समस्याओं के मकड़जाल में कराह रही तारापुर की जनता

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समस्याओं के मकड़जाल में कराह रही तारापुर की जनता प्रतिनिधि , तारापुर एक ओर जहां विधानसभा का शोर मचा हुआ है वहीं 12 अक्तूबर को मतदान करने की तैयारी चल रही है. वहीं तारापुर की जनता समस्याओं के मकड़जाल में कराह रही है. ये समस्या कभी भी चुनावी मुद्दा नहीं बन पाती है. वैसे तो […]

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समस्याओं के मकड़जाल में कराह रही तारापुर की जनता प्रतिनिधि , तारापुर एक ओर जहां विधानसभा का शोर मचा हुआ है वहीं 12 अक्तूबर को मतदान करने की तैयारी चल रही है. वहीं तारापुर की जनता समस्याओं के मकड़जाल में कराह रही है. ये समस्या कभी भी चुनावी मुद्दा नहीं बन पाती है. वैसे तो तारापुर में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है. लेकिन कुछ समस्याओं पर चर्चा करना जरूरी हो जाता है. तारापुर में एकमात्र आरएस कॉलेज है. जहां सभी विषयों में प्रतिष्ठा की पढ़ाई तो होती है. परंतु विषयवार शिक्षक का घोर अभाव है. जबकि कॉलेज में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. परंतु यह चुनावी मुद्दा नहीं बन पाती है.महिला क्यों नहीं बनती मुद्दा महिला सशक्तिकरण का नारा तो खूब लगता है पर तारापुर बाजार में एक भी पेशाबघर नहीं है. अगर बाजार आने वाली महिलाओं को शौच की आवश्यकता पड़ जाये तो वह मजबूर, बेबस और लाचार हो जाती है. वार्ड सदस्य से लेकर विधायक तक यहां की महिला है बावजूद महिलाओं की इन समस्याओं पर कभी सोचा तक नहीं. क्या यह चुनावी मुद्दा नहीं है.कौन हरेगा किसानों का कष्ट वर्तमान विधायक नीता चौधरी के बदले इस बार उनके पति डॉ मेवालाल चौधरी को टिकट दिया गया जो खुद कृषि वैज्ञानिक है. यहां के किसानों के समक्ष कई समस्याएं है. जिसमें एक समस्या है कि उन्हें समय पर यूरिया नहीं मिल पाता है और जब मिलता है तो वह ब्लेक में मिलता है. 287 रुपये वाली यूरिया का पैकेट किसान 340 रुपये में खरीदती है. सरकार पैक्स के माध्यम से जो धान खरीदा उसकी राशि भी किसानों को नहीं दिया. आखिर यह चुनावी मुद्दा क्यों नहीं बन पायी है. जबरन वसूली जाती है पार्किंग तारापुर में वाहन स्टैंड है. बावजूद वाहन सड़कों पर से खुलती है. निजी बस स्टैंड के एजेंट थाना के सामने बीच सड़क पर ही वाहन को रोक कर पार्किंग शुल्क की वसूली करते है. बालू उठाव व सिंचाई बने चुनावी मुद्दा तारापुर के बदुआ नदी से बड़े पैमाने पर बालू का उठाव किया जा रहा है. इस कार्य से जहां सरकार को राजस्व की क्षति हो रही है वहीं किसानों के खेतों में पानी नदी से नहीं आ पर रही है. जिसके कारण किसान के सामने सिंचाई की समस्या उत्पन्न हो जाती है.

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