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बढ़ने लगी ठंड, अस्पताल में वार्डों की कमी ने बढ़ायी मरीजों की परेशानी

Updated at : 28 Nov 2024 6:42 PM (IST)
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बढ़ने लगी ठंड, अस्पताल में वार्डों की कमी ने बढ़ायी मरीजों की परेशानी

खुले बरामदे पर इलाज के लिये भर्ती मरीजों के लिये रात काटना मुश्किल हो गया है.

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– कंपकपाती ठंड में बरामदे पर इलाज कराने को मजूबर मरीज

मुंगेर

जिले में ठंड ने अपनी दस्तक दे दी है. जिसका असर गुरूवार की सुबह 10 बजे तक छाये कोहरे में ही लोगों को दिखने लगा, लेकिन ठंड बढ़ने के साथ ही अब मुंगेर सदर अस्पताल में मरीजों के लिये मुसीबत बढ़ गयी है. रात के समय कंपकपाती ठंड के बीच अस्पताल के जर्जर और सीलन भरे वार्ड सहित खुले बरामदे पर इलाज के लिये भर्ती मरीजों के लिये रात काटना मुश्किल हो गया है. जबकि मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा देने का दावा कर रहा सदर अस्पताल खुद दो सालों से भवनों की कमी से जूझ रहा है.

खुले बरामदों पर रात काटना हो रहा मुश्किल

सदर अस्पताल में कई वार्ड खुले बरामदे पर ही चल रहे हैं. जिसमें पुरुष वार्ड में जहां आइसोलेशन वार्ड खुले बरामदे पर चल रहा है. वहीं महिला वार्ड में भी बेड की कमी के कारण कई मरीजों को बरामदे पर भी भर्ती किया जा रहा है. पुरुष वार्ड के बरामदे पर चल रहे आइसोलेशन वार्ड में भले ही मरीजों के लिये पतले कपड़े से बरामदे को घेरा गया है, लेकिन महिला वार्ड में तो खुले बरामदे पर ही इलाज को लेकर मरीज भर्ती हो रहे हैं. जिनके लिये ठंड में रात काटना मुश्किल हो रहा है. हलांकि मरीजों को सदर अस्पताल में कंबल तो दिया जा रहा है, लेकिन उसकी गुणवत्ता मरीजों को ठंड से कितना राहत दे रही है, यह खुद मरीज ही समझ सकते हैं.

पुराने और सीलन भरे वार्ड में भी ठंड से नहीं मिलती राहत

ऐसा नहीं है कि ठंड के बीच सदर अस्पताल के वार्डों में मरीजों को कोई खास राहत मिल रही है. हाल यह है कि सालों पुराने और सीलन भरे वार्ड में मरीजों के लिये ठंड और मुश्किलें बढ़ा रही है. पुरुष वार्ड में हीटर तो लगाया गया है, जो केवल नाम का ही है. जबकि महिला वार्ड में तो मरीजों को हीटर तक नहीं मिल पा रही है. इतना ही नहीं सदर अस्पताल के पुरुष और महिला वार्ड में लगे पुराने और जर्जर खिड़की व दरवाजों से आती ठंडी हवा रात के समय मरीजों के लिये अधिक परेशानी का कारण बन जाती है.

उपयोगहीन बन गया 100 बेड का प्री-फैब्रिकेटेड अस्पताल

एक ओर जहां सदर अस्पताल 100 बेड के मॉडल अस्पताल के भरोसे बैठा है. वहीं एक साल पहले सदर अस्पताल को मिला 100 बेड का प्री-फैब्रिकेटेड अस्पताल पूरी तरह उपयोगहीन बन गया है. मरीज जहां पुराने वार्ड तथा बरामदे पर इलाज कराने को मजबूर है. वहीं 100 बेड के प्री-फैब्रिकेटेड अस्पताल में ओपीडी सेवा संचालित हो रही है. जबकि अब प्री-फैब्रिकेटेड अस्पताल खुद स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए बैठक की जगह बन गयी है. इधर प्री-फैब्रिकेटड में लगे नये बेड अबतक मरीजों के आने का इंतजार कर रहा है.

कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक

सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ रमन कुमार ने बताया कि जनवरी माह में 100 बेड का मॉडल अस्पताल मिल जायेगा. जहां मरीजों के लिये अत्याधुनिक वार्ड की सुविधा होगी. उन्होंने बताया कि प्री-फैब्रिकेटेड अस्पताल में पर्याप्त जगह है, लेकिन अस्पताल में चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मियों की काफी कमी है. जिसके कारण वहां मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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