Motihari News: हर तीन साल पर आता है 'मलमास' का अनोखा योग, जानिए क्यों इसे भगवान विष्णु ने दिया अपना नाम

Published by : Purushottam Kumar Updated At : 31 May 2026 9:18 AM

विज्ञापन

आचार्य नवलेश तिवारी

Motihari News: मधुबन में पुरुषोत्तम पूर्णिमा पर भगवान विष्णु की विशेष पूजा. आचार्य नवलेश तिवारी ने बताया अधिक मास (मलमास) का धार्मिक महत्व और सुख-समृद्धि के लिए चमत्कारी मंत्र. शशि चंद्र तिवारी की रिपोर्ट. जानिए खबर विस्तार से…

विज्ञापन

Motihari News: सनातन धर्म में बेहद पवित्र और दुर्लभ माने जाने वाले पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) की पूर्णिमा का पावन पर्व आज पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है. यह पूरा महीना जगत के पालनहार भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय माना जाता है. इस अलौकिक अवसर पर भगवान श्रीहरि के विशेष पूजन, मंत्र जाप, पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और मानसिक आराधना का सर्वोपरि महत्व शास्त्रों में बताया गया है. चंपारण के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य और पंडित नवलेश तिवारी ने इस तिथि के आध्यात्मिक और खगोलीय महत्व पर विशेष प्रकाश डाला है.

खगोलीय गणना से हर तीन वर्ष पर बनता है ‘मलमास’ का दुर्लभ योग

आचार्य नवलेश तिवारी ने पुरुषोत्तम मास की वैज्ञानिक और धार्मिक पृष्ठभूमि को स्पष्ट करते हुए कहा कि सूर्य संक्रांति (सौर वर्ष) और चंद्र वर्ष की तिथियों में होने वाले अंतर, कमी एवं वृद्धि के संतुलन के कारण लगभग प्रत्येक तीन वर्ष पर एक बार ‘अधिक मास’ का विशेष योग बनता है.

उन्होंने इसके शुद्ध और अशुद्ध पक्षों का वर्गीकरण करते हुए बताया कि जिस महीने में अधिक मास पड़ता है, उसके प्रथम (शुरुआती) एवं अंतिम पक्ष को पूरी तरह ‘शुद्ध’ माना गया है, जबकि मध्य के दोनों पक्षों को शास्त्रों में दोषयुक्त माना जाता है. इसी मध्य काल में मांगलिक कार्यों की मनाही होने के कारण लोकभाषा में इसे ‘मलमास’ भी कहा जाता है. हालांकि, शास्त्रों में इस पूरे महीने को भगवान विष्णु ने अपना नाम देकर ‘पुरुषोत्तम मास’ की परम कल्याणकारी संज्ञा दी है.

राजगीर, काशी और वृंदावन जैसे पावन तीर्थों में होता है सभी देवी-देवताओं का वास

आचार्य तिवारी ने कहा कि अधिक मास के दौरान बिहार के ऐतिहासिक राजगीर, उत्तराखंड के हरिद्वार, उत्तर प्रदेश के पावन वृंदावन एवं मोक्ष नगरी काशी जैसे पवित्र तीर्थस्थलों में मानसिक पूजन एवं भगवान विष्णु की उपासना का विशेष विधान है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पूरे एक महीने के लिए ब्रह्मांड के सभी देवी-देवताओं का वास इन पवित्र विभिन्न तीर्थों में ही हो जाता है. यही कारण है कि इन धार्मिक स्थलों पर एक माह तक विशाल मेले, अखंड कीर्तन और विशेष पूजन कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जहां देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु पहुंचकर पूजा-अर्चना एवं दान-पुण्य कर अक्षय पुण्य के भागी बनते हैं.

सुख-समृद्धि के लिए पुरुषोत्तम मास में इस महामंत्र का करें नियमित जाप

आचार्य नवलेश तिवारी ने बताया कि पुरुषोत्तम मास में भगवान नारायण की असीम अनुकंपा और कृपा प्राप्ति के लिए श्रद्धालुओं को नियमित रूप से पवित्र मंत्रों का जाप करना चाहिये. उन्होंने सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति के लिए एक विशेष महामंत्र की महिमा बताई:

गोवर्धनधरं वन्दे गोपालं गोपरूपिणम्

गोकुलोत्सवमीशानं गोविन्दं गोपिकाप्रियम्

मंत्र का सरल अर्थ: “मैं गायों और पृथ्वी को धारण करने वाले, गोप रूपधारी, गोकुल के उत्सव स्वरूप, संपूर्ण जगत के स्वामी और गोपियों के अत्यंत प्रिय भगवान गोविंद (श्रीकृष्ण) की वंदना करता हूँ.”

आचार्य ने दावों के साथ कहा कि पुरुषोत्तम पूर्णिमा के दिन इस दिव्य मंत्र के शांत मन से जाप करने से जातक के जीवन से सभी प्रकार के कष्ट, दरिद्रता और मानसिक तनाव का समूल नाश होता है तथा घर में अटूट सुख, शांति एवं समृद्धि का स्थायी वास होता है. आज पूर्णिमा के दिन मधुबन क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों और शिवालयों में सुबह से ही भगवान सत्यनारायण की कथा और विशेष महाआरती के आयोजन किए जा रहे हैं.

मोतिहारी के मधुबन से शशि चंद्र तिवारी की रिपोर्ट

विज्ञापन
Purushottam Kumar

लेखक के बारे में

By Purushottam Kumar

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन