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Madhubani News. उच्चैठ महोत्सव में दूसरे दिन महाकवि कालिदास की जन्मस्थली पर हुई चर्चा

Updated at : 08 Dec 2024 10:08 PM (IST)
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Madhubani News. उच्चैठ महोत्सव में दूसरे दिन महाकवि कालिदास की जन्मस्थली पर हुई चर्चा

उच्चैठ-कालिदास राजकीय महोत्सव के दूसरे दिन रविवार को पहले सत्र में कालिदास की जन्म स्थली, जीवनी व उनकी रचना पर सेमिनार एवं दूसरे सत्र में विचार गोष्ठी के बाद कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया.

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Madhubani News. बेनीपट्टी. प्रखंड के केवीएस कॉलेज उच्चैठ परिसर में उच्चैठ-कालिदास राजकीय महोत्सव के दूसरे दिन रविवार को पहले सत्र में कालिदास की जन्म स्थली, जीवनी व उनकी रचना पर सेमिनार एवं दूसरे सत्र में विचार गोष्ठी के बाद कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय दरभंगा के कुलपति डॉ. लक्ष्मी निवास पांडेय, पूर्व कुलपति डॉ. देवनारायण झा, महर्षि पाणिनी संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय उज्जैन के पूर्व कुलपति आचार्य मिथिला प्रसाद त्रिपाठी, विधायक विनोद नारायण झा व एमएलसी घनश्याम ठाकुर ने दीप प्रज्वलित कर किया. इस दौरान उज्जैन से आये विद्वान श्री त्रिपाठी ने कहा कि महाकवि कालिदास द्वारा रचित महाकाव्य मेघदूतम में उनकी पत्नी के रूप में उज्जैनी अर्थात उज्जैन की महिला की चर्चा उल्लेखित है. जिसमें मेघ को अपना दूत बनाकर संदेश भेजने की चर्चा की गई है. जिसके आधार पर कालिदास की जन्म स्थली उच्चैठ होने की बात विद्वानों द्वारा कही जाती है. इसके अलावे विभिन्न ग्रंथों में उनका जन्म स्थल उज्जैन व अन्य जगहों पर होने के भी अपने-अपने तरीके से दावे किये जाते रहे हैं. मैं केवल कालिदास की बात करता हूं और अब तक मुझे यह नहीं पता था कि उच्चैठ में कालिदास डीह भी है. मुझे आज यह पता चला है कि यहां कालिदास डीह है तो मैं उस डीह और कालिदास को नमन करता हूं. उन्होंने कालिदास द्वारा रचित मेघदूतम में दांपत्य जीवन की पूर्णता, अभियान शकुंतलम में दुष्यंत और शकुंतला की चर्चा उल्लेखित होने व रघुवंशम सहित अन्य महाकाव्यों की महत्ता पर विस्तार से चर्चा की की. वहीं विधायक विनोद नारायण झा ने कहा कि उज्जैन, भोपाल, बंगाल, रुद्रप्रयाग, श्रीनगर आदि जगहों पर दावा किया जाने लगा है कि कालिदास वहां के थे. जो अप्रमाणित और साक्ष्य पर आधारित नहीं है. उनके जन्मभूमि से संबंधित पर्याप्त साक्ष्य उच्चैठ में होने की बात खतियान में स्पष्ट है. इसलिये कालिदास यही के थे. कार्यक्रम को संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एलएन पांडेय, सहायक प्राध्यापक सह विभागाध्यक्ष संजीत झा सरस, साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार प्राप्त वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. महेंद्र नारायण राम सहित अन्य विद्वनों ने भी कालिदास की जन्मभूमि से संबंधित अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किये. जिसमें कुमार संभवम के साथ महापथ गमनम, कालिदास का स्थान, कालिदासस्य काव्य सौन्दर्यम, रीति-रिवाज व पर्व-त्योहार में महाकवि कालिदास, कालिदास की कृति में सामाजिक चेतना, महाकवि कालिदास विरचित मेघदूत के वैशिष्ट्य, महाकवि कालिदास कृत मेघदूत का मैथिली काव्य विवेचन, कालिदास और मैथिलीत्व, महाकवि कालिदास के मैथिलीत्व निर्धारण किए महाकवि के महाप्रयाण, देववाणी के श्रृंगार कालिदास-उच्चैठ, उच्चैठ के मणिप्रभा महाकवि कालिदास व कालिदास के ऋतु वर्णन आदि शामिल थे. कार्यक्रम का संचालन दीप नारायण विद्यार्थी ने किया. इसके बाद दूसरे सत्र में काव्य पाठ, हास्य व्यंग्य व मैथिली गीतों पर आधारित कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये गये. काव्य पाठ व हास्य व्यंग्य के तीखे वाण ने दर्शकों को खूब मनोरंजन किया. काव्य पाठ व हास्य व्यंग्य कार्यक्रम में मनोज कामत, दिलीप कुमार झा, अंजली कुमारी, कमलेश प्रेमेंद्र, मैथिल प्रशांत, अक्षय आनंद सन्नी, नारायण झा, रामश्रेष्ठ दीवाना व आनंद मोहन झा सहित अन्य लोग भी मौजूद थे.

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