कर्मियों की लेटलतीफी बेलगाम
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :04 Nov 2016 6:11 AM
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सदर अस्पताल. बायोमीट्रिक एटेंडेंस मशीन का नहीं मिल रहा लाभ चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की लेट लतीफी पर लगाम नहीं लग रहा है. ऐसे में मरीजों का इंतजार में ही बुरा हाल हो जाता है. मुंगेर : सदर अस्पताल में चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों का ड्यूटी पर देर पहुंचना तथा समय से पहले ही ड्यूटी […]
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सदर अस्पताल. बायोमीट्रिक एटेंडेंस मशीन का नहीं मिल रहा लाभ
चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की लेट लतीफी पर लगाम नहीं लग रहा है. ऐसे में मरीजों का इंतजार में ही बुरा हाल हो जाता है.
मुंगेर : सदर अस्पताल में चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों का ड्यूटी पर देर पहुंचना तथा समय से पहले ही ड्यूटी पोस्ट छोड़ देना अब आम बात बन गयी है़ जिसका खामियाजा इलाज के लिए अस्पताल आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ता है़ देर से ड्यूटी पर पहुंचना तथा समय से पूर्व ही ड्यूटी छोड़ देने के मामले को लेकर अस्पताल प्रबंधन ने यहां बायोमीट्रीक एटेंडेंस मशीन की व्यवस्था की़ जिससे चिकित्सकों व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के लेट-लतीफे पर लगाम लगया जा सके़ किंतु 10 महीना बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है़
बायोमीट्रीक एटेंडेंस के नाम पर खानापूर्ति: सदर अस्पताल में बायोमीट्रीक एटेंडेस के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है़ इस मशीन के लगाने का उद्देश्य यह था कि यदि चिकित्सक देर से आते हैं या समय से पहले चले जाते हैं तो उसके कार्यकाल के अनुसार ही उसके वेतन बनाये जायेंगे़ किंतु बायोमीट्रीक एटेंडेंस मशीन के स्थापित होने के 10 महीने बाद भी उपस्थिति पंजी के आधार पर ही चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मियों को वेतन का भुगतान किया जाता है़ बदहाली यह है कि एटेंडेंस मशीन शोभा की वस्तु बनी हुई है. जब कभी चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मी समय पर आते हैं तो उसमें एटेंडेंस बना देते हैं. अन्यथा रजिस्टर पर ही काम चल रहा है.
कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक
अस्पताल उपाधीक्षक डॉ राकेश कुमार सिन्हा ने कहा कि पिछले महीने बायोमीट्रीक एटेंडेंस मशीन सॉर्टशर्किट की वजह से खराब हो गया था़ जिसे अब ठीक करा लिया गया है़ चिकित्सकों व स्वास्थ्य कर्मियों का वेतन अब इसी के आधार पर बनाया जायेगा़
दूसरे के बदले होती है ड्यूटी
सदर अस्पताल में पदस्थापित चिकित्सक के निजी क्लिनिक में जब अधिक भीड़ रहती है, तब वे अपने बदले दूसरे चिकित्सक से अस्पताल में ड्यूटी करवाते हैं. जबकि हाजिरी खुद ही बना लेते हैं. अस्पताल के अधिकारी इस कारनामे को देख कर भी अपनी आंखें मूंद लेते हैं. ओपीडी में भी अक्सर यह देखा जाता है कि जांच लिखने के दौरान जो चिकित्सक ड्यूटी पर मौजूद रहते हैं,
वे जांच रिपोर्ट देखने के दौरान बदल जाते हैं. विदित हो कि दो माह पूर्व ऐसा मामला चक्षु विभाग में प्रकाश में आया था़ जब सिविल सर्जन डॉ श्रीनाथ अस्पताल का औचक निरीक्षण कर रहे थे, तब वहां के ओपीडी में डॉ रईस के बदले डॉ पीएम सहाय ड्यूटी कर रहे थे़ यह खेल अब भी विभिन्न ओपीडी व आपातकालीन वार्ड में जारी है़
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