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसके लिये विश्वविद्यालय ने 2017 और उसके बाद योगदान देने वाले वैसे शिक्षक, जिनकी सेवा संपुष्टि नहीं हो पायी है उनसे निर्धारित दस्तावेजों की मांगी है इसके लिये विश्वविद्यालय ने सभी कॉलेजों के प्राचार्य/प्रभारी प्राचार्य को पत्र भेजा है. यहां बता दें कि शिक्षकों के सेवा संपुष्टि की मांग को लेकर 21 अप्रैल को ही एमयू के सीनेटर सह पूर्व नोडल अधिकारी डॉ कुंंदनलाल विश्वविद्यालय में एकदिवसीय सांकेतिक धरना पर बैठे थे. इस दौरान कुलपति के प्रतिनिधिमंडल द्वारा शिक्षकों के सेवा संपुष्टि की प्रक्रिया जल्द पूर्ण करने का आश्वासन दिया गया था. जिसके बाद अब विश्वविद्यालय ने इसके लिये सभी कॉलेजों को पत्र भेजा है. पत्र में कहा है 2017 या इसके पश्चात नियुक्त शिक्षक विश्वविद्यालय अंतर्गत विभिन्न स्नाकोत्तर विभाग तथा अंगीभूत कॉलेजों में कार्यरत हैं. इनमें से कई विषयों के शिक्षकों की सेवा अबतक संपुष्ट नहीं हो पायी है. ऐसे शिक्षक, जिनकी सेवा संपुष्टि नहीं हुयी है. उनका समस्त शैक्षणिक, आयु, जाति, शैक्षणिक अनुभव प्रमाण पत्र आदि से संबंधित दस्तावेजों की शिक्षकों द्वारा स्वअभिप्रमाणित तथा प्राचार्य/प्रभारी प्राचार्य द्वारा सत्यापित प्रति विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेंगे, ताकि दस्तावेज को मूल संस्थान जांच हेतु भेजा जा सके तथा जांचोपरांत ऐसे शिक्षकों के सेवा संपुष्टि की अग्रेतर कार्रवाई की जा सके.
लापरवाह कार्य प्रणाली से प्रक्रिया पूर्ण होने पर संसय
विश्वविद्यालय द्वारा भले ही शिक्षकों के सेवा संपुष्टि की प्रक्रिया आरंभ कर दी है, लेकिन इसके पूरा होने पर खुद विश्वविद्यालय की कार्य प्रणाली संसय पैदा कर रही है. बता दें कि इससे पहले 27 जनवरी को भी कॉलेजों में प्रयोगशाला व लाइब्रेरी को सुदृढ़ करने की मांग को लेकर सीनेटर धरना पर बैठे थे. जिसमें कुलपति द्वारा जल्द ही उनकी मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया गया. साथ ही इसके लिये विश्वविद्यालय द्वारा सभी कॉलेजों को पत्र भी भेजा गया, लेकिन लगभग चार माह बाद भी कॉलेजों में प्रयोगशाला व लाइब्रेरी की स्थिति बदहाल है.
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