ठंड में बढ़ा निमोनिया व कोल्ड डायरिया का प्रकोप

Author : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 27 Nov 2016 12:28 AM

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मधुबनी : ठंड धीरे- धीरे बढ़ रहा है. तापमान में कमी आती जा रही है. पछिया हवा भी चलने लगी है. पर अब तक लोग पूरी तरह ठंड को नजरअंदाज कर रहे हैं. यह नजरअंदाज करना लोगों को भारी पड़ सकता है. खासकर जिनके घर में छोटे बच्चे हैं. तापमान में गिरावट आने के साथ […]

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मधुबनी : ठंड धीरे- धीरे बढ़ रहा है. तापमान में कमी आती जा रही है. पछिया हवा भी चलने लगी है. पर अब तक लोग पूरी तरह ठंड को नजरअंदाज कर रहे हैं. यह नजरअंदाज करना लोगों को भारी पड़ सकता है. खासकर जिनके घर में छोटे बच्चे हैं. तापमान में गिरावट आने के साथ ही बच्चों में कोल्ड डायरिया व निमोनिया बीमारी आम हो जाती है. यह कई बार जानलेवा भी साबित हो सकता है. ऐसे में यह जरूरी है कि हम कुछ एहतियात बरतें और जब बच्चों में बीमारी के लक्षण दिखे तो तत्काल ही चिकित्सक से सलाह लें.

घर में रखें न्यूमोलाइजर
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डाॅ अजय नारायण प्रसाद व शिशु रोग विशेषज्ञ डाॅ अजय कुमार चौधरी बताते है कि बदलते मौसम में 0 से 5 वर्षों के बच्चों में सर्दी, खांसी, बुखार, सांस की तकलीफ आदि बीमारियों का प्रकोप अधिक होता है. डा. चौधरी इस बाबत सलाह दते है कि ठंड के मौसम बचाव ही सुरक्षा है.
बावजूद इसके बच्चों को हमेशा गर्म कपड़े पहनाकर रखे. गुन-गुने पानी से उन्हें स्नान करावे, घर में न्यूमोलाइजर अवश्य रखें. सर्दी खासी व बुखार की शिकायत होने पर बच्चों को तत्काल चिकित्सकों से दिखाकर उचित सलाह लें. बच्चों की बीमारियों को नजर अंदाज नहीं करें.
सांस तेज चले, तो दिखाएं
ठंड के मौसम में बच्चों में अधिकतर निमोनिया बीमारी का खतरा रहता है. यह बीमारी बच्चों में होने का मतलब है कि बच्चे को ठंड अधिक लग गयी है. इस बीमारी का लक्षण है कि बच्चे तेज तेज सांस लेने लगते हैं. पेट खपने लगता है व बुखार भी चढ़ जाता है. इस बीमारी में बच्चे का चेहरा बेरूखा दिखने लगता है. यदि इस प्रकार के लक्षण बच्चों में दिखे तो तत्काल ही योग्य चिकित्सक से दिखाना चाहिए. बच्चों को गर्म कपड़े से ढंक कर रखना चाहिए एवं कमरा भी गर्म रहना चाहिए.
ठंड में बच्चों को निमोनिया व कोल्ड डायरिया से बचाएं
सही देखभाल जरूरी बीमारी के दिखे लक्षण तो डॉक्टर का लें सलाह
कोल्ड डायरिया भी खतरनाक
बच्चों में ठंड के मौसम में कोल्ड डायरिया होना भी आम है. यह बीमारी भी कम खतरनाक नहीं है. इस बीमारी में बच्चों को जल्दी जल्दी पतला दस्त होने लगता है. जिससे शरीर में पानी का मात्रा कम हो जाता है.
इस बीमारी में एंटी डायरियल दवा के साथ साथ जिंक सस्पेंसन दवा का उपयोग किया जाता है. दोनों ही बीमारी में बच्चों के प्रति सावधानी बरतना आवश्यक है. रात में सोते समय बच्चे शरीर पर से कपड़ा ना फेंक ले, इसके लिये मां को विशेष ध्यान रखने की जरूरत है. रात में उठकर बच्चे को देखते रहना चाहिए कि बच्चे को बुखार तो नहीं चढ़ गया है.
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