Madhubani News : 108 छठ व्रतियों के बीच छठ पूजन सामग्री का किया वितरण

Published by : GAJENDRA KUMAR Updated At : 26 Oct 2025 9:47 PM

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चार दिनों तक चलने वाला महापर्व छठ पूजा शनिवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया.

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जयनगर. चार दिनों तक चलने वाला महापर्व छठ पूजा शनिवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया. पर्व की तैयारी जोर-शोर से चल रहा हैं. छठ पूजा को ध्यान में रखते हुए मां अन्नपूर्णा महिला मंच और मां अन्नपूर्णा कम्युनिटी किचेन के संयुक्त तत्वावधान में छठ व्रतियों के बीच पूजा सामग्री और साड़ी वितरण किया गया. 108 छठ व्रतियों में सामग्रियां वितरित की गई. इन सामग्री में सूती साड़ी, सूप, कोनिया, नारियल, निंबू, गुड़, चीनी, आटा, मैदा, अगरबत्ती, माचिस, गुड़, अरगौती का सामान, खीर मसाला वितरित किया गया. जयनगर क्षेत्र में पिछले चार सालों से लगातार हर साल मां अन्नपूर्णा सेवा समिति के तत्वावधान में व्रतियों के बीच फल व अन्य पूजा सामग्री का वितरण होता है.

इस दौरान मुख्य पार्षद कैलाश पासवान, प्रखंड सचिव भूषण सिंह, न्यू प्रोडजी स्कूल के डायरेक्टर आनंद कुमार के अलावा अन्य कई बुद्धिजीवी एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे. मां अन्नपूर्णा कम्युनिटी किचेन के संरक्षक डॉ सुनील कुमार राउत, प्रवीर महासेठ, उपेंद्र नायक, गणेश कांस्यकार, राकेश मांझी, परमानंद ठाकुर, जय प्रकाश नायक एवं सदस्यों में प्रथम कुमार, नवीन साह, विवेक सूरी, लक्मण यादव, सुदीप कुमार, संतोष शर्मा, हर्ष कुमार, सुमित कुमार राउत एवं अन्य कई सदस्य मौजूद रहे. मां अन्नपूर्णा महिला मंच की कामिनी साह, अनीता गुप्ता, सुनीता कांस्यकार, सरिता कांस्यकार समेत अन्य कई सदस्य भी मौजूद रहीं. वक्ताओं ने कहा कि संस्था द्वारा लगातार समाजसेवा में अग्रणी रही है. कहा कि लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा करना चाहते हैं, और छठ के प्रति असीम श्रद्धा रखते हैं. उल्लेखनीय है कि कार्तिक महीने में मनाया जाने वाला लोक आस्था का महापर्व छठ का हिंदू धर्म में एक विशेष और अलग स्थान है. भगवान भास्कर के इस अनुष्ठान में शुद्धता व पवित्रता का विशेष महत्व है. प्रकृति के अवयवो में से एक जल स्रोतों के निकट छठ पूजा का आयोजन होता है. जहां छठ व्रती पानी में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ देते है. यह एक ऐसा अनुष्ठान है, जिसमे डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. उनकी अराधना की जाती है. चार दिवसीय इस अनुष्ठान के तीसरे दिन छठ व्रती पहले दिन डूबते सूर्य की अराधना करते हैं. उसके बाद अगले दिन प्रातः उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही इस महापर्व का समापन होता है.

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