देवी मां के दर्शन से तृप्त हो जाती समस्त कामनाएं: स्वामी कैवल्यानंद

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देवी मां के दर्शन से तृप्त हो जाती समस्त कामनाएं: स्वामी कैवल्यानंद शक्तिपीठ में मां चण्डी की महिमा का भक्तिमय प्रवचन व सत्संग समारोह आयोजितफोटो संख्या : 12,13 फोटो कैप्सन : प्रवचन करते स्वामी जी व उपस्थित श्रद्धालु प्रतिनिधि, मुंगेरदेवी मां के दर्शन मात्र से मनुष्य की समस्त कामनाएं पूर्ण हो जाती है. इसके बाद […]

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देवी मां के दर्शन से तृप्त हो जाती समस्त कामनाएं: स्वामी कैवल्यानंद शक्तिपीठ में मां चण्डी की महिमा का भक्तिमय प्रवचन व सत्संग समारोह आयोजितफोटो संख्या : 12,13 फोटो कैप्सन : प्रवचन करते स्वामी जी व उपस्थित श्रद्धालु प्रतिनिधि, मुंगेरदेवी मां के दर्शन मात्र से मनुष्य की समस्त कामनाएं पूर्ण हो जाती है. इसके बाद शारीरिक तथा मानसिक भूख समाप्त हो जाती है. देवी कृपा से संबंधित यह गुढ़ रहस्य शक्तिपीठ चंडिका स्थान में शनिवार को आयोजित सत्संग व प्रवचन समारोह में स्वामी कैवल्यानंद जी ने व्यक्त किया. दूसरी ओर स्वामी ज्ञान भिक्षु ने बताया कि समग्र सृष्टि शक्ति स्वरूपा मां की देन है. प्रवचन समारोह के आरंभ में बाल योग मित्र मंडल के बच्चे शिवानी, मुस्कान, सिमरन, ओम शिवानी, अंकित, गौरव गिरिजा तथा विवेकानंद ने पंडित बलराम दास मिश्र के तबला वादन तथा गरिमा के हारमोनियम वादन पर अनेक भक्ति गीत गायें. गायत्री मंत्र के जाप तथा सम्वेत स्वर में समस्त देवियों की स्तुति इनके साथ नगरवासियों ने की. स्वामी केवल्यानंद ने एक निरीह बालक की बेबशी का जिक्र करते हुए उसकी कथा सुनायी. जिसमें एक महिला से दूध तथा अन्य लोगों से चावल, चीनी व इलायची प्राप्त कर उसने खीर बनाना चाहा. परंतु दूध के जल जाने से वह भूखा पेट रोता-रोता सो गया. मां चंडी को स्वप्न में पुकारता रहा. सुबह होने पर वह महिला बालक को तरोताजा देख कर खुश हुई. बालक ने कहा कि अब उसकी सारी भूख और इच्छाएं समाप्त हो चुकी है. सुप्तावस्था में माता का दर्शन कर उसका जीवन सार्थक हो चुका था. निष्कर्षत: स्वामी जी ने बताया कि सहज भाव से जब मनुष्य अटूट विश्वास रख कर मां की भक्ति करेगा तो वे अवश्य दर्शन देंगी. उनके बाद स्वामी ज्ञान भिक्षु जी ने शिव को निराकार तथा चेतना का प्रतीक बताया. एक बार अकेलेपन से निराश शिव शक्ति के समुख पहुंचे. शिव को प्रसन्न करने के लिए शक्ति की देवी ने जल, वायु, अग्नि, भूमि तथा आकाश तत्व से सृष्टि की रचना कर उनका जी बहलाया. शिव ने अनुभव किया कि शक्ति स्वरूपा देवी चंडी एवं दुर्गा हर प्राणी के अंतर में समायी हुई है. जब सद्वृतियों के साथ हम, कर्म, भक्ति और ज्ञान की प्राप्ति करते हैं तो उसका फल तत्काल मिलता है. सद्वृतियों को त्याग कर की गयी कोई भी पूजा या उपासना कभी फलित नहीं हो सकती. इस तरह माता की महिमा से ओत-प्रोत मन लिये भक्तगण सत्संग स्थल से विदा हुए. मौके पर डॉ रामादर्श प्रसाद सिंह, प्राण मोहन केसरी, मधुसूदन आत्मीय, शिव कुमार रुंगटा, पुजारी अनिल महाराज सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित थे.

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