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मधुबनी में कारगर नहीं हुआ आक्सीजन जनरेशन प्लांट की मॉकड्रिल, कहीं प्योरिटी लेवल में कमी तो कहीं डिस्प्ले खराब

आक्सीजन जनरेशन प्लांट का संचालन 24×7 के तहत नहीं हो पा रहा है. इसके करण ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट लगने के बावजूद भी अस्पतालों में मरीजों को आक्सीजन आपूर्ति के लिए सिलेंडर पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है. ऐसे में आक्सीजन जेनरेशन प्लांट का माॅकड्रिल महज दिखावा ही है.

मधुबनी. विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में लगाये गये आक्सीजन जनरेशन प्लांट की पांचवीं मॉक ड्रिल शुक्रवार को की गयी. पर इसमें महकमा की कमी सामने नजर आयी. हालात यह रहा कि सदर अस्पताल छोड़कर स्वास्थ्य संस्थानों में लगाया गया आक्सीजन जेनरेशन प्लांट में माॅकड्रिल कारगर नहीं हो सकी.

डिस्प्ले शो नहीं हो सका

अनुमंडलीय अस्पताल झंझारपुर एवं अररिया संग्राम स्थित ट्रामा सेंटर स्थित आक्सीजन जनरेशन प्लांट में डिस्प्ले शो नहीं करने की समस्या रही, तो अनुमंडलीय अस्पताल जयनगर एवं फुलपरास स्थित आक्सीजन जनरेशन प्लांट में प्योरिटी लेवल ही शो नहीं हुआ. बता दें कि परिवार कल्याण स्वास्थ्य मंत्रालय के उपसचिव ने सदर अस्पताल सहित जिले में पांच स्वास्थ्य संस्थानों में लगाये गये ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए माॅकड्रिल से संबंधित सभी आवश्यक तैयारी करने का निर्देश राज्य स्वास्थ्य समिति को दिया था. उप सचिव के निर्देश के आलोक में राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा इस आशय का पत्र सिविल सर्जन को दिया गया था. ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में बिना किसी व्यवधान के स्वास्थ्य संस्थानों में भर्ती मरीजों को आक्सीजन की आपूर्ति बेड पर हो सके.

2021 में लगा था प्लांट

कोरोना महामारी के समय सदर अस्पताल सहित जिले के 5 स्वास्थ्य संस्थानों में वर्ष 2021 में आक्सीजन जनरेशन प्लांट लगाया गया था. ताकि कोरोना से प्रभावित मरीजों के अलावा अस्पताल में भर्ती मरीजों को आक्सीजन की आपूर्ति निर्वाध रुप से हो सके. पर, सदर अस्पताल को छोड़कर अन्य किसी भी स्वास्थ्य संस्थानों में टेक्नीशियन पदस्थापित नहीं होने के कारण आक्सीजन जनरेशन प्लांट का संचालन 24×7 के तहत नहीं हो पा रहा है. इसके करण ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट लगने के बावजूद भी अस्पतालों में मरीजों को आक्सीजन आपूर्ति के लिए सिलेंडर पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है. ऐसे में आक्सीजन जेनरेशन प्लांट का माॅकड्रिल महज दिखावा ही है.

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एक टेक्नीशियन पदस्थापित

जानकारी के अनुसार सदर अस्पताल सहित पांच स्वास्थ्य संस्थानों में ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट लगाया गया है. लेकिन टेक्नीशियन केवल एक है. वह भी सदर अस्पताल के लिए. सदर अस्पताल स्थित पीएम केयर फंड द्वारा अधिष्ठापित 1000 एलपीएम ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट में महज एक टेक्नीशियन पदस्थापित है. इसके कारण ऑक्सीजन प्लांट का संचालन एक शिफ्ट में ही हो पता है. इसके कारण एसएनसीयू में भर्ती नवजात शिशुओं को भी जंबो सिलेंडर से ही आक्सीजन की आपूर्ति की जाती है. इसके लिए अस्पताल प्रबंधन द्वारा प्रतिमाह 1 लाख रुपए से अधिक राशि का भुगतान संबंधित एजेंसी को किया जाता है.

इन जगहों पर लगी है ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट

सदर अस्पताल सहित अनुमंडलीय अस्पताल जयनगर, फुलपरास, झंझारपुर एवं अररिया संग्राम स्थित ट्रामा सेंटर में पीएसए ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट लगायी गयी है. सदर अस्पताल के अलावा अनुमंडलीय अस्पताल जयनगर में पीएम केयर फंड द्वारा 500 एलपीएम क्षमता वाले ऑक्सीजन प्लांट लगायी गयी है. इसके अलावा अनुमंडलीय अस्पताल फुलपरास में डॉक्टर फॉर यू संस्था द्वारा 500 एलपीएम, अनुमंडलीय अस्पताल झंझारपुर में मिथिला सहकारी दुग्ध समिति द्वारा 400 एलपीएम एवं अररिया संग्राम स्थित ट्रामा सेंटर में मेघा इंटरप्राइजेज द्वारा 300 एलपीएम क्षमता वाला ऑक्सीजन प्लांट लगायी गयी है. विदित हो कि पीएसए प्लांट अस्पताल में ऑक्सीजन की उत्पादन एवं आपूर्ति को सुदृढ़ करने के लिए स्थापित की गयी है. इसका सतत क्रियाशील रहना आवश्यक है. लेकिन सरकार द्वारा अभी तक कहीं भी टेक्नीशियन को प्रतिस्थापित नहीं किया गया है.

क्या कहते हैं सीएस

सिविल सर्जन ने कहा किसी भी गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है. सदर अस्पताल के सभी बेड पर पाइपलाइन के माध्यम से ऑक्सीजन सप्लाई के लिए जोड़ा गया है. पीएम केयर द्वारा सदर अस्पताल में पीएसए ऑक्सीजन प्लांट 1000 एलपीएम ऑक्सीजन उत्पन्न करती है.

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