Madhubani News. याद आये गुजरे जमाने के शहनाई, कलाकार व लोक नाटक की दुनिया
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 20 Dec 2024 10:21 PM
कला संस्कृति एवं युवा विभाग द्वारा मिथिला चित्रकला संस्थान सौराठ के सांस्कृतिक कैलेंडर में राजा सल्हेस विशेषांक को इस साल के लिये शामिल किया गया है.
Madhubani News. मधुबनी. विलुप्त हो रहे लोक कला, लोक संस्कृति को फिर से जीवित करने एवं कलाकारों को नयी पहचान दिलाने के दिशा में प्रशासनिक स्तर पर पहल किया जा रहा है. इस दिशा में कला संस्कृति एवं युवा विभाग द्वारा मिथिला चित्रकला संस्थान सौराठ के सांस्कृतिक कैलेंडर में राजा सल्हेस विशेषांक को इस साल के लिये शामिल किया गया है. जिसके बाद राजा सल्हेस से जुड़े कला, लोग गाथा, लोक नाटक का मंचन एवं विलुप्त हो रहे वादन को सामने लाने का कार्यक्रम आयेाजित किया जा रहा है. शुक्रवार को मिथिला चित्रकला संस्थान सौराठ में लोक देवी देवता उत्सव में राजा सल्हेश विशेषांक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इसमें प्रथम सत्र में लोक देवी देवता परिचर्चा का आयोजन किया गया. फिर लोकगाथा, लोक नाटक का प्रस्तुतिकरण किया गया. इस दौरान शहनाइ, ढोल, सल्हेस से संबंधित गीत, वाद्य यंत्र प्रस्तुत किया गया. कई कलाकार हुए शामिल इस दौरान एक साथ तीन तीन पद्मश्री बौआ देवी, दुलारी देवी, सीवन पासवान, रानी झा सहित मधुबनी पेंटिंग के कई कलाकार शामिल हुए. वहीं प्रधानाचार्य डाॅ फुलो पासवान, डाॅ महेंद्र नारायण राम, गणेश पासवान की टीम, खुटौना के मोहन चौपाल की टीम सहित जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सह मिथिला चित्रकला संस्थान सौराठ के प्रसाशी पदाधिकारी नीतीश कुमार सहित अन्य लोग शामिल थे. याद आ गये गुजरे दिन लोक देवी देवता उत्सव में राजा सल्हेश विशेषांक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान लोक नाटक का प्रस्तुतिकरण किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत होते ही पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा. शहनाई, लोक गीत, आकर्षक रंग बिरंगे परिधान में मंच पर आये कलाकारों को देखते ही लोगों को पुराने जमाने में गांव कस्बों में गूंजने वाली इन परंपरागत वाद्य यंत्रों व कलाकारों की बरबस ही याद ताजा हो गयी. कभी ये वाद्य यंत्र, कलाकार गांव कस्बों के सांस्कृतिक, धार्मिक कार्यक्रमों की शान हुआ करती थी. देहाती बोली, देहाती पहनावा, हास्य व्यंग का समायोजन ऐसा बंधा कि लोग देखने, ताली बजाने को मजबूर हो गये. गूंज उठी शहनाई तो बजने लगी तालियां लोक नाटक की शुरुआत शहनाई वादन से किया गया. कलाकार के द्वारा शहनाई बजाते ही पूरा हॉल ताली बजाने लगा. जैसे जैसे शहनाई की आवाज आगे बढ़ती गयी, गीतो के बोल लोगों के समझ में आने लगे, वैसे वैसे तालियां भी बजती रही. इसके साथ ढोल, नगारा के संगत व कलाकारों ने चार चांद लगा दिया. इसी बीच अचानक राजा का परिधान पहने कलाकार और सेना के परिधान में आये कलाकारों के मंचन को भी लोगों ने खूब सराहा. सेना बने कलाकार के गीत ‘’हाय हाय रे आमक चटनी, मजा देवहू कखनी’’ पर लोग खूब झूमे.
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