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आयुष चिकित्सकों के भरोसे जिले में जन्मजात बीमारियों से पीड़ित बच्चे

Updated at : 17 Dec 2025 7:14 PM (IST)
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आयुष चिकित्सकों के भरोसे जिले में जन्मजात बीमारियों से पीड़ित बच्चे

मुख्यालय में इन जन्मजात बच्चों को भर्ती किये जाने के लिये बना डीईआईसी सेंटर अबतक केवल कार्यालय बनकर रही रह गया है.

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– जिले में आरबीएसके के 9 टीमों में मात्र 3 में एएनएम, शेष टीम भगवान भरोसे

मुंगेर

जिले में स्वास्थ्य योजनाओं का भी हाल बुरा है. हाल यह है कि जिले में जन्मजात बीमारियों से पीड़ित बच्चों के लिए चल रही राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम (आरबीएसके) का संचालन आयुष चिकित्सकों के भरोसे ही हो रहा है. हद तो यह है कि जिले में जन्मजात बीमारी से पीड़ित बच्चों के लिए जिले के 9 प्रखंडों में कार्यरत आरबीएसके के 9 टीमों में मात्र 3 में ही एएनएम है. जबकि शेष टीमें 6 टीम केवल आयुष चिकित्सक और फर्मासिस्ट के भरोसे चल रही है. इतना ही नहीं मुख्यालय में इन जन्मजात बच्चों को भर्ती किये जाने के लिए बना डीईआईसी सेंटर अबतक केवल कार्यालय बनकर रही रह गया है. जहां अबतक ऐसे बीमारी से पीड़ित बच्चों को भर्ती करने के लिए बेड तक की व्यवस्था नहीं है.

9 टीमों में मात्र 3 में एएनएम

बता दें कि जिले में जिला मुख्यालय सहित सभी 9 प्रखंडों में आरबीएसके की एक-एक टीम कार्यरत है. जिसमें नियमानुसार तो एक चिकित्सक, एक फर्मासिस्ट और एक एएनएम को होना है. लेकिन जिले में आरबीएस के टीम में आयुष चिकित्सकों के भरोसे चल रही है. हद तो यह है कि इन 9 टीमों में केवल 3 प्रखंडों की टीम सदर प्रखंड, संग्रामपुर और टेटियाबंबर में ही स्थायी एएनएम है. जबकि शेष 6 टीमें केवल आयुष चिकित्सक और फॉर्मासिस्ट के भरोसे चल रही है. अब ऐसे में हृदय रोग जैसे गंभीर बीमारियों वाले बच्चों के पहचान और इलाज की जिम्मेदारी जिले में जहा आयुष चिकित्सकों के भरोसे है. वही इनके देखभाल और लगातार मॉनिटरिंग के लिये कर्मी ही नहीं हैं.

दो साल में 6,227 बीमार बच्चों की हुई स्क्रीनिंग

बता दें कि वर्ष 2023 में आरबीएसके टीम द्वारा कुल 6,227 बीमार बच्चों की स्क्रीनिंग की गई थी. जिसमें जन्मजात बीमारी के 157, विभिन्न बीमारी से ग्रसित 4,643, कमजोर व कुपोषित 1,362 तथा समय के अनुरूप शारीरिक विकास नहीं करने वाले 65 बच्चों की पहचान हुई थी. इसमें से 474 बच्चों को पटना व अहमदाबाद जैसे हायर सेंटर भेज कर इलाज व ऑपरेशन कराया गया. वहीं साल 2024 में जिले में हृदय रोग से पीड़ित 11, तालू कटे 12 तथा पैर मुड़े कुल 7 बच्चों की पहचान की गयी थी. इसके अतिरिक्त साल 2025 में अबतक आरबीएसके द्वारा जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित कुल 7 बच्चों की पहचान की गयी है.

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90 लाख की लागत से बना डीईआईसी सेंटर अबतक अनुपयोगी

मुंगेर – बता दें कि साल 2017 में सरकार द्वारा मुंगेर जिले में आरबीएसके के तहत जन्मजात बीमारियों से पीड़ित बच्चों के लिये डीईआईसी सेंटर बनाने की स्वीकृति दी गयी. जिसके बाद साल 2018 में बीएमआईसीएल द्वारा जिला स्वास्थ्य समिति कार्यालय के समीप 90 लाख की लागत से डीईआईसी सेंटर का निर्माण आरंभ किया गया. वहीं इसका निर्माण कार्य पूरा होने में 7 साल लग गया. बीएमआईसीएल ने 2024 में इसे स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर कर दिया. वहीं इसे स्वास्थ्य विभाग ने आरंभ भी कर दिया है, लेकिन अबतक यहां जन्मजात बीमारियों से पीड़ित बच्चों को भर्ती करने अथवा उनके काउंसलिंग के लिये बेड या अन्य उपकरण नहीं होने के कारण यह केवल डीईआईसी कार्यालय ही बन कर रह गया है.

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कहते हैं आरपीएम

आरपीएम रूपनारायण शर्मा ने बताया कि आयुष चिकित्सकों को आरबीएसके टीम में लगाया गया है. साथ ही लगातार जिले के जन्मजात बीमारियों से पीड़ित बच्चों के लिये चलाये जा रहे योजना की मॉनिटरिंग की जा रही है. जिसे चिन्हित कर इलाज के लिये हायर सेंटर भी भेजा जा रहा है. हलांकि डीईआईसी सेंटर के लिये उपकरण व बेड की व्यवस्था के लिये विभाग को कई बार पत्र लिखा गया है. साथ ही विभाग से लगातार संपर्क किया जा रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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RANA GAURI SHAN

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By RANA GAURI SHAN

RANA GAURI SHAN is a contributor at Prabhat Khabar.

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