लचर प्रशासनिक व्यवस्था की भेंट चढ़ गया कांवरिया, जवान बेटे की मौत पर फूट-फूट कर रोयी मां

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 11 Aug 2024 11:21 PM

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श्रावणी मेला में कांवरियों को बेहतर सुविधा और उसके सुरक्षा का दावा करने वाली प्रशासनिक दलील रविवार को खोखली साबित हुई.

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प्रतिनिधि, असरगंज. श्रावणी मेला में कांवरियों को बेहतर सुविधा और उसके सुरक्षा का दावा करने वाली प्रशासनिक दलील रविवार को खोखली साबित हुई. लचर प्रशासनिक व्यवस्था का आलम यह रहा कि रविवार को किशनगंज जिले के बहादुरगंज थाना क्षेत्र के बनगामा गांव निवासी चंचल दास के 25 वर्षीय पुत्र भक्त दास को अपनी जान से चुकानी पड़ी. क्योंकि हजारों वाहनों और लाखों कांवरियों के चलने वाले मार्ग में विद्युत विभाग द्वारा लगाया गया हाइटेंशन लाइन काफी नीचे है.

मां के सामने ही धू-घू कर जल उठा बेटा

किशनगंज से 52 कांवरियों का जत्था ट्रेवल एजेंसी की बस से रविवार की अहले सुबह सुलतानगंज पहुंचा. जहां से जलभर सभी कांवरिया देवघर के लिए रवाना हुए. बस भी साथ चल रही थी. इसमें कांवरियों के खाने-पीने व अन्य सामान था. बस असरगंज-शाहकुंड मुख्य पथ में कच्ची कांवरिया मार्ग के समीप सड़क के किनारे खड़ी थी. बस चालक की नजर बस के ऊपर से गयी हाइटेंशन नंगी तार पर नहीं पड़ी. जब कांवरियों का जत्था वहां पहुंचा तो भक्त दास से उसकी मां रीना देवी ने कहा कि वह पैदल नहीं जा पायेंगी. इसके बाद मां का कांवर लेकर भक्त दास बस की छत पर रखने के लिए चढ़ा. उसे यह ध्यान नहीं रहा कि बस के ऊपर से हाइटेंशन लाइन गुजरा है. जैसे ही वह छत पर चढ़ा वैसे ही वह हाइटेंशन लाइन की चपेट में आ गया और धू-धू कर जलने लगा. मां के आंखों के सामने बेटा भक्त दास ने दम तोड़ दिया.

करंट की सप्लाई बस में दौड़ी, तो जलने लगा पहिया

जब छत पर भक्त दास को करंट लगी तो वह करंट पूरे बस में दौड़ गयी. इस कारण बस का पहिया भी धू-धू कर जलने लगा. बस की छत पर आग और नीचे पहिये में लगी आग के कारण वहां पर अफरा-तफरी का माहौल उत्पन्न हो गया. कांवरिया इधर-उधर भागने लगे और कांवरिया पथ में देखते ही देखते वाहनों की रफ्तार ठप हो गयी. इस कारण जाम की स्थिति उत्पन्न हो गयी. वह तो गनीमत था कि बस पर मृतक के अलावे के कोई नहीं था. जब मां दौड़ कर जाने लगी तो जत्थे में शामिल लोगों ने उसे पकड़ लिया. नहीं तो रविवार को एक बड़ी घटना घट सकती थी. अग्निशमन दस्ता की टीम ने फुर्ती दिखायी और बस के टायर में लगी आग को बुझाया. अगर थोड़ी भी देर होती तो धू-धू कर बस भी जल जाता. अगर बस पर कांवरिया का जत्था रहता तो शायद करंट से या बस जलने से सभी मर जाते और यहां भी हाजीपुर वाली घटना की पुनरावृति हो जाती.

परिजनों का रो-रो कर था बुरा हाल

युवा कांवरिया भक्त दास की मौत के बाद मां रीना देवी सहित जत्थे में शामिल सभी कांवरियों का रो-रो कर बुरा हाल था. मृतक के परिजन परशुराम दास ने बताया कि हम लोग 52 की जत्था में रविवार की सुबह सुलतानगंज से गंगाजल भरकर पैदल बाबा धाम जा रहे थे. हमारे साथ आ रही टूरिस्ट बस कच्ची कांवरिया पथ के रास्ते शाहकुंड मोड़ के समीप खड़ी थी. जब भक्त दास कांवर रखने चढ़ा को वह विद्युत तार की चपेट में आ गया. मृतक की मां रीना देवी दहाड़ मार कर रोये जा रही थी. उसने रोते हुए कहा कि वह अपने बेटे से कहा कि वह पैदल नहीं जा पायेगी. इस पर उसका बेटा कांवर बस के ऊपर रखने के लिए चढ़ा था और मेरे सामने ही वह करंट लगने से मौत को गले लगा लिया.

काफी नीचे से गुजरा हाइटेंशन लाइन ने ले ली जान

प्रशासनिक स्तर पर विद्युत विभाग को कांवरियों को करंट से बचाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश देता रहा, लेकिन विद्युत विभाग के अधिकारियों के कानों पर जूं तक रेंगा. प्रशासनिक महकमा ने भी यह जायजा नहीं लिया कि कहां नंगा विद्युत तार दौड़ रही और कितनी ऊंचाई पर है. जिसकी भेंट आज एक कांवरिया चढ़ गया. विदित हो कि शाहकुंड मोड़ कच्ची कांवरिया पथ के समीप हाइटेंशन लाइन कम ऊंचाई से गुजरी है. जिसमें गाइड वायर भी नहीं लगा था. हाइटेंशन तार के नीचे रोज दर्जनों कांवरियों वाहन उसी हाइटेंशन लाइन के नीचे खड़ी होती है. कच्ची कांवरिया पथ के समीप कमराय, मासूमगंज बाजार, शंभूगंज मोड, सादपुर बगीचा सहित कांवरिया पथ को जोड़ने वाले लिंक सड़क के आसपास कम दूरी पर हाइटेंशन लाइन गुजरा है. जो कभी भी हाजीपुर वाली घटना की पुनरावृति बन सकती है.

कहते हैं कनीय अभियंता

विद्युत विभाग के कनीय अभियंता रोशन कुमार ने बताया कि एक कांवरिया की मौत हाइटेंशन लाइन के संपर्क में आने हो गयी. विद्युत करंट से मौत पर विभाग में मुआवजा का प्रावधान है. उनके द्वारा मुआवजा के लिए विभाग को लिखा जायेगा. उन्होंने बताया कि जहां तक गाइड वायर की बात है इसके संबंध में विभाग को लिखा जायेगा.

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