Mann ki Baat: दिल्ली में करता था मजदूरी, लॉकडाउन में बिहार लौटा तो अपनाया ये काम, आज 'मन की बात' में PM Modi ने की तारीफ

Mann ki Baat: Mann ki Baat: कहते हैं हाथ में हुनर और कुछ कर दिखाने का जज्बा है तो कुछ भी नामुमकिन नहीं है. दिल्ली (Delhi) के एक बल्ब फैक्ट्री में काम करने वाले प्रमोद ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. प्रमोद के कारनामे से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) भी प्रभावित हैं. मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने की बिहार के इस होनहार की तारीफ की. प्रभात खबर (Prabhat Khabar) ने प्रमोद के काम की खबर 30 जनवरी को प्रकाशित की थी.
Mann ki Baat: कहते हैं हाथ में हुनर और कुछ कर दिखाने का जज्बा है तो कुछ भी नामुमकिन नहीं है. दिल्ली (Delhi) के एक बल्ब फैक्ट्री में काम करने वाले प्रमोद ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. प्रमोद के कारनामे से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) भी प्रभावित हैं. पीएम मोदी (PM Modi) ने आज अपने मन की बात (Mann ki Baat) कार्यक्रम की बिहार के इस होनहार की तारीफ की. प्रभात खबर (Prabhat Khabar) ने प्रमोद के काम की खबर 30 जनवरी को प्रकाशित की थी.
मन की बात में प्रधानमंत्री ने कहा कि मीडिया के जरिए ही उन्हें इसकी जानकारी मिली कि वो दिल्ली की फैक्ट्री में बतौर टेक्नीशियन काम करते थे. लेकिन लॉकडाउन के दौरान घर गए और वहां खुद एलईडी बल्व बनाने की फैक्ट्री शुरू कर दी और कुछ ही वक्त में फैक्ट्री वर्कर से फैक्ट्री ऑनर तक का सफर तय कर लिया.
लॉकडाउन में दिल्ली से बिहार लौटे प्रमोद बैठा की आज हर ओर चर्चा है. पश्चिम चंपारण जिले मझौलिया प्रखंड के रतनमाला पंचायत के रहने वाले युवा प्रमोद बैठा मजदूर से अब उद्यमी बन गया है. इतना ही नहीं प्रमोद ने गांव के दर्जनभर युवाओं को रोजगार भी दिया है.
प्रमोद ने बताया कि वह दिल्ली में एलइडी बल्ब फैक्ट्री में बतौर टेक्नीशियन काम करता था. बिहार में हर घर बिजली लगने के बाद एलइडी बल्ब की खपत को देखते हुए उन्होंने अपने घर पर ही कारखाना बैठाने का प्रोग्राम बनाया और दिल्ली से घर आकर इस काम में लग गया. शुरुआती दौर में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन धीरे धीरे सफलता मिली.
प्रमोद बताते हैं कि जब उन्हें करखाना बैठाना था तो पैसे की कमी आड़े आयी, लेकिन दिल्ली से कमाये हुए कुछ पैसे और सगे संबंधियों एवं मित्रों से उधार पैसे लेकर पूंजी तैयार किया और बल्ब का उत्पादन शुरू किया. फिलहाल प्रतिदिन 1000 बल्ब का उत्पादन करते हैं. घर पर ही कारखाना बैठाने से गांव के दर्जनों युवकों को रोजगार मिला है. प्रमोद की माने तो एक बल्ब बनाने में करीब 13 रुपये की लागत आती है. जिसे वह 15 रुपये में दुकानों पर बेचते हैं. फुटकर में बल्ब की कीमत 20 से 25 रुपये है.
प्रमोद का कहना है कि पूंजी के अभाव में अभी वह महज एक हजार बल्ब ही रोजाना बना पाते हैं. इससे बाजार का ऑर्डर पूरा नहीं हो पाता है. उनके हिसाब से कम से कम 5000 प्रतिदिन उत्पादन हो तब जाकर बाजार का ऑर्डर पूरा हो पाएगा. प्रमोद ने बताया कि अभी पूर्वी एवं पश्चिमी चंपारण दोनों जिलों में दुकानों पर बल्ब की सप्लाई करते हैं. इतना ही नहीं अपने किए हुए कारोबार का जीएसटी भी प्रतिमाह भरते हैं. प्रमोद को सरकारी मदद की आशा है. ताकि वह बल्ब उत्पादन के क्षेत्र में और बेहतर कर सके.
प्रभात खबर से बात करते हुए युवा उद्यमी प्रमोद बैठा ने कहा, हमारे जिले के मौजूदा जिला पदाधिकारी का ध्यान रोजगार सृजन पर है. नवप्रवर्तन योजना के तहत नये-नये उद्योग लगाने पर वह जोर दे रहे हैं. मुझे पूर्ण विश्वास है कि जिला पदाधिकारी के संज्ञान में आते ही मुझे भी सरकारी मदद मिलेगी. ताकि इस कारोबार को और बढ़ा सके. टेक्सटाइल, हैंडलूम के साथ-साथ बल्ब निर्माण के क्षेत्र में ही पश्चिम चंपारण हब बन सके.
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