बच्चों के मां-बाप अब तक नहीं लौटे पंजाब से, गांव में तरह-तरह की चर्चा, चार बच्चियों की मौत से गांव में मातम

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असरगंज: रहमतपुर पंचायत के मसुदनपुर तांती टोला में एक साथ चार संगी बहनों की मौत ने लोगों को झकझोर दिया. गांव में मातम छाया है. जबकि मृत बच्ची के दादा-दादी व विकलांग चाचा का रो-रो कर बुरा हाल है. मां-बाप अबतक पंजाब से घर नहीं लौट पाये हैं. घटना को लेकर गांव में तरह-तरह की […]

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असरगंज: रहमतपुर पंचायत के मसुदनपुर तांती टोला में एक साथ चार संगी बहनों की मौत ने लोगों को झकझोर दिया. गांव में मातम छाया है. जबकि मृत बच्ची के दादा-दादी व विकलांग चाचा का रो-रो कर बुरा हाल है. मां-बाप अबतक पंजाब से घर नहीं लौट पाये हैं. घटना को लेकर गांव में तरह-तरह की चर्चा है. पुलिस व प्रशासन पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही.
मसुदनपुर तांती टोला निवासी संजय तांती एवं सरिता देवी की चार पुत्री 12 वर्षीय चंपा, 10 वर्षीय स्वाति, 8 वर्षीय सुमन एवं 5 वर्षीय कल्पना अपने बूढ़े दादा रामधारी तांती के साथ गांव में ही रहती थी. गुरुवार की शाम सुबह का बना भात, दाल और आलू की सब्जी बच्चियों ने खायी थी. छह घंटे के दौरान रात में ही चारों बच्चियों की मौत हो गयी. घटना की सूचना जंगल की आग की तरह फैली. जहां प्रात: बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ बच्ची को देखने के लिए उमड़ पड़ी. मृत पड़े बच्चियों के सामने बैठे दादा के आंखों से आंसू बह रहे थे. जबकि विकलांग चाचा दहाड़ मार कर रो रहे थे. पूरे गांव में मातम का माहौल छा गया है. हर लोगों की जुबान पर चार बच्चियों के मौत की ही चर्चा है.
सुबह में पहुंचे अधिकारी व नेता. घटना की सूचना रात में प्रशासनिक अधिकारियों को मिली. लेकिन अधिकारी व नेता सुबह में घटनास्थल पर पहुंचे. एसडीओ शैलेंद्र कुमार भारती, डीएसपी राजवंश सिंह, थानाध्यक्ष दिनेश कुमार, बीडीओ सूरज कुमार, सीओ रंजीत कुमार घटनास्थल पर पहुंचे और तहकीकात प्रारंभ की. सुबह में ही मुखिया स्वाति, पैक्स अध्यक्ष विनोद सिंह, लोजपा नेता अनिल सिंह, प्रखंड 20 सूत्री अध्यक्ष अनिल वैद्य भी घटनास्थल पर पहुंचे.
दादा के मुंह से नहीं निकल रहे थे बोल. अधिकारियों ने जब मृतक बच्चियों के वृद्ध दादा रामधारी तांती से घटना के संबंध में पूछताछ की तो उसके मुंह से बोली ही नहीं निकल रही थी. आंखों से गिरते आंसू और कांपते हुए रामधारी ने बताया कि हमलोगों ने दाल-भात, सब्जी खाया था. रात में सभी बच्चियों की स्थिति खराब होने लगी. गांव के लोगों के सहयोग से डॉक्टर साहब को भी बुलाया. लेकिन हमारी बच्ची नहीं बची.
नहीं हो पाया उचित इलाज. संजय तांती की 12 वर्षीय पुत्री चंपा एवं 10 वर्षीय पुत्री स्वाति ही खाना बनाती थी. अन्य दिनों की भांति गुरुवार की सुबह दाल-भात और आलू का सब्जी बनाया. सुबह में भी सभी ने मिल कर खाया. जबकि शेष बचे खाने को खाना बनाने वाले झोपड़ी में ही रख कर खेलने चली गयी. शाम 7 बजे चंपा ने अपने दादा रामधारी तांती एवं विकलांग चाचा इंद्रदेव तांती को खाना दिया. उसके बाद सभी बच्चियों ने भी सुबह बने खाना को खाया. खाना खाने के कुछ देर बात ही चंपा की तबीयत बिगड़ने लगी. देखते ही देखते चंपा को पेट व सीने में तेज दर्द होने लगा और उसकी मौत हो गयी. जिसके बाद एक के बाद एक बहनों की तबीयत बिगड़ने लगी. ग्रामीणों के सहयोग से एक ग्रामीण चिकित्सक को भी बुलाया गया. जिसने इलाज भी प्रारंभ किया. लेकिन एक के बाद एक बच्ची की मौत होती चली गयी. 3 बजे सुबह में अंतिम मौत हुई. लेकिन इतना समय बीतने के बाद भी बच्चियों को इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं ले जाया गया.
फोरेंसिक टीम ने की जांच. खाना खाने के बाद हुई चार बच्चियों की मौत के बाद प्रशासनिक महकमा में खलबली मच गयी. आखिर किस कारण मौत हुई इसका पता लगाने में अधिकारी जुट गये. जब उन्हें समझ नहीं आया तो भागलपुर से फोरेंसिक टीम को बुलाया गया. शुक्रवार को आर के ओझा एवं संतोष कुमार जांच के लिए घटनास्थल पर पहुंचे. फोरेंसिक टीम के सदस्यों ने शेष बचे खाने के अवशेष, जिस थाली में बच्चियों ने खाना खाया उस थाली एवं घर में रखे अनाज के नमूने अपने साथ जांच के लिए ले गये.
उठ रहे कई सवाल. चार बच्चियों की मौत के बाद क्षेत्र में कई तरह के सवाल उठ रहे है. लोगों का कहना है कि संजय तांती अपनी पत्नी और बड़ी बेटी व सबसे छोटा बेटा के साथ पंजाब में रहता है. परिवार काफी गरीब है. दो जून की रोटी के लिए भी इस परिवार को जद्दोजहद करनी पड़ती है. दादा रामधारी तांती वृद्ध है और चाचा इंद्रदेव तांती शरीर से विकलांग है. दोनों से कोई काम धंधा नहीं होता था. किसी प्रकार उनका घर चल रहा था. समय-समय पर संजय जो राशि भेजता था उससे किसी तरह ये लोग भोजन करते थे. लोगों का कहना है कि जब सभी ने एक ही भोजन को खाया तो किस प्रकार मृत बच्चियों के दादा व चाचा बच गये. यह जांच का विषय है.
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