Madhubani News : मानक अनुरूप संचालित नहीं होने पर नर्सिंग होम से जवाब - तलब

Published by : GAJENDRA KUMAR Updated At : 02 Jan 2026 9:48 PM

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निबंधन के बाद भी मानक अनुरूप नर्सिंग होम का संचालन नहीं करने के मामले में सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने फुलपरास स्थित मां दुर्गा अस्पताल के संचालक पर 50 हजार रुपये का अर्थ दंड लगाया है.

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मधुबनी.

निबंधन के बाद भी मानक अनुरूप नर्सिंग होम का संचालन नहीं करने के मामले में सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने फुलपरास स्थित मां दुर्गा अस्पताल के संचालक पर 50 हजार रुपये का अर्थ दंड लगाया है. सिविल सर्जन ने संचालक को पत्र प्राप्ति के 24 घंटे के अंदर स्पष्टीकरण देकर अर्थ दंड की राशि जिला निबंधन प्राधिकार के नाम से (बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से) जमा करने का निर्देश दिया है. आदेश का उल्लंघन करने पर संचालक के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई सुनिश्चित किया जाएगा.

मानक के अनुरूप संचालित नहीं पाया गया नर्सिंग होम

डीएम आनंद शर्मा के निर्देश पर सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने एनसीडीओ डॉ. एसएन झा एवं डीबीवीडीसीओ डॉ. डीएस सिंह को अनुमंडलीय अस्पताल के सामने स्थित मां दुर्गा अस्पताल क्लिनिक की जांच का निर्देश दिया. सिविल सर्जन को सौंपे प्रतिवेदन में जांच दल ने निबंधन के बाद भी मानक के अनुरूप संचालित नहीं होने की बात कही है. जिसके आलोक में सीएस ने संबंधित संस्था के संचालक से स्पष्टीकरण के साथ ही 50 हजार रुपए का अर्थ दंड लगाया है. सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने कहा कि जिला में मानक के अनुरूप संचालित नहीं होने वाले अभी तक 175 संचालकों पर अर्थ दंड लगाया गया है. जिससे विभाग को 75 लाख रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है. यह जानकारी देते हुए सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने राज्य में क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट रेगुलेशन लागू किए जाने के बाद अब सभी तरह के क्लिनिक, नर्सिंग होम, अस्पताल, लैबोरेट्री का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है. इसके लिए जिला स्तर पर जिला प्राधिकार के गठन की अधिसूचना जारी की गई है. अगर कोई क्लिनिक अस्पताल या नर्सिंग होम बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित किया जाता है, तो पहली बार उल्लंघन करने पर 50 हजार, दूसरी बार उल्लंघन करने पर 1 लाख और उसके बाद निबंधन नहीं कराने पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है. राज्य सरकार द्वारा क्लीनिकल एस्टैब्लिशमेंट रजिस्ट्रीकरण और विनियमन अधिनियम 2010 में विधानमंडल के दोनों सदनों में पास कर लिया है. इसे प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा बिहार नैदानिक स्थापना रजिस्ट्रीकरण एवं विनियमन नियमावली 2013 को अधिसूचित कर दिया है. इसे प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा नैदानिक स्थापना राज्य परिषद और जिला रजिस्ट्रीकरण प्राधिकार का गठन किया गया है. इस रेगुलेशन के प्रभावी होने के बाद अब राज्य के सभी प्रकार के इलाज करने वाले संस्थान का निबंधन का रास्ता साफ हो गया है.

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