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मुंगेर में 35 हजार युवाओं को बनाया कुशल व हुनरमंद

Updated at : 10 Jan 2025 12:22 AM (IST)
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मुंगेर में 35 हजार युवाओं को बनाया कुशल व हुनरमंद

जिले में संचालित हैं 32 केवाइपी सेंटर

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मुंगेर. बिहार की प्रमुख समस्याओं में से एक बेरोजगारी है. बेरोजगार युवाओं का एक ऐसा समूह है, जिनके पास काम करने के अवसर ही नहीं हैं. वहीं दूसरी ओर ऐसे युवा भी हैं जो केवल इस वजह से बेरोजगार हैं, क्योंकि उनके पास डिग्री होते हुए भी वे दक्ष नहीं है. न तो कंप्यूटर की जानकारी है और न ही संवाद कौशल. इसके कारण युवा बेरोजगारी की मार झेलते हुए न चाहते हुए भी गलत गतिविधियों में अपने को शामिल कर लेते हैं. ऐसे ही युवाओं को कुशल व हुनरमंद बना कर रोजगार से जोड़ने के लिए सरकार ने 16 दिसंबर 2016 को कुशल युवा कार्यक्रम की शुरूआत की. इन आठ वर्ष में जिले के 35 हजार युवाओं को इस कार्यक्रम के तहत हुनरमंद व कुशल बनाया गया.

आठ वर्ष में 85 हजार 255 छात्र-छात्राओं ने प्रशिक्षण के लिए कराया निबंधन

मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के तहत छात्र हित में तीन कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं. इसमें से एक है कुशल युवा कार्यक्रम. इस योजना के तहत शहर से लेकर गांव तक के 10वीं उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को हुनरमंद बनाने के लिए केवाइपी सेंटर खोले गये. पहले से जिले में गिने-चुने ही केवाइपी सेंटर संचालित हो रहे थे. लेकिन जब इसकी उपयोगिता बढ़ी तो जिले में केवाइपी सेंटर की संख्या भी बढ़ती गयी. जिले में कुल 32 केवाइपी सेंटर संचालित हो रहे हैं. जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र (डीआरसीसी) मुंगेर से मिली जानकारी के अनुसार जिले में इन आठ वर्ष में 85 हजार 255 छात्र-छात्राओं ने प्रशिक्षण के लिए अपना निबंधन इस योजना के तहत कराया है. इसमें से 35 हजार 708 युवाओं को जिले में संचालित 32 केवाइपी सेंटर कुशल व हुनरमंद बना चुका है.

आसान है दक्ष होना, नहीं भटकें 10वीं पास युवा

अगर आपकी संतान या आस-पड़ोस के 10वीं पास युवा बेरोजगार हैं और इधर-उधर भटक रहे हैं, तो आप उनका मार्गदर्शन करें. क्योंकि सरकार ऐसे ही युवाओं को कुशल व हुनरमंद बनाने के लिए केवाइपी सेंटर संचालित कर रही है. इस योजना से जुड़ने के लिए न्यूनतम 10 वीं पास होना जरूरी है. और जिनकी उम्र 15 से 33 वर्ष हो. सामान्य वर्ग के लिए 15 से 28 वर्ष, पिछड़ा वर्ग के लिए 15 से 31 वर्ष और एससी-एसटी वर्ग के लिए 15 से 33 वर्ष की आयु सीमा निर्धारित है. इसके लिए बिहार का निवासी होना जरूरी है. ऐसे युवक-युवतियों को 240 घंटे का नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है. प्रशिक्षण के दौरान जीवन कौशल, संचार कौशल और बुनियादी कंप्यूटर ज्ञान दिया जा रहा है. प्रशिक्षण के लिए रजिस्ट्रेशन कराते समय 1000 रुपये का सिक्योरिटी डिपॉजिट करना होता है. यह राशि प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद वापस कर दी जाती है. प्रशिक्षण केंद्र में जुड़कर भी युवाओं को रोजगार मिल रहा है. वहीं दूसरी ओर यहां से प्रशिक्षण और प्रमाण पत्र हासिल करने के बाद युवा किसी दूसरी कंपनी में रोजगार कर रहे हैं.

युवाओं को नौकरी के लिए तैयार करना प्रशिक्षण का उद्देश्य

शहर के वासुदेवपुर वीर कुंवर सिंह कॉलोनी स्थित केवाइपी सेंटर के संचालक पंकज कुमार सिंह ने बताया कि यहां युवाओं के साफ्ट स्किल्स पर काम किया जाता है. उन्हें जीवन कौशल, संवाद कौशल और कंप्यूटर की जानकारी दी जाती है. प्रशिक्षण का स्तर इंडस्ट्री की जरूरतों को देखकर तय किया गया है, ताकि यहां से निकलने के बाद युवाओं को नौकरी हासिल करने में कम परेशानी हो.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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