Motihari News: कभी चंपा के जंगलों से घिरा था चंपारण, अब हरियाली बचाने के लिए लगाने होंगे 1.60 करोड़ पौधे

Edited by Aniket Kumar
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Motihari News: कभी चंपा के जंगलों के लिए प्रसिद्ध पूर्वी चंपारण अब हरियाली के संकट से जूझ रहा है. जिले में वन क्षेत्र सिर्फ 4.5 प्रतिशत बचा है. शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और सिमटती नदियों ने पर्यावरणीय चिंता बढ़ा दी है. पढे़ं पूरी खबर…

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मोतिहारी के मधुबन से शशि चंद्र तिवारी की रिपोर्ट

Motihari News: कभी चंपा के घने जंगलों और समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों के लिए प्रसिद्ध पूर्वी चंपारण आज हरियाली के गंभीर संकट से जूझ रहा है. तेजी से बढ़ते शहरीकरण, घटते वन क्षेत्र, जलवायु परिवर्तन और सिमटती नदियों ने जिले के पर्यावरणीय संतुलन को चुनौती के सामने खड़ा कर दिया है. हालात ऐसे हैं कि अब प्राकृतिक हरियाली को बचाने के लिए बड़े पैमाने पर कृत्रिम पौधारोपण का सहारा लेना पड़ रहा है.

जिले में केवल 4.5 प्रतिशत वन क्षेत्र बचा

करीब 3968 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले पूर्वी चंपारण में वर्तमान में वन क्षेत्र केवल 187.91 वर्ग किलोमीटर रह गया है, जो जिले के कुल भूभाग का मात्र 4.5 प्रतिशत है. इसमें मेहसी के भीमलपुर का 86 हेक्टेयर वन क्षेत्र भी शामिल है. पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी है और यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो इसका असर जलवायु और कृषि दोनों पर पड़ेगा.

शहरीकरण की रफ्तार ने बढ़ाई परेशानी

मोतिहारी, रक्सौल, सुगौली, चकिया, अरेराज, पकड़ीदयाल, मधुबन, ढाका, तुरकौलिया, पीपरा, पीपराकोठी और केसरिया जैसे इलाकों में तेजी से शहरीकरण हो रहा है. नई कॉलोनियों, सड़कों और भवन निर्माण के कारण हरित क्षेत्र लगातार कम होते जा रहे हैं. कंक्रीट के बढ़ते विस्तार ने स्थानीय तापमान में भी वृद्धि की है. पिछले कुछ वर्षों में 42 से 44 डिग्री सेल्सियस तापमान सामान्य स्थिति बनती जा रही है.

जलवायु परिवर्तन का दिख रहा असर

जिले में बेमौसम बारिश, अनिश्चित मानसून और वज्रपात की घटनाएं बढ़ी हैं. इसका सीधा असर खेती-किसानी पर पड़ रहा है. किसान मौसम की अनिश्चितता से परेशान हैं और फसलों के उत्पादन पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है.

सिमट रही हैं नदियां और जलधाराएं

गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती और लालबकेया जैसी प्रमुख नदियों के अलावा गांवों की छोटी नदियां और जलधाराएं भी अतिक्रमण तथा गाद जमाव के कारण सिकुड़ रही हैं. इससे भूजल स्तर प्रभावित हो रहा है और आने वाले वर्षों में जल संकट की आशंका बढ़ गई है.

9 प्रतिशत वन क्षेत्र के लिए 1.60 करोड़ पौधों की जरूरत

वन विभाग के अनुसार वर्ष 2019-20 से 2023 तक जिले में करीब 30 लाख पौधे लगाए गए हैं. वहीं चालू वर्ष में 11 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. विभाग का आकलन है कि वन क्षेत्र में एक प्रतिशत वृद्धि के लिए लगभग 40 लाख पौधों की आवश्यकता होगी. यदि जिले को 9 प्रतिशत से अधिक वन क्षेत्र तक पहुंचाना है तो अगले पांच वर्षों में करीब 1.60 करोड़ पौधे लगाने होंगे.

किसानों को प्रोत्साहित कर रहा वन विभाग

निजी जमीन पर पौधारोपण को बढ़ावा देने के लिए वन विभाग 10 रुपये में पौधे उपलब्ध करा रहा है. पौधा जीवित रहने पर 70 रुपये प्रति पौधा अनुदान देने की भी व्यवस्था है. पकड़ीदयाल एसडीओ मंगला कुमारी ने बताया कि जल-जीवन-हरियाली और सामाजिक वानिकी मिशन के तहत लगातार पौधारोपण कराया जा रहा है. उन्होंने बड़े किसानों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने की अपील की है, ताकि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जिले को मजबूत बनाया जा सके.

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Aniket Kumar

लेखक के बारे में

By Aniket Kumar

अनिकेत बीते 4 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. राजस्थान पत्रिका और न्यूजट्रैक जैसे मीडिया संस्थान के साथ काम करने का अनुभव. एंटरटेनमेंट, हाईपरलोकल और राजनीति की खबरों से अधिक जुड़ाव. वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ कार्यरत.

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