Madhubani : कर्ज के बोझ तले दबे किराना व्यवसायी दिलीप निकले थे आत्महत्या करने , अंतिम समय में मन बदला

Published by :DIGVIJAY SINGH
Published at :01 Apr 2025 10:05 PM (IST)
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Madhubani : कर्ज के बोझ तले दबे किराना व्यवसायी दिलीप निकले थे आत्महत्या करने , अंतिम समय में मन बदला

विद्यापति चौक के गायब किराना व्यवसायी दिलीप कुमार साह को बरामद कर लिया गया है.

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Madhubani : बेनीपट्टी विद्यापति चौक से 24 मार्च की रात गायब हुए थे दिलीप कुमार साह, दिल्ली से हुए बरामद बेनीपट्टी . विद्यापति चौक के गायब किराना व्यवसायी दिलीप कुमार साह को बरामद कर लिया गया है. उनके परिजनों ने व्यवसायी को दिल्ली से लाकर मंगलवार को बेनीपट्टी थाना को सुपूर्द कर दिया. उनकी बरामदगी के बाद लापता होने का कारण चौंकाने वाला है. बताया जा रहा है कि किराना व्यवसायी कर्ज के बोझ तले दबे थे. कर्ज चुकता करने को लेकर लोगों द्वारा तकादा करने और कर्ज देने वाले महाजनों की धमकी से परेशानथे. इस दबाव की वजह से उन्होंने आत्महत्या की कोशिश की थी, पर अंतिम समय में आत्महत्या करने की की हिम्मत जवाब दे गयी और वे अंबाला निकल गये. इधर, स्थानीय लोग एवं व्यापारियों ने इनके लापता होने पर प्रदर्शन शुरू कर दिया था. व्यवसायियों ने मशाल जुलूस निकाल कर अपना विरोध जताया था. मंगलवार को बेनीपट्टी थाना परिसर में एसडीपीओ निशिकांत भारती ने प्रेस वार्ता कर बताया कि 25 मार्च की सुबह करीब साढ़े आठ बजे बेनीपट्टी थानाध्यक्ष को सूचना मिली थी कि बेनीपट्टी निवासी किराना व्यवसायी दिलीप कुमार साह 24 मार्च की रात से गायब है. उनकी बाइक, शर्ट-पैंट एवं अन्य कागजात आदि बेनीपट्टी थाना के सोइली पुल के पास पड़ा हुआ है. इसके बाद थानाध्यक्ष ने इसकी जानकारी वरीय पदाधिकारी को देते हुए सूचना के सत्यापन एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए दल-बल के साथ सोइली पुल के पास पहुंचकर एनडीआरएफ, कुशल गोताखोर, तकनीकी सेल, एफएसएल टीम एवं डॉग स्कवॉयड आदि के सहयोग से उनकी खोजबीन करायी, लेकिन कोई सफलता हाथ नहीं लगी. 25 मार्च को दर्ज हुई प्राथमिकी : इसके बाद व्यवसायी के पुत्र रोमन कुमार ने 25 मार्च को स्थानीय थाना में आवेदन देकर अज्ञात पर प्राथमिकी दर्ज करायी गई. इसके बाद एसपी के निर्देश के आलोक में मेरे नेतृत्व में विशेष छापेमारी टीम का गठन करते हुए व्यवसायी श्री साह की बरामदगी के लिये वैज्ञानिक अनुसंधान शुरू किया गया. मंगलवार को किराना व्यवसायी श्री साह को सकुशल बरामद कर लिया गया. 29 मार्च को परिजनों से की थी बात जब उनसे वहां नही रहा गया तो उन्होंने 29 मार्च को किसी दूसरे व्यक्ति के फोन से अपने परिजनों से बात कर अंबाला में होने की जानकारी दी. इसके बाद वे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचे और बेनीपट्टी से उनके परिजनों ने नई दिल्ली जाकर वहां से लाया. एसडीपीओ ने अवैध संबंध, गुमशुदगी के बीच किसी परिजनों से बात करने व अन्य किसी तरह की साजिश होने से इनकार करते हुए बताया कि मामले का अनुसंधान जारी है और साक्ष्य अनुसार अग्रेतर कार्रवाई की जायेगी. साथ ही जुलूस निकालने व बाजार आदि बंद कराने में शामिल लोगों को चिन्हित किये जाने की भी बात कही. मौके पर बेनीपट्टी थानाध्यक्ष शिव शरण साह व एसआइ संतोष कुमार समेत अन्य पुलिस कर्मी भी मौजूद थे. 29 मार्च को परिजनों से की थी बात जब उनसे वहां नही रहा गया तो उन्होंने 29 मार्च को किसी दूसरे व्यक्ति के फोन से अपने परिजनों से बात कर अंबाला में होने की जानकारी दी. इसके बाद वे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचे और बेनीपट्टी से उनके परिजनों ने नई दिल्ली जाकर वहां से लाया. एसडीपीओ ने अवैध संबंध, गुमशुदगी के बीच किसी परिजनों से बात करने व अन्य किसी तरह की साजिश होने से इनकार करते हुए बताया कि मामले का अनुसंधान जारी है और साक्ष्य अनुसार अग्रेतर कार्रवाई की जायेगी. साथ ही जुलूस निकालने व बाजार आदि बंद कराने में शामिल लोगों को चिन्हित किये जाने की भी बात कही. मौके पर बेनीपट्टी थानाध्यक्ष शिव शरण साह व एसआइ संतोष कुमार समेत अन्य पुलिस कर्मी भी मौजूद थे. उनसे प्राथमिकी पूछताछ के दौरान यह बात सामने आयी कि कुछ स्थानीय लोगों कसे उन्होंने ब्याज पर पैसा लिया, जिसे सूद समेत कई गुना लौटा चुके थे. इसके बावजूद उन लोगों के द्वारा उन्हें लगातार और पैसा देने के लिए परेशान किया जा रहा था एवं उनकी दूकान पर जाकर धमकी दी जाती थी. इसके कारण वे तनाव में रहने लगे और तंग आकर घटना के दिन आत्महत्या करने के उद्देश्य से सल्फास की गोली आदि लेकर सोइली पुल के पास पहुंचे. जहां उन्होंने सोचा कि सल्फास की गोली खाकर नदी में कूदकर आत्महत्या कर लेंगे. इसके लिये उन्होंने अपना कपड़ा भी वहीं खोल दिया था. लेकिन आत्महत्या करने के लिये उनकी हिम्मत काम नही की. इसके बाद वे अपनी बाइक, कपड़ा, डायरी एवं अन्य कागजात आदि वही पर छोड़कर अपनी डिक्की में रखे दूसरा कपड़ा पहनकर वहां से टेंपो से धकजरी एवं धकजरी से पुनः मधुबनी रेलवे स्टेशन पहुंच गये. जहां से वे अलग-अलग जगहों से ट्रेन पकड़कर अंबाला स्टेशन पर पहुंचे और वहीं पर वे तीन दिनों तक रहे.

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