सऊदी अरब में फंसे बिहार के दो दर्जन से अधिक मजदूर, आठ महीने से नहीं मिल रहा वेतन और खाना

Published by : Abhinandan Pandey Updated At : 20 May 2025 8:18 AM

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सऊदी में फंसे मजदूरों की तस्वीर

Bihar News: सऊदी अरब में फंसे बिहार के दो दर्जन से अधिक भारतीय मजदूर बीते आठ महीनों से बिना वेतन और बदतर हालात में जिंदगी गुजार रहे हैं. परिजन सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि उन्हें जल्द से जल्द सुरक्षित भारत वापस लाया जाए.

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Bihar News: सऊदी अरब के यानबू शहर में स्थित एक निजी कंपनी में काम कर रहे बिहार और उत्तर प्रदेश के 300 से अधिक भारतीय मजदूरों की जिंदगी इन दिनों संकट में है. इनमें गोपालगंज जिले के मांझा प्रखंड के कविलाशपुर गांव निवासी इम्तेयाज आलम के बेटे शाह आलम भी शामिल हैं, जो बीते आठ महीनों से वेतन न मिलने और अमानवीय हालात में रहने को मजबूर हैं.

उनके परिवार का कहना है कि वह पांच साल पहले रोज़गार की तलाश में सऊदी गया था. वहां जाकर कुछ पैसे जोड़े और गांव में मकान बनवाया. लेकिन कर्ज चुकाने और शादी की तैयारियों के लिए उसे और पैसे कमाने थे, इसलिए वह घर नहीं लौट सका. अब जब आठ महीने से वेतन बंद है और कंपनी छुट्टी तक नहीं दे रही, तो उसकी शादी भी टल गई है.

मजदूर वीडियो के जरिए सरकार से लगा रहे गुहार

शाह आलम और वहां फंसे मजदूरों ने वीडियो के ज़रिए भारत सरकार से मदद की अपील की है. उसने बताया कि न सिर्फ वेतन रोका गया है, बल्कि कंपनी अच्छा खाना भी नहीं दे रही. मजदूर चावल-दाल खाकर किसी तरह गुजर-बसर कर रहे हैं. एंबेसी से भी संपर्क किया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस मदद नहीं मिली.

परिवार की हालत बद से बदतर

शाह के पिता इम्तेयाज आलम और मां शायदा खातून का कहना है कि उनका बेटा ही घर का एकमात्र कमाने वाला है. मां ने रोते हुए कहा, “पांच साल से बेटा विदेश में है. सोचा था ईद बाद उसकी शादी कराएंगे. लेकिन अब तो शादी भी कैंसिल हो गई. सरकार से हाथ जोड़कर मांग कर रही हूं कि मेरे बेटे को सुरक्षित वापस लाया जाए.”

दूसरे मजदूर भी संकट में

शाह आलम की ही तरह जिले के अन्य कई मजदूर भी फंसे हुए हैं. इनमें फतेहपुर के दिलीप चौहान, दहीभत्ता के शलेश कुमार, गढ़ धमापाकड़ के बैजनाथ साह, बालेपुर बथुआ के ओमप्रकाश, एकडंगा भगवानपुर के बलिंदर सिंह और राजेंद्र नगर के शैलेश चौहान आदि शामिल हैं.

श्रम विभाग ने की पुष्टि

इस पूरे मामले पर श्रम अधीक्षक सुबोध कुमार ने जानकारी दी कि सभी फंसे मजदूरों के नियोजक की पहचान कर ली गई है. विभागीय स्तर पर प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है, ताकि उन्हें जल्द से जल्द भारत वापस लाया जा सके.

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अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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