दो परिवारों के जिद में फंसा घोरघट ब्रिज नर्मिाण

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मुंगेर : राष्ट्रीय उच्च पथ 80 पर मुंगेर एवं भागलपुर जिले के सीमा मणि नदी पर स्थित घोरघट पुल निर्माण कार्य भूमि अधिग्रहण की पेंच में फंसा था. जो बहुत हद तक दूर हो गयी. लेकिन दो परिवार की जिद के आगे भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई पूरी नहीं हो पा रही और पुल निर्माण का […]

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मुंगेर : राष्ट्रीय उच्च पथ 80 पर मुंगेर एवं भागलपुर जिले के सीमा मणि नदी पर स्थित घोरघट पुल निर्माण कार्य भूमि अधिग्रहण की पेंच में फंसा था. जो बहुत हद तक दूर हो गयी. लेकिन दो परिवार की जिद के आगे भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई पूरी नहीं हो पा रही और पुल निर्माण का कार्य ठप पड़ा है.

2006 में क्षतिग्रस्त हुआ था ब्रिज वर्ष 2006 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने काफिले के साथ सुलतानगंज विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला का उद्घाटन करने जा रहे थे. जैसे ही उनका काफिला गुजरा कि ब्रिज क्षतिग्रस्त हो गया. पुल की स्थिति यह हो गयी कि वह वाहनों का लोड सहने लायक नहीं बचा और इस पुल पर बड़े वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी गयी. तब से अबतक इस मार्ग से बड़े वाहनों का परिचालन नहीं हो रहा.

खो दिया एनएच का अस्तित्व राष्ट्रीय उच्च पथ 80 को जोड़ने के लिए मनी नदी पर घोरघट बेली ब्रिज का निर्माण किया गया. लेकिन बेली ब्रिज की स्थिति भी जर्जर हो चुकी है. इससे मात्र छोटे वाहनों का ही आवागमन होता है. जिसके कारण इस मार्ग ने एनएच का स्वरूप ही खो दिया. इस पुल से ट्रक व बस का परिचालन नहीं हो रहा है. अधर में लटकी योजना सरकार और नेशनल हाइवे ऑथरिटी ऑफ इंडिया के बीच समझौता हुआ कि बेली ब्रिज की जगह मजबूत और चौड़ा कर नया पुल का निर्माण कराया जाय. जिसके बाद पुल निर्माण के लिए निविदा आमंत्रित की गयी और वर्ष 2012 में पुल निर्माण का कार्य प्रारंभ हुआ. कार्य करने वाली एजेंसी ने तीन पाया का निर्माण कर जमीन से ऊपर भी उठा दिया.

लेकिन भूमि अधिग्रहण के पेंच में मामला फंसा हुआ है. दो परिवार की जिद में फंसा निर्माण पुल के लिए जिन भूमि का अधिग्रहण किया जाना है उनमें सात परिवार ऐसे हैं जो भूमिहीन हैं. जिसके कारण निर्माण कार्य पूरी तरह ठप है. बताया जाता है कि 5 परिवार सरकारी जमीन पर बसने को तैयार हो गये हैं.

लेकिन 2 परिवार ऐसे हैं जो अपना घर छोड़ कर जाने को तैयार नहीं है. इन दो परिवार की जिद के कारण ब्रिज का निर्माण कार्य ठप पड़ा हुआ है. जबकि जिला भू-अर्जन विभाग ने उन दो परिवार को सरकारी जमीन पर बसाने के लिए एसडीओ एवं डीसीएलआर को जवाबदेही सौंपी गयी है. रखी हुई है

मुआवजे की राशि बताया जाता है कि भूमिहीन परिवार के लिए 6 करोड़ 40 लाख रुपये मुआवजे की राशि जिला प्रशासन को मुहैया करा दी गयी है. जो बैंक में पड़ा हुआ है. जब तक दोनों परिवार सरकारी जमीन पर बसने को तैयार नहीं हो जाते है तब तक निर्माण कार्य ठप ही पड़ा रहेगा.

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