एक लाख 160 बच्चों का छीना निवाला
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :28 Mar 2017 4:59 AM
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विडंबना. जिले में 1296 आंगनबाड़ी केंद्रों में पिछले तीन दिनों से लटका है ताला आंगनबाड़ी सेविका व सहायिका की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण जिले में 1296 आंगनबाड़ी केंद्रों में पिछले तीन दिनों से ताला लटका हुआ है. इसके कारण तीन से छह वर्ष तक के बच्चे, धात्री व गर्भवती महिलाओं के संचालित सरकारी योजनाओं का […]
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विडंबना. जिले में 1296 आंगनबाड़ी केंद्रों में पिछले तीन दिनों से लटका है ताला
आंगनबाड़ी सेविका व सहायिका की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण जिले में 1296 आंगनबाड़ी केंद्रों में पिछले तीन दिनों से ताला लटका हुआ है. इसके कारण तीन से छह वर्ष तक के बच्चे, धात्री व गर्भवती महिलाओं के संचालित सरकारी योजनाओं का
लाभ नहीं मिल पा रहा और न ही बच्चों को शिक्षा मिल पा रही है.
मुंगेर : कुपोषण को दूर करने के उद्देश्य से जिले में कुल 1365 आंगनबाड़ी केंद्र सरकारी दस्तावेज में खोला गया है. जिसमें 1296 केंद्र ही संचालित हो रहा है. इन केंद्रों पर एक लाख 160 बच्चे नामांकित हैं. केंद्र पर आठ गर्भवती व आठ प्रसूति महिला को तीन किलो चावल व डेढ़ किलो दाल, कुपोषित बच्चों को ढाई किलो चावल व एक किलो दाल, अति कुपोषित को चार किलो चावल व दो किलो दाल देना है. इसके अलावा शुक्रवार या बुधवार को एक अंडा देने का प्रावधान है.
लेकिन सेविका-सहायिका के 24 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने से आंगनबाड़ी केंद्रों में ताला लटका हुआ है. जिसके कारण बच्चों के मुंह से निवाला छिन गया.
पूर्व में भी बंद था आंगनबाड़ी केंद्र
सरकार ने जिस उद्देश्य को लेकर आंगनबाड़ी केंद्र की स्थापना की वह प्रारंभिक दौर से ही बदनाम रहा. कभी सेविका-सहायिका चयन तो कभी पोषाहार वितरण को लेकर बदनामी का सिलसिला बना रहा है. नामांकित 40 बच्चों में उपस्थिति 10 बच्चों जैसी शिकायतें आम बात बन गयी है.
बावजूद इसके आंगनबाड़ी केंद्र से बच्चों को योजनाओं का लाभ मिल रहा है. लेकिन पिछले कुछ माह से सरकार की उदासीनता के कारण बच्चों का निवाला किसी न किसी कारण छिनता रहा है. सूत्रों की माने तो नवंबर से ही आंगनबाड़ी केंद्र पर बच्चों को खाना नहीं मिल रहा है. क्योंकि राज्य सरकार द्वारा पोषाहार मद में पैसा ही नहीं दिया गया था. फरवरी माह में पोषाहार का पैसा दिया गया तो केंद्र पर पोषाहार बनना प्रारंभ हुआ. लेकिन सेविका-सहायिका के अनश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने से एक बार फिर से बच्चों का निवाला मिलना बंद हो गया.
क्या है आंगनबाड़ी का उद्देश्य
इस कार्यक्रम का उद्देश्य छह वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं और प्रजनन आयु की महिलाओं (15-45 वर्ष) को लाभ प्रदान करना है. कार्यक्रम के तहत पूरक पोषण, टीकाकरण/रोग-प्रतिरक्षा, स्वास्थ्य जांच सेवाएं, रेफरल सेवाएं, स्कूल-पूर्व अनौपचारिक शिक्षा और पोषण और स्वास्थ्य शिक्षा को शामिल किया गया. पूरक पोषण छह वर्ष से कम आयु के बच्चों और गर्भवती और धात्री महिलाओं को प्रदान किया जाता है ताकि राष्ट्रीय पोषण मार्गनिर्देशों और वास्तविक रूप में ग्रहण किये गये पोषण के बीच के अंतर को दूर किया जा सके.
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