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एक खनन पदधिकारी को माइनेज कर दो जिलों में पीला बालू का हो रहा था काला कारोबार

Updated at : 17 Jun 2024 10:29 PM (IST)
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मुंगेर व लखीसराय हाल के दिनों में पीला बालू के काले कारोबार के लिए चर्चा में है. क्योंकि एक ही अधिकारी को माइनेज कर दो-दो जिलों में इस कारोबार को अंजाम दिया जा रहा था

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प्रतिनिधि, मुंगेर. मुंगेर व लखीसराय हाल के दिनों में पीला बालू के काले कारोबार के लिए चर्चा में है. क्योंकि एक ही अधिकारी को माइनेज कर दो-दो जिलों में इस कारोबार को अंजाम दिया जा रहा था. हालांकि, जब कारोबार गंध देने लगी तो लखीसराय सह मुंगेर के खनन पदाधिकारी रंधीर कुमार को निलंबित कर दिया गया, लेकिन अब उनके अधीनस्थ दोनों जिलों में काम करने वाले खान निरीक्षक भी विभाग के निशाने पर है. जिन पर विभाग की गाज गिरने वाली है. एक अधिकारी को माइनेज कर हो रहा था काला कारोबार जानकारों की माने तो लखीसराय बालू का बड़ा बाजार है. जहां कई बालू घाट है. यहां से हजारों की संख्या में ट्रक, हाइवा और ट्रैक्टर से बालू की ढुलाई होती है. जबकि जमुई का बालू भी लखीसराय के रास्ते निर्धारित स्थलों के लिए भेजा जाता है. इसे लेकर मुंगेर जिला में इंट्री देकर श्रीकृष्ण सेतु से पार करा दिया जाता है. बालू माफियाओं ने इसके लिए लखीसराय के खनन पदाधिकारी को माइनेज किया था. जो मुंगेर जिला के प्रभारी खनन पदाधिकारी थे. इनके इशारे पर दोनों जिलों में उनके अधीनस्थ काम करने वाले खनन विभाग के कर्मी और दलाल इस कार्य को अंजाम दे रहे थे. हालांकि, जब यहां के बालू के अवैध कारोबार का दुर्गंध सरकार तक पहुंची तो आनन-फानन में जिला एवं पुलिस प्रशासन की संयुक्त छापेमारी अभियान चला. इसमें 46 ट्रक को पकड़ा गया. जिसमें 40 वाहनों के पास चालान ही नहीं था. इस कारण पटना मुख्यालय ने मुंगेर सह लखीसराय के जिला खनन पदाधिकारी रंधीर कुमार को निलंबित कर दिया. अब उनके अधीनस्थ कर्मचारियों पर गिरेगी गाज मुंगेर एवं लखीसराय खनन विभाग में कार्यरत खान निरीक्षक और कर्मचारियों की संलिप्तता की भी जांच पटना मुख्यालय कर रही है. माना जा रहा है कि फील्ड में घुमने वाला खान निरीक्षक पर कभी भी गाज गिर सकती है. क्योंकि माइनेज के खेल में इन कर्मचारियों द्वारा वाहनों की सघन जांच और पर्यवेक्षण नहीं किया जाता है. इस कारण व्यापक रूप से अनियमितता व्याप्त है. मालिक को छोड़ वाहनों के नंबर पर दर्ज हुई प्राथमिकी, कैसे भाग गया चालक मुंगेर. विगत 9 जून को जिलाधिकारी अविनाश कुमार सिंह की उपस्थिति में हेमजापुर से लेकर श्रीकृष्ण सेतु तक ट्रक व हाइवा को रोकर चालान व ओवरलोड की जांच की गयी. इस छापेमारी में खनन, परिवहन, जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और यातायात पुलिस शामिल थी. कुल 46 बड़े वाहनों को पकड़ा गया था. इसमें 40 वाहन पर बिना चालान और 6 वाहन पर ओवरलोड को लेकर हेमजापुर और सफियासराय थाना में मुंगेर के दो खान निरीक्षक राजू और रासिद के बयान पर प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है. सबसे हैरानी की बात यह है कि 46 ट्रक व हाइवा तो पकड़ा गया, लेकिन एक भी चालक गिरफ्तार नहीं हुआ. आखिर इतनी संख्या में पदाधिकारी व पुलिस कर्मियों के रहते चालक कैसे भाग गया. दर्ज प्राथमिकी में चालक को क्यों नहीं आरोपित किया गया. इतना ही नहीं सभी बड़े वाहनों के नंबर पर प्राथमिकी दर्ज की गयी. आखिर ट्रक मालिक के नाम का पता कर क्यों नहीं उनके नाम से प्राथमिकी दर्ज की गयी. जो सवालों के घेरे में है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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