रसायन, भूगोल व संस्कृत की पढ़ाई नहीं
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :03 Apr 2017 5:04 AM
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अव्यवस्था. 24 शिक्षकों के कंधे पर 132 वर्ष पुराना आरडी एंड डीजे कॉलेज की जिम्मेदारी राज्य के प्रसिद्ध आर डी एंड डी जे कॉलेज 132 वर्ष का सफर पूरा कर रहा है. किंतु आज इस महाविद्यालय के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो गया है. महाविद्यालय का संस्कृत, रसायण एवं भूगोल विभाग में ताला लग चुका […]
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अव्यवस्था. 24 शिक्षकों के कंधे पर 132 वर्ष पुराना आरडी एंड डीजे कॉलेज की जिम्मेदारी
राज्य के प्रसिद्ध आर डी एंड डी जे कॉलेज 132 वर्ष का सफर पूरा कर रहा है. किंतु आज इस महाविद्यालय के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो गया है. महाविद्यालय का संस्कृत, रसायण एवं भूगोल विभाग में ताला लग चुका है. महाविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गयी है और महज 24 शिक्षक के भरोसे कॉलेज का संचालन हो रहा है.
मुंगेर : राज्य सरकार ने मुंगेर को विश्वविद्यालय बनाने की घोषणा की है और निकट भविष्य में यह विश्वविद्यालय भी बन जाय. लेकिन जहां महाविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक ही उपलब्ध नहीं हो और लगातार विभिन्न विभागों में ताले लग रहे हों वहां विश्वविद्यालय की घोषणा कोई मायने नहीं रखता. किसी जमाने में आर डी एंड डी जे कॉलेज राज्य के टॉप-10 महाविद्यालयों में शामिल था और यहां शिक्षा ग्रहण करने के लिए दूर-दूर से छात्र-छात्राएं आते थे. किंतु आज अपनी शैक्षणिक बदहाली पर यह आंसू बहा रहा है.
अस्तित्व बचाने को जूझ रहा कॉलेज: आरडी एंड डीजे कॉलेज की स्थापना वर्ष 1885 में हुई थी. कॉलेज पिछले सौ साल की दौड़ काफी बेहतर तरीके से व्यतीत किया़ जिसके कारण यह कॉलेज न सिर्फ मुंगेर जिला बल्कि मुंगेर प्रमंडल का सबसे प्रतिष्ठित कॉलेज माना जाता था़ वर्ष 1960 में देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने कॉलेज के हीरक जयंती समारोह के मौके पर आये थे. साथ ही उन्होंने जयंती स्मारक स्वरूप कॉलेज पुस्तकालय भवन का शिलान्यास किया था़
जहां पर आज लगभग 10 हजार पुस्तकें भी उपलब्ध है़ किंतु अपनी शताब्दी पूरा करने के बाद से कॉलेज में शिक्षा का स्तर काफी तीव्रता से ह्रास होता चला गया़ हाल यह है कि यहां विभिन्न विषयों में शिक्षकों के लिए कुल 110 पद स्वीकृत हैं, किंतु वर्तमान समय में मात्र 24 शिक्षक ही पदस्थापित हैं. जिसके कारण कॉलेज अपने अस्तित्व को बचाने के लिए जूझ रहा है़
बिना शिक्षक के चल रही पढ़ाई:
डीजे कॉलेज में शिक्षकों की घोर कमी है. संस्कृत, रसायन एवं भूगोल विभाग में जहां एक भी शिक्षक नहीं हैं. वहीं अंगरेजी जैसे महत्वपूर्ण विभाग में स्वीकृत 10 शिक्षकों के विरुद्ध मात्र दो शिक्षक पदस्थापित हैं. बॉटनी एवं जूलोजी विषय में 13-13 शिक्षकों का पद सृजित हैं. जिसके विरुद्ध मात्र 2-1 शिक्षक यहां मौजूद हैं. गणित एवं भौतिकी विभाग की स्थिति भी अत्यंत बदहाल है. गणित में जहां पांच शिक्षक के बदले मात्र एक शिक्षक हैं. वहीं भौतिकी में 8 के बदले मात्र 3 प्राध्यापक है. कॉमर्स एवं कला विषय की स्थिति भी गंभीर है. कॉमर्स में 9 प्राध्यापकों के बदले मात्र 2 प्राध्यापक मौजूद हैं. वहीं कला विषय के अर्थशास्त्र में 5 के बदले 2 शिक्षक हैं.
बदहाल भवन दे रहा दुर्घटनाओं को आमंत्रण: बात चाहे विज्ञान विभाग के भवन की हो या कला विभाग के भवन की़ लगभग सभी भवन काफी जर्जर हो चुके हैं. भवन के दीवारों में जहां अनगिनत दरारें भरी पड़ी है़ वहीं छत का प्लास्टर इस कदर झड़ चुका है कि ढ़लाई में उपयोग की गयी छड़े लटकने लगी है़ यहां पर पढ़ने वाले छात्र- छात्राओं हमेशा बड़ी दुर्घटनाओं का भय सताते रहती है़ वहीं जर्जर पड़े छात्रावास का भी जीर्णोद्धार नहीं किया जा रहा़ जिसके कारण दूर- दराज के छात्र अब यहां पर नामांकन करवाने से भी परहेज करने लगे़
शौचालय विहीन है कॉलेज: केंद्र व राज्य सरकार हर घर में शौचालय बनवाने के लिए न सिर्फ बड़े- बड़े होर्डिंग, टीवी तथा अखबारों के माध्यम से व्यापक पैमाने पर प्रचार- प्रसार कर रही है, बल्कि गरीब लोगों को इसके लिए प्रोत्साहन राशि भी उपलब्ध करा रही है़ किंतु 132 साल पुराने इस कॉलेज में छात्र-छात्राओं के लिए शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है़ जिसके कारण यहां पर पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को खासे परेशानियों का सामना करना पड़ता है़
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