सफाईकर्मियों की हड़ताल से शहर बदबूदार, सड़कों पर कूड़ा

Published at :25 Apr 2018 5:27 AM (IST)
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सफाईकर्मियों की हड़ताल से शहर बदबूदार, सड़कों पर कूड़ा

मुंगेर : सफाईकर्मियों का हड़ताल अब असरदार साबित होने लगी है. इसका नतीजा सड़कों पर दिख रहा. एक ओर जहां कूड़ा स्पॉट पर कूड़े का ढेर लग गया है. वहीं दूसरी ओर सड़कों पर कूड़ा सजने लगा है. इस कारण शहर की सूरत बदरंग होती जा रही है. हाल यह है कि प्रमंडलीय आयुक्त का […]

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मुंगेर : सफाईकर्मियों का हड़ताल अब असरदार साबित होने लगी है. इसका नतीजा सड़कों पर दिख रहा. एक ओर जहां कूड़ा स्पॉट पर कूड़े का ढेर लग गया है. वहीं दूसरी ओर सड़कों पर कूड़ा सजने लगा है. इस कारण शहर की सूरत बदरंग होती जा रही है. हाल यह है कि प्रमंडलीय आयुक्त का निर्देश भी बेअसर रहा और एनजीओ ने निगम प्रशासन की शर्तों को मानने से इंकार कर दिया. इस कारण हड़ताल पर कोई समझौता नहीं हुआ और सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गयी. संभावना जतायी जा रही है कि बुधवार को सफाईकर्मियों की हड़ताल समाप्त होगी.

नहीं हो रही नालों की सफाई: सफाईकर्मियों के हड़ताल से नालों की सफाई ठप पड़ा हुआ है. बड़ा नाला तो दूर छोटा नाला भी बजबजाने लगा है और उससे निकलने वाले बदबू ने लोगों को परेशान कर रखा है. नालों की स्थिति ऐसी हो गयी है अगर एक-दो दिन नाला की सफाई नहीं हुई तो नालों की गंदगी सड़कों पर बहेगी. सबसे बदहाल स्थिति लाल दरवाजा स्थित बड़ा नाला, 2 व 3 नंबर गुमटी का नाला का है. जहां गंदगी से नाला बजबजा रहा है. निगम द्वारा शहर की सफाई की कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की जा रही.
एनजीओ और निगम प्रशासन के बीच पिस रहे शहरी : प्रमंडलीय आयुक्त पंकज कुमार पाल ने हड़ताल के पांचवें दिन ही एनजीओ, निगम आयुक्त, महापौर की बैठक बुलायी. उन्होंने एडीएम, एसडीओ को निर्देश दिया था कि एनजीओ, सफाईकर्मी एवं निगम प्रशासन के साथ बैठक बुलाकर अविलंब हड़ताल को समाप्त कराया जाये. बैठक भी हुई. जिसमें एनजीओ संचालक ने निगम प्रशासन से अपना बकाया पैसा का भुगतान करने का शर्त रखा. जबकि सफाईकर्मी अपने वेतन के भुगतान पर अड़ा हुआ है. इधर निगम प्रशासन का कहना है कि एनजीओ कर्मी का भुगतान के लिए जो विपत्र दिया गया है वह गलत है. जिसके कारण सफाईकर्मियों का हड़ताल असरदार हो रहा है. जबकि प्रमंडलीय आयुक्त का निर्देश भी बेअसरदार हो गया है.
कहते हैं आम शहरी : शहरी रवि, रोहित कुमार, कृष्णा सहित अन्य ने कहा कि बाजार की स्थिति नारकीय हो गयी है. दुकान भी खोलने का भी मन नहीं करता है. लगन का समय है. गांव-गांव से लोग खरीदारी को लेकर बाजार करने आ रहे हैं. लेकिन सड़कों पर कूड़े के ढेर परेशान कर रहे हैं. निगम प्रशासन को खुद सफाई की जिम्मेदारी उठानी चाहिए. क्योंकि उनके पास सफाईकर्मी, उपकरण सभी उपलब्ध है. लेकिन एनजीओ के जिम्मे सफाई व्यवस्था सौंप दी गयी. इस पर निगम का कोई जोर नहीं चल रहा है.
कहते हैं नगर आयुक्त
नगर आयुक्त श्यामल किशोर पाठक ने बताया कि एनजीओ के ग्रुप बी और सी द्वारा फरवरी माह तक का बिल दिया गया है. जिसके भुगतान की प्रक्रिया चल रही है. जबकि ग्रुप द्वारा बिल अब तक नहीं दिया गया है. उन्होंने कहा कि एक-दो दिनों में एनजीओ सफाईकर्मियों की हड़ताल खत्म हो जायेगी और सफाई व्यवस्था दुरुस्त हो जायेगी.
डंपिंग यार्ड में बदलने लगी शहर की सड़कें
सफाईकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण शहर की सफाई व्यवस्था ठप हो गयी है. इस कारण धीरे-धीरे शहर की सड़क डपिंग यार्ड का रूप लेता जा रहा है. शहर का मुख्य मार्ग पूरबसराय, मुर्गियाचक, गांधी चौक, एसबीआइ बाजार ब्रांच, राजीव गांधी चौक, एक नंबर ट्रैफिक तक बीच सड़क पर दुकानदारों द्वारा कूड़ा समेट कर सड़क पर जमा किया जा रहा है.
जबकि कोतवाली से मुंगेर रेलवे स्टेशन मार्ग, अस्पताल मार्ग, बड़ी बाजार, बेकापुर, जुबलीवेल चौक, शादीपुर, शास्त्री चौक, शीतला स्थान रोड सहित पूरे शहर के प्रमुख सड़कों पर कूड़े का ढेर जमा हो गया. दुकानदार जहां अपने दुकान एवं बाहर का कूड़ा समेट कर सड़क पर डाल रहे हैं. वहीं आम लोग घर में कूड़ा जमा होने के कारण सड़कों पर फेंकने लगे हैं. सफाई नहीं होने से शहर की सड़कों पर कचरे का अंबार लगता जा रहा है.
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