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Motihari : दीदी की नर्सरी से आत्मनिर्भर हो रहीं महिलाएं

Updated at : 12 Apr 2025 10:06 PM (IST)
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Motihari : दीदी की नर्सरी से आत्मनिर्भर हो रहीं महिलाएं

कभी मुफलिसी व तंगहाली की जिंदगी जी रहीं महिलाएं आज के समय में जीविका दीदी बनकर समाज के लिए रोल मॉडल बनती दिख रही हैं.

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Motihari : इन्तेजारूल हक, मोतिहारी. कभी मुफलिसी व तंगहाली की जिंदगी जी रहीं महिलाएं आज के समय में जीविका दीदी बनकर समाज के लिए रोल मॉडल बनती दिख रही हैं. घर की तमाम जिम्मेवारियों का निर्वहन करते हुए अच्छी कमाई कर रही हैं,जिससे उनके जीवन में काफी बदलाव हो रहे हैं. काम के प्रति दिख रहे समर्पण से विभाग भी गदगद है और उनके सेवाओं का विस्तार कर रहा है. बात कर रहे हैं उनके द्वारा चलायी जा रही नर्सरियों के बारे में.ये दीदियां नर्सरी चलाकर अच्छी कमाई के साथ समाज को हरियाली का शानदार संदेश दे रही हैं.

किसी भी तरह के पौधे की जरूरत आपको है ताे आप यहां से कभी ले सकतें हैं.विभाग से मिली जानकारी के अनुसार,जिले में इनकी कुल 51 नर्सरियां चल रही हैं जहां हर तरह के पौधे तैयार किये जा रहे हैं. इनमें 20 प्रतिशत फलदार व 80 प्रतिशत छायादार पौधे हैं और गुणवत्ता का पूरा भरोसा मिलता है.

मनरेगा व वन विभाग को देती हैं पौधे

दीदियों द्वारा तैयार पौधे मनरेगा व वन विभाग अधिक लेती है.बताया जाता है कि वन विभाग व मनरेगा के लिए जबभी पौधों की जरूरत होती है तो दीदियों की नर्सरी से आपूर्ति होती है. इसके अलावा अन्य किसी दूसरे को जरूरत के अनुसार,आपूर्ति करती हैं. इस साल जो विभाग ने लक्ष्य निर्धारित किया था,उससे कहीं आगे निकल चुकी हैं.

30 हजार से लकर 50 हजार तक पौधे हो रहे तैयार

क्षमता के अनुसार,नर्सरियों में पौधे तैयार होते हैं.किसी नर्सरी में 30 हजार तो किसी में चालिस हजार पौधे तैयार होते हैं. किसी किसी में तो 50 हजार पौधे तैयार होते हैं. जैसे चकिया के रौशनी दीदी की नर्सरी में 50 हजार पौधे तैयार होते हैं. रौशनी दीदी अपनी बेहतर कार्यशैली को ले कई बार सम्मानति हो चुकी हैं.

एक पौधे पर दस रुपये का मुनाफा,यानी 35 हजार की कमाई

जीविका दीदी की नर्सरी में 30 रुपये की दर से प्रति पौधे बिकते हैं. एक पौधा पर दस रुपये बचता है. अगर 40 हजार पौधा बिका तो दस रुपये की दर से आमदनी चार लाख रुपये हुए. यानी प्रतिमाह औसतन 35 हजार रुपये प्रतिमाह हुए जो घर पर परिवार चलाने के लिए अच्छी रकम मानी जाती है. इस तरह से उनका जीवन काफी बदलता दिख रहा है और आर्थिक मजबूती आ रही है.

कहते हैं अधिकारी

नर्सरी चलाकर जीविका दीदियां आर्थिक रूप से काफी मजबूत हो रही हैं. उनके द्वारा उगाये गये पौधे की डिमांड काफी है. हरियाली का भी संदेश दे रही हैं.

गणेश पासवान,डीपीएम,जीविका,मोतिहारी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SATENDRA PRASAD SAT

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