इधर, चार लोगों को अंतिम सांस तक जेल में बंद रखने का आदेश

Published at :01 Sep 2017 6:01 AM (IST)
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इधर, चार लोगों को अंतिम सांस तक जेल में बंद रखने का आदेश

मुंगेर : मुंगेर के अपर जिला सत्र न्यायाधीश प्रथम ज्योति स्वरूप श्रीवास्तव ने गुरुवार को तीन वर्ष पूर्व दो युवकों की हत्या के मामले में चार अभियुक्तों को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास तथा एक को दस वर्ष की सजा सुनायी. न्यायाधीश ने रोहित कुमार एवं सन्नी कुमार हत्याकांड में उपलब्ध साक्ष्य व गवाहों के […]

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मुंगेर : मुंगेर के अपर जिला सत्र न्यायाधीश प्रथम ज्योति स्वरूप श्रीवास्तव ने गुरुवार को तीन वर्ष पूर्व दो युवकों की हत्या के मामले में चार अभियुक्तों को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास तथा एक को दस वर्ष की सजा सुनायी. न्यायाधीश ने रोहित कुमार एवं सन्नी कुमार हत्याकांड में उपलब्ध साक्ष्य व गवाहों के बयान के आधार पर भादवि की धारा 302 के तहत रतन साह, कल्लू उर्फ रंजन, नंदन कुमार तथा सतीश को जीवन के अंतिम सांस तक आजीवन कारावास तथा 25 हजार जुर्माना मुकर्रर किया, जबकि विक्रम यादव को साजिश रचने के आरोप में दस वर्ष की सजा सुनाई. साथ ही 15 हजार का आर्थिक दंड किया गया. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से अपर लोक अभियोजक संदीप कुमार भट्टाचार्य ने बहस में भाग लिया.

घटना के संदर्भ में बताया जाता है कि मुफस्सिल थाना के शंकरपुर निवासी राहुल कुमार ने 6 सिंतम्बर 2014 को कासिम बाजार थाना में एक प्राथमिकी दर्ज कर बताया था कि उसके भाई रोहित कुमार जो शास्त्रीनगर में अपनी बहन के यहां रहकर पढ़ता था का शास्त्री नगर के नंदन कुमार से किसी बात का लेकर एक महीना पूर्व विवाद हुआ था. जिसका बदला लेने की बात कही थी. बाद में विवाद का निबटारा की बात कह कर 3 सितंबर को पार्टी कह कर कासिम बाजार स्थित चौक पर बुलाया. रोहित के साथ उसका दोस्त सन्नी भी गया जो जमुई का रहने वाला था. वे लोग सीताकुंड-बरदह के पास गंगा घाट पर पार्टी करने की बात कही थी. उसके साथ रतन साह, कल्लू, नंदन तथा सतीश ने पार्टी मनाने के बाद हत्या कर दी. सन्नी का शव सुल्तानगंज घाट में मिला था, जबकि रोहित की लाश नहीं मिली. अदालत के इसे क्रुर हत्या करार देकर चार अभियुक्तों को जीवन के अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक संदीप भट्टाचार्य ने अभियुक्तों को फांसी की सजा सुनाने की मांग की. अदालत के फैसले के पहले विक्रम यादव की मां अदालत में अपने पुत्र को बेगुनाह बता कर उसे सजा की मुक्त करने की मांग की.
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