इंजीनियरिंग कॉलेज भवन निर्माण पर लगायी मुहर

Published at :27 Apr 2018 6:19 AM (IST)
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इंजीनियरिंग कॉलेज भवन निर्माण पर लगायी मुहर

मुंगेर : प्रमंडलीय मुख्यालय मुंगेर में इंजीनियरिंग कॉलेज खुलने का रास्ता अब साफ हो गया है. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग बिहार सरकार पटना के निदेशक द्वारा गठित तीन सदस्यीय टीम ने गुरुवार को इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के समीप जिला प्रशासन द्वारा मुहैया करायी गयी जमीन का निरीक्षण किया एवं नापी करायी. […]

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मुंगेर : प्रमंडलीय मुख्यालय मुंगेर में इंजीनियरिंग कॉलेज खुलने का रास्ता अब साफ हो गया है. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग बिहार सरकार पटना के निदेशक द्वारा गठित तीन सदस्यीय टीम ने गुरुवार को इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के समीप जिला प्रशासन द्वारा मुहैया करायी गयी जमीन का निरीक्षण किया एवं नापी करायी. टीम के सदस्यों ने लोकेशन एवं निर्धारित साढ़े सात एकड़ भूमि मुहैया होने पर इंजीनियरिंग कॉलेज भवन निर्माण पर मुहर लगा दी.

विज्ञान एवं प्रोद्यौगिकी विभाग बिहार सरकार द्वारा गठित टीम में एडीएम मुंगेर ईश्वरचंद्र शर्मा, राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज हवेली खड़गपुर के प्राचार्य रवि कुमार एवं भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रतिनिधि प्रो. केएन प्रसाद शामिल थे. गुरुवार की सुबह 10 बजे टीम के सदस्य सदर प्रखंड क्षेत्र के मुंगेर-सीताकुंड मुख्य मार्ग स्थित कृषि विज्ञान केंद्र मुंगेर पहुंचे. जिला प्रशासन द्वारा जो जमीन इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए उपलब्ध कराया गया था. उसकी नापी करायी गयी. जो साढे सात एकड़ थी. टीम के सदस्यों ने नापी के बाद एवं लोकेशन के आधार पर इंजीनियरिंग कॉलेज निर्माण पर अपनी स्वीकृति प्रदान की.
बताया जाता है कि टीम द्वारा पूरी पड़ताल के बाद निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गयी और जांच रिपोर्ट को मुख्यालय भेज दिया. अब यह तय हो गया कृषि विज्ञान केंद्र के परती भूमि पर ही इंजीनियरिंग कॉलेज का निर्माण होगा. माना जा रहा है एक वर्ष के अंदर कॉलेज के भवन निर्माण का कार्य शुरू कर दिया जायेगा.
वर्ष 2007 में इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने की हुई थी घोषणा : राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने विकास यात्रा के दौरान वर्ष 2007 में मुंगेर में इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने की घोषणा की थी. कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बावजूद एक दशक से भूमि के मामले को लेकर इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने का मामला लटका था. इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए पहले संदलपुर में जीमन देखी गयी. जिसे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा अस्वीकृत कर दिया. उसके बाद प्रसिद्ध पर्यटक स्थल ऋषिकुंड में प्राइवेट जमीन का चयन किया गया. लेकिन जमीन मालिक एवं जिला प्रशासन के बीच मुआवजे के दर को लेकर बात नहीं बनी और मामला उलझ गया.
उसके बाद धरहरा प्रखंड के बंगलवा सतघरवा में निजी जमीन का चयन किया गया. लेकिन जांच दल ने उक्त भूमि को अस्वीकृत कर दिया गया. सितंबर 2017 को जिलाधिकारी उदय कुमार सिंह ने इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के परती जमीन का चयन कर विभाग को अपनी रिपोर्ट सौंपी. इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए कम से कम साढ़े सात एकड़ जमीन की जरूरत थी जो यहां उपलब्ध मिला. गुरुवार को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग बिहार सरकार द्वारा गठित टीम पहुंची और जमीन की नापी एवं लोकेशन के आधार पर इंजीनियरिंग कॉलेज बनाने की स्वीकृति प्रदान कर दी.
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