Madhubani : आर्म्स एक्ट में एक को तीन वर्ष कारावास, तीन हजार जुर्माना

Updated at : 05 Jan 2026 10:35 PM (IST)
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Madhubani : आर्म्स एक्ट में एक को तीन वर्ष कारावास, तीन हजार जुर्माना

आर्म्स एक्ट मामले को लेकर अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी तेज कुमार प्रसाद के न्यायालय में सोमवार को सुनवाई हुई.

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राजनगर थाना क्षेत्र का मामला एसीजेएम प्रथम न्यायालय ने सुनायी सजा मधुबनी . आर्म्स एक्ट मामले को लेकर अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी तेज कुमार प्रसाद के न्यायालय में सोमवार को सुनवाई हुई. न्यायालय ने दोनों पक्ष के बहस सुनने के बाद आरोपी राजनगर थाना क्षेत्र के चिचरी बुजुर्ग निवासी आदित्य मिश्र को आर्म्स एक्ट के दफा25(1-बी)में दोषी पाते हुए तीन वर्ष कारावास की सजा सुनायी है . साथ ही न्यायालय ने आरोपी पर तीन हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है . सरकार की ओर से सहायक अभियोजन पदाधिकारी नीरज कुमार ने बहस करते हुए अधिक से अधिक सजा देने की मांग की थी . वहीं बचाव पक्ष से अधिवक्ता दिनेश्वर झा ने बहस करते हुए कम से कम सजा की मांग की थी . क्या है मामला अभियोजन के अनुसार घटना चार अक्टूबर 2018 की है . राजनगर थाना पुलिस को सूचना मिली कि राजनगर स्थित गंज हटिया पर आरोपी हथियार चमका रहा है . सूचना पर जब थानाध्यक्ष रुपक रंजन सिंह हटिया पर पहुंचा. जहाँ पुलिस को देखते ही आरोपी भागने लगा. पुलिस ने खदेड़ कर आरोपी को पकड़ा था. वहीं तलाशी के दौरान आरोपी के कमर से एक लोडेड देशी पिस्टल जिसके मैंगजीन में तीन जिंदा गोली एवं एक गोली लोड के साथ आरोपी के पैंट के दायें पैकेट से दो जिंदा कारतूस बरामद हुई थी. मामले को लेकर थानाध्यक्ष के आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी . न्यायालय में एक माह में दाखिल हुआ था आरोप पत्र अभियोजन के अनुसार मामले को लेकर 4 अक्टूबर 2018 को प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अनुसंधान कर्ता ने पूरे मामले का अनुसंधान कर एक माह के बाद 17 नवंबर 2018 को आरोपी के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया. इसके बाद न्यायालय में संज्ञान के बाद 2 अगस्त 2019 को आरोपी के विरुद्ध आर्म्स एक्ट में आरोप गठन किया गया. इसके बाद अभियोजन पदाधिकारी ने पांच गवाहों को बिचारण के दौरान साक्ष्य के लिए न्यायालय में उपस्थित किया. सभी साक्षियों ने घटना का समर्थन किया था. न्यायालय ने अभियोजन पदाधिकारी के पेश किए गए सभी साक्षी व दस्तावेज के बाद आरोपी को दोषी मानते हुए सजा सुनाई .

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