बिहार में बनेगा बिस्कोमान जैसा मार्केटिंग फेडरेशन, बाजार से जुड़ेंगे किसान

सांकेतिक तस्वीर
Bihar News: बिहार सरकार सहकारी समितियों के उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग को मजबूत करने के लिए नया राज्य स्तरीय मार्केटिंग फेडरेशन बनाने की तैयारी कर रही है. सहकारिता विभाग ने इसकी कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया है और जल्द ही इसे अंतिम रूप दिया जाएगा. इस पहल का उद्देश्य किसानों को बिचौलियों से मुक्ति दिलाकर सीधे बाजार से जोड़ना है.
Bihar News: बिहार के किसानों और पैक्स (PAX) समितियों के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार एक बड़ा क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है. झारखंड अलग होने के बाद बिस्कोमान पर राज्य का सीधा नियंत्रण नहीं रहने के कारण अब बिहार सरकार खुद का ‘नया मार्केटिंग फेडरेशन’ बनाने की तैयारी में है.
यह फेडरेशन न केवल किसानों को बिचौलियों के चंगुल से छुड़ाएगा, बल्कि बिहार के कृषि उत्पादों को एक ग्लोबल ब्रांड के रूप में नई पहचान भी दिलाएगा. सहकारिता विभाग ने इसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है, जिससे अब खाद और उन्नत बीजों के लिए किसानों को लंबी कतारों में नहीं लगना पड़ेगा.
बिस्कोमान मॉडल पर बनेगा नया ढांचा
सरकार इस फेडरेशन को बिस्कोमान की तर्ज पर विकसित करना चाहती है. झारखंड अलग राज्य बनने के बाद बिस्कोमान बहुराज्यीय संस्था बन चुका है, जिस पर राज्य सरकार का सीधा नियंत्रण नहीं है.
इसी वजह से राज्य के भीतर नया विपणन तंत्र विकसित करने का निर्णय लिया गया है. इसके तहत प्रमंडलीय स्तर पर भी सहकारी संघ गठित किए जाएंगे, जिससे ग्रामीण स्तर तक नेटवर्क मजबूत हो सके.
किसानों को मिलेगा सीधा बाजार और सही दाम
नए फेडरेशन के जरिए किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए कंपनियों या बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. उन्हें बाजार भाव की सही जानकारी मिलेगी और भंडारण, पैकेजिंग तथा बिक्री की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. इससे सीमांत किसानों को सबसे ज्यादा फायदा होने की उम्मीद है, जो अभी मजबूरी में कम कीमत पर फसल बेच देते हैं.
फेडरेशन सिर्फ कृषि उत्पादों की बिक्री ही नहीं करेगा, बल्कि किसानों को समय पर उर्वरक और स्थानीय जलवायु के अनुकूल बीज भी उपलब्ध कराएगा. अभी राज्य में खाद वितरण के लिए लंबी कतारें लगती हैं, लेकिन नई व्यवस्था से यह प्रक्रिया आसान हो सकती है. साथ ही बिहार के कृषि उत्पादों को अपनी पहचान दिलाने के लिए ब्रांडिंग और निर्यात गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा.
राज्य की कृषि पहचान को मिलेगा नया मंच
कृषि प्रधान राज्य होने के कारण बिहार से बड़ी मात्रा में कृषि उत्पाद बाहर भेजे जाते हैं, लेकिन अपनी ब्रांडिंग के अभाव में उन्हें पहचान नहीं मिल पाती.
नया फेडरेशन इस कमी को दूर करने की कोशिश करेगा. सहकारिता विभाग, जिसका मुख्यालय राजधानी पटना में है, इस योजना को जल्द लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है. यह कदम राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है और किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगा.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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