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1000 एमएलटी ऑक्सीजन प्लांट होते हुए भी शाम बाद मरीज सिलेंडर कंसंट्रेटर भरोसे

Updated at : 19 Jan 2026 6:27 PM (IST)
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1000 एमएलटी ऑक्सीजन प्लांट होते हुए भी शाम बाद मरीज सिलेंडर कंसंट्रेटर भरोसे

1000 एमएलटी ऑक्सीजन प्लांट होते हुए भी शाम बाद मरीज सिलेंडर कंसंट्रेटर भरोसे

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स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से नहीं मिल पा रही 24×7 सुविधा

बदहाल व्यवस्था के बीच हाथी का दांत बना है ऑक्सीजन प्लांट

मुंगेर. सदर अस्पताल में साल 2021 में सरकार द्वारा 1000 एमएलटी का ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण 5 साल बाद भी मरीजों को ऑक्सीजन प्लांट की सुविधा पूरी तरह नहीं मिल पा रही है. हाल यह है कि जुगाड़ पर जहां अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट का संचालन हो रहा है. वही शाम पांच बजे के बाद वार्डों में मरीज ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और सिलेंडर के भरोसे होते हैं.

जुगाड़ पर चल रहा ऑक्सीजन प्लांट

साल 2025 में 100 बेड के मॉडल अस्पताल के आरंभ होने के बाद यहां लगे ऑक्सीजन पाइपलाइन से मरीजों को बेड पर ही ऑक्सीजन की सुविधा मिलनी थी, लेकिन अस्पताल में बदहाल व्यवस्था और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण वर्तमान में ऑक्सीजन प्लांट जुगाड़ पर चल रहा है. बता दें कि उर्मिला इंटरपाइजेज एजेंसी द्वारा ऑक्सीजन प्लांट संचालन के लिए एक एलटी की नियुक्ति की गयी थी, लेकिन साल 2025 में ही एजेंसी द्वारा एलटी को हटा दिया गया. जिसके बाद अब अस्पताल प्रबंधन द्वारा जुगाड़ के एलटी के भरोसे ऑक्सीजन प्लांट चलाया जा रहा है. जिसके द्वारा सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक ही ऑक्सीजन प्लांट चलाया जाता है. जबकि शाम पांच बजे के बाद वार्डों में मरीज ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और ऑक्सीजन सिलेंडर के भरोसे होते हैं.

हाथी का दांत बना है ऑक्सीजन प्लांट

सदर अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट बदहाल व्यवस्था और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण हाथी का दांत बनकर रह गया है. बता दें कि बिना दक्ष एलटी के नियमानुसार ऑक्सीजन प्लांट का संचालन ही नहीं होना है, क्योंकि एलटी द्वारा ऑक्सीजन की पियूरिटी जांच के बाद ही इसे वार्डों में सप्लाई किया जाना है. जबकि ऑक्सीजन प्लांट संचालन के दौरान एलटी को नियमित रूप से वहां उपस्थित होना है, लेकिन जुगाड़ पर चल रहे ऑक्सीजन प्लांट में न तो नियमित रूप से एलटी होता है और न ही 24x 7 ऑक्सीजन का सप्लाई वार्डों में हो रहा है. जिसके कारण आये दिन ऑक्सीजन की कमी से मरीज की मौत के बाद परिजनों के हंगामें का मामला सामने आता है.

कहते हैं सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ राजू ने बताया कि ऑक्सीजन प्लांट संचालन को सुचारू रूप से करने के लिये वैक्लपिक व्यवस्था की जा रही है, ताकि वार्डों में 24×7 मरीजों को बेड पर ऑक्सीजन की सुविधा मिल सके.

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ऑक्सीजन की कमी हो रही मरीजों की मौत

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02 जुलाई 2025 – मॉडल अस्पताल के आईसीयू वार्ड में गुलजार पोखर दारू गोदाम निवासी 67 वर्षीय रंजन देवी की मौत हो गयी थी. इस दौरान परिजनों द्वारा ऑक्सीजन की कमी के कारण रंजन देवी की मौत होने का आरोप लगाते हुये जमकर हंगामा किया गया था.

09 जनवरी 2025 – सदर अस्पताल के पुराने पुरूष वार्ड में इलाजरत कौड़ा मैदान निवासी 78 वर्षीय वृद्ध रामस्वरूप यादव की मौत हो गयी थी. इस दौरान भी परिजनों द्वारा ऑक्सीजन की कमी और वार्ड में ऑक्सीजन सिलेंडर खाली होने का आरोप लगाते हुये जमकर हंगामा किया गया था.

24 मई 2024 – सदर अस्पताल के पुराने आईसीयू वार्ड में सिबियर हार्ट अटैक के मरीज 60 वर्षीय शोभा डे विश्वास की मौत हो गयी थी. इस दौरान भी परिजनों द्वारा वार्ड में ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं होने का आरोप लगाया गया था.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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RANA GAURI SHAN

लेखक के बारे में

By RANA GAURI SHAN

RANA GAURI SHAN is a contributor at Prabhat Khabar.

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