Madhubani News : अमित कुमार मिश्र, मधुबनी.
शहर की यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाने की प्रशासनिक योजना पिछले 45 दिनों से ठंडे बस्ते में है. जिला प्रशासन और परिवहन विभाग की मंशा टेंपो व ई-रिक्शा चालकों की सूची मिलने के इंतजार में ”रिमाइंडर” तक ही सीमित रह गई है. अधिकारी संघ के अध्यक्षों द्वारा सूची सौंपे जाने की राह देख रहे हैं, जबकि शहर की सड़कों पर बेतरतीब परिचालन और जाम का मंजर पहले जैसा ही बना हुआ है.कलर कोडिंग और रूट निर्धारण पर ब्रेक
बीते 25 नवंबर को सड़क सुरक्षा सप्ताह की बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि शहर में चलने वाले लगभग 1000 ऑटो और 1300 ई-रिक्शा के लिए आठ रूट निर्धारित किए जाएंगे. इन वाहनों को विशेष ”कलर कोडिंग” के साथ चलाया जाना था ताकि जाम से मुक्ति मिल सके. दोनों संघों को सात दिनों के भीतर वाहनों और चालकों का पूरा ब्यौरा (गाड़ी नंबर, मालिक व ड्राइवर का नाम-पता) जमा करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन डेढ़ महीना बीत जाने के बाद भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है.
जाम से बेहाल जनता :
परिवहन विभाग के अनुसार, ई-रिक्शा संघ ने अब तक केवल तीन सूचियां दी हैं, जबकि टेंपो चालक संघ की ओर से कोई जानकारी साझा नहीं की गई है. इस प्रशासनिक शिथिलता का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है. गुरुवार को भी थाना चौक से खादी भंडार रोड तक घंटों भयानक जाम लगा रहा. सड़कों पर निर्माण सामग्री गिरने और अनियंत्रित परिचालन के कारण वाहन रेंगते नजर आए.क्या कहते हैं अधिकारी :
जिला परिवहन पदाधिकारी रामबाबू ने बताया कि संघ के अध्यक्षों को सूची सौंपने के लिए लगातार फोन किया जा रहा है और रिमाइंडर भेजे जा रहे हैं. जब तक सूची प्राप्त नहीं होती, निर्धारित आठ रूटों पर कलर कोडिंग के साथ परिचालन शुरू करना संभव नहीं हो पा रहा है. प्रशासन की इस लाचारी ने शहरवासियों की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

