करोड़ों खर्च के बाद भी प्यासे हैं प्रखंडवासी

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करोड़ों खर्च के बाद भी प्यासे हैं प्रखंडवासी फोटो संख्या : 6फोटो कैप्सन : बोरिंग घर प्रतिनिधि, बरियारपुर दो दशक पूर्व बरियारपुर प्रखंडवासियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से डीप बोरिंग कर पाइप लाइन बिछाया गया. बावजूद आजतक क्षेत्र के लोगों को शुद्ध पेयजल तक नसीब नहीं हो पाया है. डीप बोरिंग शोभा […]

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करोड़ों खर्च के बाद भी प्यासे हैं प्रखंडवासी फोटो संख्या : 6फोटो कैप्सन : बोरिंग घर प्रतिनिधि, बरियारपुर दो दशक पूर्व बरियारपुर प्रखंडवासियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से डीप बोरिंग कर पाइप लाइन बिछाया गया. बावजूद आजतक क्षेत्र के लोगों को शुद्ध पेयजल तक नसीब नहीं हो पाया है. डीप बोरिंग शोभा की वस्तु बनी हुई है. यूं तो पेयजलापूर्ति के लिए 1980 से 2008 तक चार बार प्रयास किया गया. राशि भी खर्च हुए लेकिन इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो पायी. जबकि दो दशक पूर्व ही लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग ने पेयजलापूर्ति के लिए पाइप लाइन बिछाने का कार्य आरंभ किया जो आजतक अधर में लटका हुआ है. वर्ष 1980 में छह लाख की लागत से फिलिप उच्च विद्यालय में जांच के बाद वर्ष 1990 में दूसरी बार 60 लाख की लागत से कचहरी टोला स्थित उम्भी नदी के किनारे डीप बोरिंग की गयी और बड़ी सी टंकी का भी निर्माण कराया गया. 1996 में 30 लाख की लागत से महदेवा मध्य विद्यालय के समीप डीप बोरिंग के माध्यम से पेयजलापूर्ति बहाल करने का प्रयास किया गया. चौथी बार वर्ष 2008 में 1.72 करोड़ की लागत से पाइप लाइन के माध्यम से पुरानी हटिया में डीप बोरिंग की गयी जो पानी ही नहीं दे पायी. करोड़ों खर्च के बाद भी आज प्रखंडवासी पेयजल की जिल्लत झेल रहे हैं. इससे प्रखंडवासियों में काफी आक्रोश है. आज भी इस प्रखंड के लोग चापाकल व कुएं के पानी पर आश्रित हैं.

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