गंगा सड़क पुल पर यात्रा के लिए अभी करना होगा वर्षों इंतजार

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गंगा सड़क पुल पर यात्रा के लिए अभी करना होगा वर्षों इंतजार वर्ष 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था पुल का शिलान्यास फोटो संख्या : 3फोटो कैप्सन : गंगा पुल मुंगेर प्रतिनिधि : मुंगेर मुंगेर गंगा रेल सह सड़क पुल पर सड़क यात्रा के लिए अभी वर्षों इंतजार करना होगा. गंगा […]

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गंगा सड़क पुल पर यात्रा के लिए अभी करना होगा वर्षों इंतजार वर्ष 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था पुल का शिलान्यास फोटो संख्या : 3फोटो कैप्सन : गंगा पुल मुंगेर प्रतिनिधि : मुंगेर मुंगेर गंगा रेल सह सड़क पुल पर सड़क यात्रा के लिए अभी वर्षों इंतजार करना होगा. गंगा नदी पर पुल का निर्माण कार्य तो हो चुका है. किंतु सड़क मार्ग के एप्रोच पथ के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य अबतक प्रारंभ भी नहीं हुआ है. फलत: रेल मार्ग चालू होने के बावजूद सड़क यात्रा के लिए भागलपुर व मोकामा का ही सहारा रहेगा. एप्रोच पथ बना एनएच पूर्व बिहार के विकास से जुड़ा गंगा रेल सह सड़क पुल पूरी तरह राजनीतिक का शिकार होकर रह गया है. 26 दिसंबर 2002 को जिस पुल का शिलान्यास तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था. उस पुल के एप्रोच पथ को वर्ष 2014 में राष्ट्रीय उच्च पथ घोषित किया गया. अर्थात 12 वर्ष बाद एप्रोच पथ को एनएच का दर्जा मिला. जाहिर है कि इस पुल निर्माण के लिए जवाबदेह रेल मंत्रालय से लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण एवं बिहार के राजनीतिज्ञ के कार्यशैली पर एक बड़ा सवाल पैदा हो रहा है. 89 एकड़ जमीन की है जरूरत एप्रोच पथ को एनएच 80 से जोड़ने के लिए मुंगेर क्षेत्र में 89 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाना है. जिसके भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई अबतक प्रारंभ नहीं हुई है. बताया जाता है कि पुल के एप्रोच पथ का एनएच मुंगेर क्षेत्र में जहां राष्ट्रीय उच्च पथ 80 से जुड़ेगा. वहीं बेगूसराय क्षेत्र में राष्ट्रीय उच्च पथ 31 से जुड़ेगा. यह पथ मुंगेर नगर निगम के दस वार्डों एवं 34 गांवों से होकर गुजरेगी. 9 किलोमीटर लंबे इस एप्रोच पथ के भूमि अधिग्रहण का मामला यूं ही पड़ा हुआ है. लौट चुकी है राशि पूर्व में जमीन अधिग्रहण के लिए जिला प्रशासन ने 400 करोड़ रुपया का डिमांड पथ निर्माण अधियाची विभाग से की थी. वर्ष 2014 में विभाग ने मात्र 3 करोड़ रुपये जिला प्रशासन को मुहैया करायी. जो ऊंट के मुंह में जीरा का फोरन वाली कहावत को चरितार्थ कर रहा था. जिसके कारण जिला प्रशासन ने भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई प्रारंभ ही नहीं की. यह मार्ग नेशनल हाइवे घोषित होने के बाद जो 3 करोड़ की राशि भूमि अधिग्रहण के लिए भेजी गयी थी. उसे भी वापस ले लिया गया था. आखिर कैसे होगा सड़क निर्माण लोगों का कहना है कि वर्ष 2002 में रेल सह सड़क पुल निर्माण का कार्य प्रारंभ हुआ. लेकिन आजतक रेल सेवा प्रारंभ नहीं हो सकी और न ही सड़क निर्माण कार्य की शुरुआत. इस परिस्थिति में सड़क मार्ग के लिए भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई जिस गति से चल रही उससे अगले कई वर्षों में इसका लाभ इस क्षेत्र के लोगों को नहीं मिल पायेगा. बहरहाल विधानसभा चुनाव के आचार संहिता की बात कह कर हर कोई भी अधिकारी अपना मुंह खोलना नहीं चाहते.

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