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Madhubani News : 14 जनवरी को मकर संक्रांति, चतुर्दशी 17 व मौनी अमावस्या 18 को

मकर संक्रांति पर्व के लिए बाजार में तिल गुर से बने लड्डू, मुरही, लाई, चुड़लाई से बाजार सज गयी है. यह पर्व अलग अलग प्रदेशों में अलग अलग नामों से जाना जाता है.

Madhubani News : मधुबनी. मकर संक्रांति पर्व के लिए बाजार में तिल गुर से बने लड्डू, मुरही, लाई, चुड़लाई से बाजार सज गयी है. यह पर्व अलग अलग प्रदेशों में अलग अलग नामों से जाना जाता है. मिथिला में यह पर्व तिला संक्रांति के नाम से प्रचलित है. मिथिला क्षेत्रीय पंचाग के अनुसार 14 जनवरी को मकर संक्रांति, चतुर्दशी 17 एवं मौनी अमावस्या 18 जनवरी को मनाया जाएगा़ हालांकि 14 जनवरी को एकादशी तिथि के कारण खिचड़ी बनाने पर संशय बना हुआ है. तिल संक्रांति का धार्मिक और ज्योतिष दृष्टि से खास महत्व है. इस बार माघ कृष्ण पक्ष की एकादशी और मकर संक्रांति का एक साथ होना एक दुर्लभ संयोग बना रहा है. जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में गोचर करते हैं, इस गोचर को मकर संक्रांति कहा जाता है. पंचांग के अनुसार 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे. इस बार तिथि के संबंध में कई लोगों में संशय बना हुआ है. पं. पंकज झा शास्त्री ने कहा कि सूर्य का गोचर दोपहर में होने के कारण कुछ लोग 14 तो कुछ 15 जनवरी को खिचड़ी पर्व मनाने की तैयारी में है. हिंदू पंचांग के अनुसार, दोपहर के समय सूर्य मकर राशि में गोचर कर रहे हैं. ऐसे में 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनायी जाएगी. वहीं एकादशी के कारण खिचड़ी 15 जनवरी को बनाई जाएगी. 14 जनवरी के दिन षट्तिला एकादशी भी है. पुराणों में भी मकर संक्रान्ति का वर्णन मिलता है. पुराणकारों ने सूर्य के दक्षिण से ऊर्ध्वमुखी होकर उत्तरस्थ होने की वेला को संक्रान्ति पर्व एवं संस्कृति पर्व के रूप में स्वीकार किया है. पौराणिक विवरण के अनुसार, उत्तरायण देवताओं का एक दिन एवं दक्षिणायन एक रात्रि मानी जाती है. यह वैज्ञानिक सत्य है कि उत्तरायण में सूर्य का ताप शीत के प्रकोप को कम करता है. पं. पंकज झा शास्त्री ने कहा है कि नरक निवारण चतुर्दशी मुख्य रूप से माघ महीने की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को मनाई जाती है. यह शिव-पार्वती विवाह से जुड़ी है. यह व्रत पाप मुक्ति व लंबी आयु के लिए भगवान शिव को समर्पित है. इस बार नरक निवारण चतुर्दशी 17 जनवरी को है जबकि मौनी अमावस्या 18 जनवरी को होगी. मौनी अमावस्या का धार्मिक महत्व आत्म-शुद्धि, मौन व्रत, पवित्र नदियों में स्नान, दान, और पितृ दोष निवारण है. इससे आध्यात्मिक उन्नति, मन की शांति और मोक्ष मिलता है. वहीं वैज्ञानिक रूप से इसका महत्व मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा है. यहां मौन और ध्यान से तनाव कम होता है. एकाग्रता बढ़ती है और नकारात्मक विचार शांत होते हैं.

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