जिस पिपराकोठी से अंग्रेजों ने किसानों पर जुल्म बरसाये, वह कब कृषि धाम बना गया : राधामोहन

Updated at : 09 Mar 2025 7:06 PM (IST)
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जिस पिपराकोठी से अंग्रेजों ने किसानों पर जुल्म बरसाये, वह कब कृषि धाम बना गया : राधामोहन

जिस पिपराकोठी से अंग्रेजों ने किसानों पर जुल्म बरसाते थे आज वही पिपराकोठी किसानों का कृषि धाम बना हुआ है.

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कोटवा . जिस पिपराकोठी से अंग्रेजों ने किसानों पर जुल्म बरसाते थे आज वही पिपराकोठी किसानों का कृषि धाम बना हुआ है. आज देश भर के वैज्ञानिक आज यहां आ रहे हैं. उक्त बातें चंपारण सत्याग्रह महोत्सव कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री सह स्थानीय सांसद राधामोहन ने कहा. उन्होंने कहा कि देश की आजादी का सूत्रधार हमारे पुरखो की बलिदान की देन है. यहां के किसानों ने महात्मा गांधी को चंपारण में आने के लिए प्रेरित किया. महात्मा गांधी के नेतृत्व में किसानों के साथ सत्याग्रह की शुरुआत हुई और अंग्रेजों को झुकना पड़ा. देश की आजादी की नींव चंपारण से रखी गई. गांधी जी चिंता थी कि जबतक चंपारण के लोग शिक्षित नहीं होंगे तब तक देश की आजादी नहीं मिलेगी. महात्मा गांधी का सपना चम्पारण के लोगो को स्वच्छता,शिक्षा स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना उनका मूल्य उद्देश्य बन गया. जिसको लेकर चंपारण में कई विद्यालय खोले गए. आजादी के सो वर्ष 2047 तक जबतक सुनहरे चंपारण का निर्माण नहीं होगा. यह चंपारण ही देश को रास्ता दिखाने का काम करेगा. अप्रैल से महात्मा गांधी सेंट्रल इनवर्सिटी का भवन निर्माण शुरू हो जाएगा.

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