रवि किशन की पहली फिल्म बनाने वाले निर्माता ने बदली घोड़ासहन की तस्वीर, अब 420 लोगों को दे रहे रोजगार

Author Munendra kumar|Edited by Aaruni Thakur
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घोड़ासहन

इंडस्ट्री का मुख्य गेट,इंडस्ट्री में काम कर रहे सैकड़ों कर्मी

कभी फिल्म जगत में रवि किशन की पहली मुख्य भूमिका वाली फिल्म बनाने वाले उमेश कुमार ने अब पूर्वी चंपारण के घोड़ासहन में गारमेंट फैक्ट्री स्थापित की है. इस फैक्ट्री से 420 से अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार मिला है, जिनमें अधिकांश महिलाएं हैं.

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Ghorasahan Garment Factory: पूर्वी चंपारण के घोड़ासहन के उद्यमी उमेश कुमार ने संघर्ष, असफलताओं और करोड़ों रुपये के नुकसान के बाद अपने गृह क्षेत्र में रोजगार की नई मिसाल पेश की है. कभी फिल्म निर्माण और वितरण की दुनिया में पहचान बनाने वाले उमेश कुमार आज गारमेंट उद्योग के माध्यम से सैकड़ों युवाओं और महिलाओं को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं.

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सिनेमा हॉल से शुरू हुआ सफर

उमेश कुमार ने बताया कि छात्र जीवन के बाद वर्ष 1990 में उन्होंने घोड़ासहन में राजमंदिर सिनेमा हॉल की स्थापना की. इसके बाद नेपाल में फिल्म वितरण का कारोबार शुरू किया, लेकिन माओवादी गतिविधियों के कारण उन्हें यह व्यवसाय छोड़कर बिहार लौटना पड़ा.

बाद में उन्होंने मुंबई का रुख किया और फिल्म निर्माण व वितरण के क्षेत्र में काम शुरू किया.

रवि किशन की पहली मुख्य भूमिका वाली फिल्म के निर्माता रहे

उमेश कुमार ने बंगाली फिल्मों 'प्रतिहिंसा' और 'प्रेम शक्ति' सहित तीन फिल्मों का निर्माण किया. उन्होंने भोजपुरी फिल्म 'सैंया हमार' का भी निर्माण किया, जिसमें वर्तमान सांसद और अभिनेता रवि किशन पहली बार मुख्य भूमिका में नजर आए.

उन्होंने बताया कि उस समय बिहार के अधिकांश सिनेमाघरों में फिल्मों की आपूर्ति भी उनके माध्यम से होती थी.

कारोबार में नुकसान, फिर बदला रास्ता

वर्ष 2001 के बाद फिल्म कारोबार में आई मंदी से उन्हें करीब दो करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. इसके बाद वर्ष 2005 में उन्होंने घोड़ासहन में अंबिका पैलेस सिनेमा हॉल का निर्माण कराया, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली.

साल 2006 में वे दिल्ली चले गए और गारमेंट उद्योग से जुड़ गए. गुरुग्राम की एक कंपनी में काम करते हुए उन्होंने इस क्षेत्र की तकनीक और संचालन की बारीकियां सीखीं.

इसके बाद उन्होंने दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज, दिल्ली मेट्रो और लखनऊ मेट्रो जैसी निर्माण परियोजनाओं में भी करीब आठ वर्षों तक कार्य किया.

कोरोना के बाद गांव लौटकर शुरू किया उद्योग

दूसरी कोरोना लहर के दौरान वर्ष 2021 में परिवार के साथ घोड़ासहन लौटने के बाद उन्होंने स्थानीय स्तर पर उद्योग स्थापित करने का निर्णय लिया.

उमेश कुमार के अनुसार, वर्ष 2022 में यह परियोजना उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जाने वाली थी, लेकिन तत्कालीन उद्योग मंत्री शाहनवाज हुसैन और तत्कालीन प्रधान सचिव संदीप पौंडरीक के सहयोग व आश्वासन के बाद उन्होंने घोड़ासहन में ही फैक्ट्री लगाने का फैसला किया.

420 लोगों को मिला रोजगार, अधिकांश स्थानीय महिलाएं

वर्तमान में फैक्ट्री में करीब 420 लोग कार्यरत हैं, जिनमें 250 महिलाएं और 170 पुरुष शामिल हैं. अगले दो महीनों में लगभग 400 और लोगों को रोजगार देने की योजना है.

उमेश कुमार ने बताया कि फैक्ट्री के लगभग 90 प्रतिशत कर्मचारी पूर्वी चंपारण, विशेषकर घोड़ासहन प्रखंड के हैं. इनमें बड़ी संख्या आसपास के गांवों की महिलाओं की है.

उन्होंने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना उनकी प्राथमिकता है और इसके लिए फैक्ट्री में सुरक्षित कार्य वातावरण व आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं.

आधुनिक मशीनों से तैयार हो रहे परिधान

फैक्ट्री में पुरुषों के लिए 'जिम जैक' और महिलाओं के लिए 'नुस्करा' ब्रांड के परिधान तैयार किए जा रहे हैं. उत्पादन के लिए जापान और चीन की आधुनिक मशीनों का उपयोग किया जा रहा है.

उमेश कुमार ने बताया कि कंपनी के निदेशक उनके छोटे पुत्र आदर्श कुमार हैं, जिन्होंने उद्योग शुरू करने से पहले एक वर्ष का प्रशिक्षण लिया. दोनों ब्रांडों के नाम उनके पुत्रों आकाश जीमी और आदर्श जैकी से प्रेरित हैं.

दशहरा पर उद्घाटन की तैयारी

उमेश कुमार ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल उद्योग स्थापित करना नहीं, बल्कि स्थानीय युवाओं का पलायन रोककर उन्हें घर के पास सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराना है.

उन्होंने बताया कि दशहरा के अवसर पर फैक्ट्री के औपचारिक उद्घाटन की तैयारी की जा रही है और इसके लिए मुख्यमंत्री को आमंत्रित करने की योजना है.


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