Madhubani News : मौसम की दोहरी मार, छाया रहा कुहासा, बढ़ी कनकनी

मुख्यालय सहित जिलेभर में शुक्रवार को कुहासा व पछिया हवा के कारण धूप निकलने के बाद भी कनकनी बरकरार रही.
मधुबनी.
मुख्यालय सहित जिलेभर में शुक्रवार को कुहासा व पछिया हवा के कारण धूप निकलने के बाद भी कनकनी बरकरार रही. हाड़कंपा देने वली ठंड से जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा. सुबह में कुहासा व पछिया हवा के कारण जहां लोग घरों में दुबके रहे, वहीं दिन चढ़ने के साथ ठंड से थोड़ी राहत मिली. कुहासा के कारण गुरुवार को नयी दिल्ली – जयनगर स्वतंत्रता सेनानी सुपरफास्ट तय समय शाम 6:30 बजे से 14 घंटा विलंब होकर शुक्रवार की सुबह 8:30 बजे पहुंची. ट्रेनों के विलंब से परिचालन के कारण यात्रियों को अपने गंतव्य जाने के लिए शारीरिक, मानसिक व आर्थिक परेशानियों से गुजरना पड़ा. हाड़कंपा देने वाली ठंड के बाद भी चौक चौराहों पर लोगों का आना-जाना पूर्व की भांति ही जारी रहा. नगर निगम की ओर से सार्वजनिक स्थलों पर कहीं भी अलाव की व्यवस्था नहीं है. ठंड के बाद भी मजदूर अपने-अपने काम पर लगे रहे.कंपकंपाती ठंड में बुजुर्ग, बीमार व बच्चों का रखें विशेष ख्याल
पिछले एक पखवाड़े से कंपकंपाती ठंड ने जीना लोगों को मुश्किल कर दिया है, हालांकि गुरुवार को धूप निकलने से थोड़ी राहत मिली, लेकिन शुक्रवार को मौसम एक बार फिर बेरहम हो गया. चिकित्सकों ने ऐसे मौसम में लोगों को सजग रहने की सलाह दी. खासकर बीमार, बुजुर्ग व बच्चों का खास ध्यान रखने की आवश्यकता है.सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने कहा कि ठंड में सांस व हृदय रोगियों की कठिनाई बढ़ने लगती है. ठंड के कारण ब्लड प्रेशर बढ़ने, हाइपोथर्मिया, नसों व जोड़ों का दर्द भी बढ़ने लगता है. इसलिए सबसे पहले ठंड से बचने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता है. इसके अलावे सर्दियों में राइनो वायरस की सक्रियता बढ़ जाती है. जिससे खांसी, जुकाम के साथ फेफड़ों में इंफेक्शन और सांस की नली में सूजन से सांस फूलने (क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज-सीओपीडी) की दिक्कत बढ़ जाती है. सीएस ने कहा कि ठंड बढ़ने से हाइपोथर्मिया होने का डर बना रहता है. इस बीमारी में ब्लड प्रेशर कम होने और शरीर के विभिन्न अंगों के ठीक से काम करने में कठिनाई होने लगती है. वहीं खून की नसें सिकुड़ने की वजह से ब्लड प्रेशर बढ़ने से हार्ट अटैक का डर भी बना रहता है. आमतौर पर ठंड के मौसम में बुजूर्गों के साथ-साथ बच्चे भी बीमार पड़ जाते हैं. शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से बच्चों पर बदलते मौसम का असर अधिक होता है. इस समय बच्चों में निमोनिया के साथ ही डायरिया होने की संभावना ज्यादा रहती है, लिहाजा अधिक सतर्कता की जरूरत है.
सिविल सर्जन ने कहा कि वर्तमान समय में ठंड से बचें. अत्यधिक ठंड में सुबह या शाम को टहलने नहीं निकलें. बाहर निकलना बहुत जरूरी हो तो पूरे गर्म कपड़े पहनकर रखें. इम्युनिटी बढ़ाने के लिए हाई प्रोटीन डाइट युक्त मोटी दालें और विटामिन सी युक्त मौसमी फल, हरी सब्जियां खानपान में शामिल करें. गुनगुना पानी नियमित अंतराल पर पीते रहें. अगर बीपी, हार्ट, डायबिटीज की दवा लेते हैं तो इसे नियमित रूप से लेते रहें. नियमित अंतराल पर डॉक्टर की सलाह भी लें. आमतौर पर सर्दी के मौसम में लोग सामान्य दिनों के मुकाबले अधिक भोजन करते हैं जो ठीक नहीं है. साथ ही तेल-मसाले से युक्त भोजन से भी परहेज करने की जरूरत है. शरीर को ढककर रखें और गर्म कपड़े पहना करें.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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