मोतिहारी में मनी लॉन्डरिंग का भांडा फोड़, करोड़ों रुपयों का हेर फेर करता था ‘बॉस गैंग’

साांकेतिक तस्वीर
मोतिहारी की साइबर पुलिस ने जिले में चल रहें बॉस गैंग नामक आपराधिक ग्रुप का भांडा फोड़ा है. USDT और अन्य क्रिपटो-करेंसी के माध्यम से काले धन को सफेद करने का काम करते थे. छापेमारी के दौरान पुलिस को 10 लाख का कैश बरामद हुआ.
मोतिहारी: इंटरनेट के बढ़ते युग में साइबर क्राइम की घटनाएं भी बढ़ती नजर आ रही है. बिहार के मोतिहारी साइबर थाना पुलिस ने ‘बॉस गैंग’ नामक साइबर आपराधिक ग्रुप का भांडा फोड़ा है. यह ग्रुप डार्क वेब का इस्तेमाल करके काले धन को सफेद करने का काम करता था.
कौन है ‘बॉस गैंग’ का लीडर
साइबर डीएसपी अभिनव परासर ने बताया की गैंग के लीडर सत्यम सौरभ के कहने पर मीना बाजार का दयाशंकर मनी लॉन्डरिंग का काम करता था. वहीं दयाशंकर के इशारे पर नगर थाना क्षेत्र के पास रहने वाला मुहम्मद जावेद USDT और अन्य क्रिपटो-करेंसी का कारोबार करके काले धन को सफेद करता था.
छापेमारी में बरामद हुआ कैश
दयाशंकर के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान पुलिस को कई संदेहजनक सामान मिला है. जिसमे नोट गिनने की मशीन, कई बैंकों के पासबुक, कई एटीएम कार्ड, चेक बुक, पैन कार्ड, दो छोटी डायरी, 3 सीपीयू, 3 मोबाइल, एक राइफल, एक पिस्टल और भारी मात्रा में कारतूस भी बरामद हुआ. साथ ही साथ छापेमारी के दौरान 10 लाख 30 हजार रुपया कैश भी बरामद हुआ है.
पुलिस अधिकारी थें गैंग में शामिल
चौकाने वाली बात है कि एसएसबी के 47 वीं बटालियन के हवलदार पंकज पांडे भी इस गैंग में शामिल है. छापेमारी के दौरान हवलदार पंकज पांडे और मो. जावेद को गिरफ्तार कर लिया गया. जबकि दयाशंकर अभी भी फरार है. दयाशंकर साइबर पुलिस की लगातार चल रही कार्रवाइयों से बचने के लिये काफी समय से फरार था. लेकिन इस दौरान भी दयाशंकर लगातार मो. जावेद से फोन के माध्यम से बात करता था.
मो. जावेद, दयाशंकर के इशारे पर USDT के माध्यम से जिले में पहुंचे काले धन को सफेद करने का काम करता था और साथ ही हवाला के कारोबार से पैसे को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का काम करता था. दयाशंकर के कई ठिकानों की खबर पुलिस को प्राप्त हुई है. खबर के अनुसार छपरा, बहास, घोडसहन आदि जगहों पर ठिकाने मिले है.
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पॉकेट डायरी में था सारा हिसाब किताब
छापेमारी के दौरान बरामद दो पॉकेट डायरीयों में इन अपराधियों का हिसाब किताब लिखा हुआ है. आया हुआ पैसा किन जगहों पर लगाया गया वो उन पॉकेट डायरी में अंकित है.जानकारी के अनुसार करोड़ो के लेन-देन का हिसाब डायरी के माध्यम से प्राप्त किया गया है. इसके साथ ही कई नए नाम पुलिस के सामने आये है जिसकी जांच पड़ताल में पुलिस जुड़ी हुई है. (मृणाल कुमार की रिपोर्ट)
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लेखक के बारे में
By Prashant Tiwari
प्रशांत तिवारी डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत पंजाब केसरी से करके राजस्थान पत्रिका होते हुए फिलहाल प्रभात खबर डिजिटल के बिहार टीम तक पहुंचे हैं, देश और राज्य की राजनीति में गहरी दिलचस्पी रखते हैं. साथ ही अभी पत्रकारिता की बारीकियों को सीखने में जुटे हुए हैं.
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