महावीर मंदिर : हनुमानगढ़ी के संतों ने महेंद्र दास को बनाया महंत, कुणाल बोले- फैलाया जा रहा भ्रम

Updated at : 19 Aug 2021 10:57 AM (IST)
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महावीर मंदिर : हनुमानगढ़ी के संतों ने महेंद्र दास को बनाया महंत, कुणाल बोले- फैलाया जा रहा भ्रम

पटना के महावीर मंदिर को लेकर विवाद जारी है. बुधवार को अयोध्या के हनुमानगढ़ी मंदिर के गद्दीनशीन प्रेमदास महाराज ने महेंद्र दास को पटना के महावीर मंदिर का महंत नियुक्त कर दिया. महेंद्र दास हनुमानगढ़ी से जुड़े हैं. प्रेमदास महाराज ने बुधवार को संवाददाता सम्मेलन बुलाकर इसकी घोषणा की.

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पटना. पटना के महावीर मंदिर को लेकर विवाद जारी है. बुधवार को अयोध्या के हनुमानगढ़ी मंदिर के गद्दीनशीन प्रेमदास महाराज ने महेंद्र दास को पटना के महावीर मंदिर का महंत नियुक्त कर दिया. महेंद्र दास हनुमानगढ़ी से जुड़े हैं. प्रेमदास महाराज ने बुधवार को संवाददाता सम्मेलन बुलाकर इसकी घोषणा की.

उधर, महावीर स्थान न्यास समिति के सचिव आचार्य किशोर कुणाल ने कहा कि कुछ समाचार माध्यमों से उन्हें जानकारी मिली है कि हनुमान गढ़ी के गद्दीनशीन महंत ने अयोध्या में रामानंदी निर्वाणी अखाड़ा के पंचों की कथित रूप से बैठक कर किसी व्यक्ति को महावीर मन्दिर का महंत घोषित कर दिया है.

ये गतिविधियां पूरी तरह से निराधार और भ्रम फैलाने के उद्देश्य से की गयी प्रतीत हो रही हैं. उन्होंने कहा कि महावीर मंदिर, पटना में न तो कोई महंत होते हैं और न ही अयोध्या स्थित हनुमान गढ़ी से इस मन्दिर के प्रबंधन का कोई आधिकारिक संबंध है.

आवेदन पर कोई सुनवाई ही नहीं हुई

आचार्य किशोर कुणाल ने कहा कि हनुमान गढ़ी के गद्दीनशीन महंत की इस गतिविधि का इतना ही महत्व है जैसे कि महावीर मन्दिर में किसी साधु को बैठा कर हनुमान गढ़ी का गद्दीनशीन महंत घोषित कर दिया जाए. अभी तो हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन महंत की ओर से बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड में दिये गये आवेदन पर कोई सुनवाई ही नहीं हुई है. यदि बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड या किसी सक्षम न्यायालय द्वारा कोई आदेश पारित होता है तो और बात है.

हनुमानगढ़ी के पास कोई दस्तावेज नहीं : आचार्य कुणाल

आचार्य किशोर कुणाल ने बताया कि महावीर मंदिर पटना के प्रबंधन और संचालन के लिए महावीर स्थान न्यास समिति वैध रूप में कार्यरत है. हनुमानगढ़ी के पास कोई ऐसा दस्तावेज नहीं है, जिससे उनका अधिकार बनता है. उन्होंने बताया कि 1948 के पटना हाइकोर्ट के फैसले में महावीर मंदिर का पूरा इतिहास लिखा हुआ है. इसमें कहीं भी हनुमानगढ़ी की चर्चा नहीं है.

1987 में जब धार्मिक न्यास बोर्ड द्वारा महावीर मंदिर के संचालन के लिए स्कीम बनी, उसमें कहीं भी हनुमानगढ़ी या महंती की चर्चा नहीं है. उस स्कीम के खिलाफ गोपाल दास जी पटना हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट गये. दोनों शीर्ष अदालतों से वर्तमान ट्रस्ट की सम्पुष्टि हुई और उसी के अनुसार ट्रस्ट काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन प्रेम दास सुप्रीम कोर्ट के ऊपर नहीं हैं और न ही उनके बयान से हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलट सकता है.

कौन हैं महेंद्र दास

प्रेमदास के अनुसार बाबा महेंद्र दास पहले महावीर मंदिर के महंत रह चुके हैं. प्रेमदास का दावा है कि उन्हें हनुमानगढ़ी के पंचों ने महावीर मंदिर का महंत बनाया है. वे अब वहां की देखरेख करेंगे. अखाड़े की परंपरा के अनुसार, प्रधान पुजारी सूर्यवंशी महाराज जिन्हें किशोर कुणाल ने हटा दिया था, उन्हें फिर वहीं बैठया गया है.

हनुमानगढ़ी की आय सार्वजनिक करने की कुणाल ने की थी मांग

मालूम हो कि आचार्य कुणाल ने पहले ही बताया था कि महावीर मंदिर में जब हनुमानगढ़ी के पुजारी थे, तब अधिकतम आय 11,000 रुपये सालाना थी. अभी आय 18 करोड़ रुपये है. करीब 150 करोड़ रुपये का बजट बोर्ड को प्रस्तुत किया जाता है. प्रतिवर्ष मंदिर के आय-व्यय को अखबारों के माध्यम से सार्वजनिक किया जाता है.

पिछले 10 साल में करीब 5 करोड़ रुपये बोर्ड को शुल्क के रूप में दिया जा चुका है. आचार्य कुणाल ने कहा था कि हनुमानगढ़ी भी क्या अपना आय-व्यय सार्वजनिक करती है. उन्होंने गद्दीनशीन से अनुरोध किया था कि पिछले 10 वर्षों का आय-व्यय सार्वजनिक करें.

Posted by Ashish Jha

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