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स्वास्थ्य संस्थानों में फायर सेफ्टी की करें व्यवस्था

Updated at : 07 May 2024 10:30 PM (IST)
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स्वास्थ्य संस्थानों में फायर सेफ्टी की करें व्यवस्था

कार्यपालक निदेशक (ईडी) ने सीएस को जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में नेशनल बिल्डिंग कोड ऑफ इंडिया, आग और जीवन सुरक्षा के तहत फायर सेफ्टी की उचित व्यवस्था के लिए जरूरी निर्देश दिया है.

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मधुबनी. कार्यपालक निदेशक (ईडी) ने सीएस को जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में नेशनल बिल्डिंग कोड ऑफ इंडिया, “आग और जीवन सुरक्षा ” के तहत फायर सेफ्टी की उचित व्यवस्था के लिए जरूरी निर्देश दिया है. ईडी के निर्देश में कहा गया है कि गर्मी के महीने में आग लगने की समस्या अधिक होती है. बिजली उपकरणों और कनेक्शन के रखरखाव एवं बढ़े हुए विद्युत भार ऐसी दुर्घटनाओं के जोखिम को बढ़ाते हैं. अस्पताल जैसे संस्थान में अति-संवेदनशील मरीजों इनमें लाइफ सपोर्ट वाले रोगियों, विकलांग रोगी, बाल रोगी, बुजुर्ग रोगियों के लिए जोखिम की संभावना को बढ़ाता है. जिसे देखते हुए सीएस डा. नरेश कुमार भीमसारिया ने अधीक्षक, उपाधीक्षक, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, अस्पताल प्रबंधक एवं प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक को स्वास्थ्य संस्थानों में आग के खतरे की रोकथाम के लिए तैयारी और प्रभावी प्रतिक्रिया की सुविधा के लिए आवश्यक तकनीकी कदम उठाने का निर्देश दिया है. इसके तहत सामान्य प्रावधानों में फंक्शनल फायर डिटेक्शन एंड अलार्म सिस्टम, ऑटोमेटिक स्प्रिंकलर सिस्टम, फायर एक्स्टिंग्युसर, वेट राइजर्स, वाटर स्टोरेज एवं आपूर्ति को शामिल करने का निर्देश दिया है. सीएस ने कहा कि नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी द्वारा भी हॉस्पिटल सेफ्टी का दिशा निर्देश जारी किया गया है. गाइडलाइन के अनुसार आपदा के समय मरीज एवं स्टाफ के निकास के लिए पर्याप्त खुला स्थान अस्पताल प्रबंधन द्वारा उपलब्ध कराना है. इसके साथ ही अस्पताल के विभिन्न ब्लॉक के आसपास आपातकालीन गाड़ियों के आवागमन के लिए पर्याप्त खुली जगह होनी चाहिए. ज्ञात हो कि सदर अस्पताल में 21 फायर एक्स्टिंग्युसर लगाया गया है. इसमें लेबर रूम में 4, ब्लड बैंक में 2, ऑपरेशन थिएटर में 3 ओपीडी में 4, आई वार्ड में 2 एवं एसएनसीयू में 4 फायर एक्स्टिंग्युसर लगाया गया है. स्वास्थ्य संस्थानों सहित निजी नर्सिंग होम में भी फायर सेफ्टी जरूरी स्वास्थ्य संस्थानों सहित मुख्यालय स्थित संचालित नर्सिंग होम में आग से बचाव के लिए कई तरह के उपाय किए गए हैं. इसके तहत सभी अस्पतालों में अग्निशमन यंत्र के साथ-साथ आग से बचाव के लिए कार्बन डाइऑक्साइड पाइप लाइन स्थापित किया गया है. हालांकि कई निजी नर्सिंग होम मुख्यालय के व्यस्ततम मोहल्लों में स्थापित है. जहां अग्निशमन सेवा आसानी से नहीं पहुंच सकता है. लेकिन आग से निपटने के लिए नर्सिंग होम संचालकों द्वारा पर्याप्त मात्रा में व्यवस्था किया गया है. वहीं सदर अस्पताल में अग्निशमन यंत्र लगाया गया है. साथ ही जारी गाइडलाइन का शत-प्रतिशत अनुपालन किया गया है. सदर अस्पताल के पास फायर एनओसी उपलब्ध है. इसके अलावा जिस निजी नर्सिंग होम के पास एनओसी अपडेट नहीं है, उसके द्वारा एन ओसी अपडेट करने की प्रक्रिया संचालक द्वारा किया गया है. इससे कि आग लगने की स्थिति में तत्काल आग पर काबू पाया जा सके. इसके साथ ही मरीजों को सुरक्षित आग की दुर्घटना से बचाया जा सके. जिला मुख्यालय में 2 दर्जन अस्पताल है संचालित जिला मुख्यालय में सदर अस्पताल सहित 2 दर्जन निजी नर्सिंग होम संचालित है. जिसमें लाइफलाइन हेल्थ केयर गंगासागर, हार्ट हॉस्पिटल मंगरौनी, मैक्स मेडिको बीएन झा कॉलोनी, जननी सूर्या क्लीनिक गंगासागर चौक, डॉक्टर जी एस फाउंडेशन हॉस्पिटल चकदह, क्रिब्स हॉस्पिटल बसुवारा, बीके मेमोरियल मेटरनिटी हेल्थ केयर मंहथी लाल चौक, आस्था सर्जिकल हॉस्पिटल गदियानी, मिथिला नव जीवन हॉस्पिटल, मधुबनी प्राइड हॉस्पिटल किशोरी लाल चौक, श्री केशव हेरिटेज, अमृत शिशु सदन, एनआरएस हॉस्पिटल, जेम्स फोर्ड हॉस्पिटल संकट मोचन मंदिर, एवरग्रीन हड्डी हॉस्पिटल, गोलू एंड लक्की मेडिकेयर होम, एएस हॉस्पिटल राम चौक, माधुरी हेल्थ केयर सहित अन्य शामिल है.

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