मोतीझील फिर बदहाल, जलकुंभी से ढकी झील, बोटिंग ठप और करोड़ों की योजनाओं पर सवाल

Author Intejarul haq|Edited by Aaruni Thakur
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मोतझील में जलकुंभी | Prabhat Khabar Network

मोतझील में जलकुंभी

मोतीझील एक बार फिर जलकुंभी की मोटी परत से ढक गई है, जिससे बोटिंग लगभग बंद हो गई है. हर साल लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद झील की सफाई व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. बदबू और मच्छरों से स्थानीय निवासी परेशान हैं.

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Motihari Marine Drive : शहर की पहचान मानी जाने वाली मोतीझील एक बार फिर जलकुंभी की मोटी परत से ढक गई है. हालत यह है कि झील का बड़ा हिस्सा हरी जलकुंभी से भर चुका है, जिससे बोटिंग लगभग बंद हो गई है और बीच में लगा फाउंटेन भी जलकुंभी के बीच घिरा नजर आ रहा है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल झील की सफाई और सौंदर्यीकरण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन कुछ ही समय बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है.

सफाई के दावों पर उठ रहे सवाल

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जलकुंभी हटाने के लिए हर वर्ष योजनाएं बनती हैं, बजट स्वीकृत होता है और कुछ दिनों तक सफाई अभियान भी चलता है. लेकिन अभियान ज्यादा दिन नहीं टिकता और थोड़े ही समय में जलकुंभी फिर पूरी झील में फैल जाती है.

लोगों का कहना है कि यदि स्थायी और वैज्ञानिक तरीके से सफाई की जाए तो बार-बार यही स्थिति पैदा नहीं होगी.

बदबू और मच्छरों से बढ़ी परेशानी

जलकुंभी के बढ़ते फैलाव से झील का पानी प्रभावित हो रहा है. आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि पानी से बदबू आने लगी है और मच्छरों की संख्या भी बढ़ गई है.

स्थानीय लोगों के अनुसार इससे मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है. वहीं जलकुंभी के कारण पानी में ऑक्सीजन की कमी से जलीय जीवों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.

बोटिंग पर लगा ब्रेक

करीब 15 से 20 दिन पहले तक लोग मोतीझील में नौकायन का आनंद ले रहे थे. लेकिन अब जलकुंभी के फैलाव के कारण बोटिंग गतिविधियां लगभग ठप हो गई हैं.

झील के बीच स्थापित फाउंटेन भी जलकुंभी से घिर गया है, जिससे झील की सुंदरता प्रभावित हो रही है.

दो करोड़ की मशीन भी नहीं बदल सकी तस्वीर

मोतीझील की सफाई और गाद निकालने के लिए करीब तीन वर्ष पहले लगभग दो करोड़ रुपये की लागत से विशेष मशीन खरीदी गई थी. शुरुआती दौर में मशीन से सफाई का काम हुआ और झील की स्थिति में सुधार भी दिखा.

हालांकि बाद में मशीन बंद हो गई. प्रशासनिक पहल के बाद इसे फिर चालू कराया गया था, लेकिन अब एक बार फिर जलकुंभी तेजी से फैल गई है. अधिकारियों का कहना है कि मशीन कार्यरत है और जल्द सफाई अभियान चलाया जाएगा.

फाउंटेन भी फिर हुआ बंद

मोतीझील में करीब 20 लाख रुपये की लागत से लगाए गए तीन फाउंटेन भी तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़े हैं. पहले इन्हें ठीक कर दोबारा चालू किया गया था, लेकिन कुछ महीनों बाद फिर बंद हो गए.

अधिकारियों का कहना है कि फाउंटेन को दोबारा चालू कराने की प्रक्रिया चल रही है.

मरीन ड्राइव और बोटिंग से बढ़ी थी पहचान

मोतीझील के किनारे बने मरीन ड्राइव और बोटिंग की सुविधा ने पिछले कुछ वर्षों में इसे शहर के प्रमुख आकर्षण के रूप में पहचान दिलाई थी. इससे लोगों को नौकायन का आनंद मिलने के साथ सरकारी राजस्व में भी बढ़ोतरी हो रही थी.

अब जलकुंभी के बढ़ते फैलाव से झील फिर अपनी पुरानी स्थिति की ओर लौटती दिख रही है. स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मशीन के नियमित उपयोग और स्थायी समाधान के साथ जल्द सफाई अभियान चलाने की मांग की है.


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