'शर्लक होम्स' दादा: पोती के आंसू देख खुद बने 'जासूस',फिल्मी अंदाज में चोर को दबोचकर लाडली को दिया ये खास तोहफा

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साइकिल रिलीज होने के बाद थाने पर खुशी जाहिर करते दादा

साइकिल रिलीज होने के बाद थाने पर खुशी जाहिर करते दादा

एक दादा ने अपनी पोती की चोरी हुई साइकिल वापस पाने के लिए जासूसी का जुनून दिखाया। पुलिस द्वारा अनदेखे किए गए मामले को उन्होंने खुद सुलझाया, चोर को पकड़ा और अपनी लाडली को साइकिल लौटाकर खुशी मनाई।

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Grandfather Granddaughter Bond: दादा-पोती का रिश्ता दुनिया में सबसे अनमोल और पवित्र माना जाता है. जब बात पोती की खुशी की हो, तो एक दादा उसकी खातिर किसी भी हद तक जा सकता है. मुजफ्फरपुर के सदर थाना क्षेत्र के गोकुलनगर मझौलिया के रहने वाले बुजुर्ग जितेंद्र पांडेय ने इस बात को पूरी तरह सच कर दिखाया है. अपनी लाडली पोती की चोरी हुई साइकिल को ढूंढने के लिए उन्होंने जो अदम्य हौसला और जासूसी जज्बा दिखाया, उसकी चर्चा आज पूरे शहर की जुबान पर है. पुलिस जिस मामले को मामूली समझकर फाइलों में दबा चुकी थी, उसे इस जांबाज बुजुर्ग ने अपनी सूझबूझ और दृढ़ संकल्प से मुकाम तक पहुंचा दिया. शनिवार को जब कोर्ट के आदेश पर सदर थाने में उन्हें वह साइकिल वापस मिली, तो उनके चेहरे पर पोती की मुस्कान वापस लौटने की खुशी साफ दिख रही थी. उन्होंने इस पल को यादगार बनाने के लिए थाने में ही साइकिल के साथ अपनी पहली सेल्फी भी ली.

जब पोती की उड़ी मुस्कान, तो दादा की आंखों से गायब हो गई नींद

घटना की शुरुआत तब हुई जब गोकुलनगर वार्ड नंबर-06 निवासी जितेंद्र पांडेय के घर के बरामदे से उनकी पोती की सबसे पसंदीदा साइकिल अचानक चोरी हो गयी. पोती को रोता देख दादा का दिल पसीज गया. उन्होंने तुरंत सदर थाने में अज्ञात चोर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी. लेकिन पुलिस ने इसे एक आम और मामूली केस समझा और जांच करना तो दूर, इस फाइल को पूरी तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया.

खुद संभाली जांच की कमान, सीसीटीवी फुटेज से ढूंढ़ा पहला सुराग

पुलिस के सुस्त और उदासीन रवैये को देखकर जितेंद्र पांडेय ने हार नहीं मानी. उन्होंने खुद ही अपने स्तर पर अनुसंधान यानी जांच की कमान संभाल ली. उन्होंने घर और आसपास के पूरे इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने शुरू किए. घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार उन्हें एक फुटेज में एक शातिर चोर उनकी पोती की साइकिल को चुपके से ले जाते हुए साफ दिख गया. यहां से उन्हें चोर का हुलिया मिल गया.

चोर को साइकिल बनवाते रंगे हाथ दबोचा, फिर शुरू हुई कानूनी जंग

लगातार कई दिनों तक शहर की खाक छानने के बाद, करीब 15 दिन पहले भगवानपुर चौक के पास एक साइकिल मरम्मत की दुकान पर उन्हें एक शख्स हूबहू वही साइकिल बनवाते दिखा. जितेंद्र पांडेय ने तुरंत साइकिल पहचान ली और बहादुरी दिखाते हुए चोर को मौके पर ही दबोच लिया. इसके बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया. चोर पकड़े जाने के बाद भी दादा की चुनौती खत्म नहीं हुई थी. कानूनन साइकिल वापस पाने के लिए उन्होंने लगातार 15 दिनों तक कोर्ट के चक्कर काटे और आखिरकार शनिवार को अदालत से साइकिल रिलीज कराने का आदेश हासिल कर अपनी जीत पूरी की.

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Premanshu Shekhar

लेखक के बारे में

By Premanshu Shekhar

I have 16 years of journalism experience, working as a Bureau Chief at Prabhat Khabar muzaffarpur. My writing focuses on crime,political, social, and current topics.I have experience covering assembly and parliamentary elections reporting.

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